साहिब श्री गुरु नानक देव जी महाराज का धूमधाम से मनाया गया प्रकाश पर्व

साहिब श्री गुरु नानक देव जी महाराज का धूमधाम से मनाया गया प्रकाश पर्व

रागी जत्थों ने संगतो को किया  निहाल


डीडीयू नगर चंदौली। सिखों के पहले गुरु व सिक्ख धर्म के संस्थापक साहब श्री गुरु नानक देव जी महाराज जी का 555 वा प्रकाश पर स्थानीय सिख समाज व गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी द्वारा बड़े ही श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान न्यूजीलैन्ड से आए रागी जत्था भाई संदीप सिंह  रैन, एवं हजूरी रागी जत्था भाई जयपाल सिंह ने अपने शब्द कीर्तन से संगतो को निहाल किया। वहीं ज्ञानी जी भाई अमरजीत सिंह व प्रभजोत सिंह द्वारा अपनी कथा से लोगों को निहाल किया। प्रकाश पर्व के उपलक्ष में पिछले कई दिनों से प्रभात फेरी निकली जा रही थी इसके समापन के बाद निशान साहब की सेवा के साथ ही प्रकाश पर्व मनाया गया जिसमें दोपहर 2:00 बजे से देर शाम तक लंगर प्रसाद विपरीत होता रहा। कार्यक्रम में सिक्ख समाज के अलावा अन्य कई समाज के लोगों ने माथा टेका। इस दौरान प्रधान रंजीत सिंह सम्मी, जनरल सेक्रेटरी सरदार महेंद्र सिंह पत्रकार, रणजीत सिंह, गुरु दयाल सिंह, अमरीक सिंह, मंजीत सिंह, राजेंद्र सिंह, सतपाल सिंह सुरी, नरेन्द्र पाल सिंह ऐंड, रघुवीर सिंह, सुरेन्द्र सिंह लवली, गुलशन अरोड़ा, काके सिंह के साथ ही चढदीकला कार सेवा संस्था के सदस्यों ने  सेवा की।

रिपोर्ट राहुल मेहानी

विशाल भंडारे के साथ सात द्विवसीय रामकथा का हुआ समापनमुगलसराय चन्दौली।अलीनगर थाना क्षेत्र स्थित सहरोई गांव में विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी श्री हनुमान जयंती के पावन शुभ अवसर पर नवयुवक मंगल दल सहरोई के तत्वाधान में सात दिवसीय संगीतमय रामकथा का आयोजन किया गया है। कथा अंतिम दिन पंडित शक्ति तिवारी ने कथा में बताया कि नारायण की कृपा कब किसपर बरस जायेगी उसको कोई नहीं जान पाता जिस प्रकार प्रभु श्रीराम की कृपा हनुमान जी पर हुई, सुग्रीव जी व विभिषण जी पर हुई। निच्छल भाव से युक्त जीवन यापन करने वालो पर कब प्रभु की कृपा हो जायेगी उसको तो वही जान सकते है। चंचल चित जीव सुग्रीव जिस पर रघुनाथ जी की कृपा हुई और विभिषण जी के पूरा राजपाठ ही दे दिया और अपने परम शिष्य हनुमान जी पर अपनी कृपा बरसा कर उन्हे अमरता का वरदान दिया और अष्ट सिद्धियां प्रदान कर दी। शक्ति तिवारी ने बतलाया की जीवन में यदि जीना सीखना है तो रामचरितमानस का चरण, शरण ,ग्रहण करना चाहिए रामचरितमानस हमको जीना सिखाती है भाई भाई के प्रति प्रेम कैसा होना चाहिए, माता-पिता के प्रति प्रेम कैसा होना चाहिए, पिता और पुत्र के प्रति प्रेम कैसा होना चाहिए, यह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी के जीवन से सीखा जा सकता हैऔर उन्होंने बतलाया की मनुष्य का शरीर साधन का धाम है मोक्ष का दरवाजा है और इस सांसारिक भव कुप से बाहर निकालने के लिए केवल और केवल एक नाम ओम, राम, शिव इन्हीं तीन नाम में से एक का जाप करें इसी में हम सब का कल्याण है और उन्होंने बतलाया की भगवान ज्ञान से मिले या ना मिले वैराग्य से मिले या ना मिले लेकिन प्रभु प्रेम से जरूर मिल जाते है।वही कथा के अतिम दिन विशाल भंडारे का आयोजन प्रसाद वितरण किया जिसमें हजारो नर-नारी बूढ़े-जवान बच्चे शामील रहे। इस दौरान राहुल मिश्रा समाजसेवी, अमित मिश्रा, रोहित, पवन, शिशु, विराट, उमेश, महानंद, दिनेश, शुभम, गोलू, तबला वादक अनिल तिवारी निक्कीरशिक, प्रद्युम्न, सैकड़ो श्रद्धालु उपस्थित रहे।