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Harshita Mehani

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में अग्रणी हैं।हमारा उद्देश्य सिर्फ राजनीतिक एवं चटपटी सूचना देना ही नही, बल्कि समाज के समक्ष खबरों को इस ढंग से रखना है कि
उनका वैज्ञानिकवाद में रुझान बढे। हम समाज को ऐसी सूचना देना चाहते है, कि वह उन पर गंभीरता से विचार करें, सिर्फ अपडेट
रहने के लिए नहीं। 

हमारा प्रयास है कि सरल किन्तु गम्भीर शब्दों में जनता के हित के लिए जनता की खबरों को जनता के बीच पहुँचाना।

मिशन शक्ति पांच के अंतर्गत महिला एवं बालिका सुरक्षा कार्यक्रम आयोजन चहनिया चंदौलीपावर एंजेल के रूप में अंशिका मौर्य कक्षा 8 मधु शर्मा कक्षा 7 एवं पायल प्रजापति कक्षा 6 अपने इस कार्यक्रम में जागरूक करने के लिए सबको सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन का संदेश दिया ! प्रधानाध्यापक वीरेंद्र सिंह यादव ने बताया की आज बालिकाओं को शिक्षा से समृद्ध करते हुए उन्हें जीवन कौशल तथा कौशल विकास की ट्रेनिंग देकर उन्हें अपने पैरों पर खड़ा करना है ताकि समाज में वह मजबूती के साथ अपने कार्य को कर सके जिसमें कंपोजिट विद्यालय हृदयपुर की छात्रा आराध्या यादव ने प्रथम स्थान तथा दीपिका यादव ने चौथा स्थान प्राप्त कर टॉप टेन में जगह बनाई! इसके पश्चात जनपद स्तर पर यह प्रतियोगिता होगी जिसमें टॉप फाइव बच्चों का चयन कर उन्हें सम्मानित किया जाएगा!आज उन्हें मिशन शक्ति के अंतर्गत सम्मानित किया गया !इस अवसर पर इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाध्यापक वीरेंद्र सिंह यादव, नंद कुमार शर्मा, बृजेश कुमारमिश्रा, लक्ष्मीकांत त्रिपाठी, उमेश, उमा चौबे, प्रदीप कुमार सिंह, रूबी सिंह, गौतम लाल, राम भजन राम ,सुशीला देवी ,विजय राज रवि तथा सभी छात्र छात्राएं उपस्थिति रहे!

मनुष्य के हृदय में होता है भगवान का वास-पंडित शक्ति मुगलसराय चन्दौली तारा जीनपुर क्षेत्र स्थित सहरोई गांव में विगत पांच वर्षों की भांति इस वर्ष भी श्री हनुमान जयंती के पावन अवसर नवयुवक मंगल दल सहरोई के तत्वाधान में सप्त दिवसीय संगीमय श्रीराम कथा का आयोजन किया गया है। कथा के दूसरे दिन पंडित शक्ति तिवारी ने नारायण के दिव्य अवतार को समझाते हुए कहा की भगवान का अवतार प्रत्येक मनुष्य के हृदय वेश में होता है। अवतार को समझाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान अपनी भावना को छोड़कर के धेनु, सुर, संत, हित में लिन्ह, मनुज अवतार भगवान ब्राह्मणों के गाय माता, के और संतों के हितों के लिये धरती पर मनुष्य का शरीर धारण करके आते हैं। इसी को समझाते हुए भगवान के बाललीला का भी वर्णन किया और उन्होंने बतलाया की चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ एक पुत्र के लिए रो रहे थे और गुरु वशिष्ट के द्वारा श्रृंगी ऋषि के पुत्र प्राप्ति यज्ञ करने से तुमको चार-चार पुत्रों की प्राप्त हुयी। इसी के बाद चारों पुत्रों का नामांकरण गुरु वशिष्ट के द्वारा करवाते हुए इन्होंने बतलाया की विश्वामित्र जो की महान ऋषि थे। असुरों का समूह जब उन्हें सताया तो उन्हें भी भगवान को मांगने की जरूरत पड़ी और विश्वामित्र सनाथ हुये और भगवान वन में तारकासुर का एक ही बाण में बध कर दिये। मारीच व सुबाहु को अग्निबाण से यज्ञ की रक्षा की। इस दौरान सैकड़ां लोगो का जन सैलाब उमड़ा रहा। कार्यकर्ता राहुल मिश्रा, अमित मिश्रा, रोहित, पवन, शिशु मिश्रा, विराट, उमेश, महानंद, दिनेश, शुभम, गोलू, तबला वादक अनिल तिवारी, सैकड़ां श्रद्धालु उपस्थित रहे।