ज्योतिषविद् गणितज्ञ डा0 जीवनाथ ओझा के मुर्ती का हुआ अनावरण

ज्योतिषविद् गणितज्ञ डा0 जीवनाथ ओझा के मुर्ती का हुआ अनावरण
चहनियां चन्दौली।
स्थानीय क्षेत्र मनीषियों, विद्वानां, तपस्वियां से भरा पड़ा हुआ है। जिन्होने समाज के उत्थान के लिए अपना सब कुछ अर्पण कर चुके है। ऐसे ही एक महान महामनीषि ज्योषिविद् गणितज्ञ व सरस्वती इण्टर कालेज टाण्डा के संस्थापक प्राचार्य शिक्षा जगत की बेमिशाल अलख जगाने वाले प्रखर विद्वान स्व0 डॉ0 जीवनाथ ओझा जी की समृतियों को अक्षुण बनाये रखने के लिए उनकी प्रतिमा का अनावरण कार्यक्रम के मुख्य अतिथ महंत श्री श्री रामेश्वर दास जी सुतीक्षण मुनि आश्रम चित्रकूट धाम द्वारा किया गया। महंत श्री श्री रामेश्वर दास ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि डा0 जीवनाथ जी का पूरा जीवन समाज के सकल कल्याणार्थ हेतु रहा उन्होने अपने जीवन अमीरी-गरीबी, ऊच-नीच, छुवाछूत जैसी तमाम रूढ़ीवादी मानसिकता वालों को सदैव समाज के उत्थान करने के लिए प्रेरित किया करते थे और अपना पूरा जीवन शिक्षा जगत व्यतीत करते हुए लोगों को शिक्षित बनाकर उन्हे शिक्षा के प्रति जागृत करते रहते थे। श्री ओझा ने ज्योतिषाचार्य आदि संपादक महावीर पंचांग एवं पूर्व प्रधानाचार्य जैसे महत्वपूर्ण पदो पर कार्य किया था। वही कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि मनीष पाण्डेय प्रदेश उपाध्यक्ष हिन्दू युवा वाहिनी ने कहा कि श्री ओझा जी का सरल एवं सरस था उन्हाने अपने जीवन काल में शिक्षा की अलख जगाते रहते थे उन्होने रास्ता चलते, घर बैइे वगैर किसी काम के घूमने वाले लोगे को भविष्य को देखते हुए उन्हे शिक्षा के जागृत करते थे और उन्होने सरस्वती इ0का0 टाण्डाकला की स्थापना कर लोगों को जागृत करते रहते थे। सकूल छात्राओं द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। वही इस दौरान पूर्व ग्राम प्रधान जयप्रकाश तिवारी, हरिद्वार ओझा, शिवपूजन ओझा, शिवशंकर ओझा, श्रेयांश, श्रीमती कादम्बिनी ओझा, रामेश्वर नाथ ओझा, शशांक शेखर ओझा, डा0 एस0एन0 ओझा सहित सैकड़ो लोगां मौजूद रहे। वही कार्यक्रम का संचालन धनन्जय उर्फ निखिल ओझा ने किया।

भगवान भास्कर के जयकारे से गूजायमान हुई अध्यात्मिक नगरीरामनगर वाराणसीविन्ध्य पर्वत के तलहटी में भगवान भोले नाथ की त्रिशूल पर वसी नगरी वाराणसी में चार द्विवसीय डाला छठ बड़े ही धूॅमधाम के साथ मनाया गया। मॉ भगवती गंगा के दोनां तटां अध्यात्मिक नगरी तो दुसरी तरफ रामनगर के राजा का किला स्थित है। अस्सी घाट से लेकर राजघाट तक व रामनगर से लेकर पड़ाव डोमरी तक हजारां नर नारी भगवान भास्कर के महापर्व को पूर्ण करने में लगे रहे। जिसके क्रम में मंगलवार की अल सुबह ही व्रतियो ने मॉं गंगा के तट पर पहुच कर उदयाचल भगवान भास्कर को अर्ध्य दिया। जैसे भगवान भास्कर की किरणे मां गंगा के स्पर्श की कि चारों तरफ भगवान भास्कर व छठी मइया के गगन भेदी जयकारे से पूरा क्षेत्र गूजायमान हो गया और इसी अर्ध्य के साथ भगवान भास्कर महापर्व समाप्त हो गया।