पत्ता गोभी और शिमला मिर्च से स्वाद हो जाता है डबल… ये है बेहद लाजवाब मोमोज, जानें कीमत और लोकेशन

अंजली शर्मा/कन्नौज. सुगंध नगरी में खुशबू के साथ-साथ खाने-पीने के एक से बढ़कर एक स्टॉल है. दीपक दी चाट से जुड़कर ‘हेलो हंगरी बडी’ नाम से इस दुकान पर मोमोज अलग ही तरह के मिलते हैं. युवाओं के साथ-साथ हर वर्ग का व्यक्ति इस दुकान पर एक बार मोमोज का स्वाद लेने जरूर जाता है. साधारण तौर पर मोमोज के साइज थोड़े से छोटे होते हैं लेकिन यहां के मोमोज एक प्लेट में 6 ही आते हैं. इतने बड़े साइज और भरपूर मात्रा में मोमोज के अंदर जो चीज भरी जाती है उनका स्वाद लोगों को अपनी तरफ खींचता है. लोग यहां दूर-दूर से मोमो का स्वाद लेने के लिए आते है.

कन्नौज मुख्यालय के बस स्टॉप से करीब 500 मीटर की दूरी पर तिर्वा क्रासिंग के पास स्टेट बैंक के ठीक सामने हेलो हंगरी बडी के नाम से यह खाने पीने का स्टॉल यहां पर लगाया जाता है. मोमोज विक्रेता सनम ने बताया कि हमारी यह दुकान करीब 10 साल से ज्यादा के समय से यहां पर लगाई जा रही है. हमारे यहां कई तरह के फास्ट फूड मिलते हैं लेकिन हमारे यहां मोमोज सबसे ज्यादा लोगों को अच्छे लगते हैं, लोग बहुत दूर-दूर से मोमोज खाने आते हैं. हमारे यहां मोमोज में क्वालिटी का विशेष ध्यान रखा जाता है. हम इसमे शुद्धता का भी विशेष ख्याल रखते हैं.

2 वैरायटी हैं मोमोज की
दुकानदार ने बताया कि मोमोज में सब्जियों के साथ-साथ अच्छी क्वालिटी के मसाले भरे जाते हैं ताकि लोगों को अच्छा स्वाद मिल सके और उनका स्वास्थ्य भी सही रहे. हमारे यहां 30 रुपये में हाफ प्लेट फ्राई मोमोज मिलते हैं जिनमें 6 पीस रहते हैं. हमारे यहाँ 2 तरह के मोमोज रहते हैं स्टीम और फ्राई, स्टीम के रेट 20 रूपए में 6 पीस मिल जाते हैं.

कैसे बनते है लजीज मोमोज
इन मोमोज का स्वाद तो अलग है ही साथ ही इनका साइज भी दूसरे मोमोज से कुछ बड़ा रहता है. इनके अंदर जो स्टफिंग की जाती है उनमें सिर्फ और सिर्फ हरी सब्जियों का प्रयोग किया जाता है, जो की स्वास्थ्य के लिए भी अच्छी होती है. जैसे पत्ता गोभी, शिमला मिर्च, गाजर, प्याज, अदरक, लहसुन, हरी मिर्च, काली मिर्च, के साथ पढ़ने वाले यह मसाले अजीनोमोटो, किचन किंग, और मीट मसाला का स्वाद इनको और भी ज्यादा बढ़ा देता है. जिसके चलते यह लोगों को ज्यादा पसंद आते हैं. उनके साथ मिलने वाली तीखी चटनी जिसमें टमाटर, लहसुन, लाल मिर्च, और विनेगर का स्वाद खुलकर आता है. जिससे इसका स्वाद और भी ज्यादा बढ़ जाता है.

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सीता हरण के दौरान जटायु व रावण का भंयकर युद्ध लीला का हुआ मंचनचहनियां चन्दौली। क्षेत्र स्थित कल्यानपुर सेवा समिति के तत्वाधान में चल रहे रामलीला मंचन के यह सातवें दिन रविवार रात में शुरुआत में प्रभु श्रीराम की आरती के साथ के साथ प्रारम्भ किया गया। रामलीला के सातवें दिन रावण ने माता सीता का हरण कर लिया और पुष्पक विमान से वह लंका ले जाने लगा। जिसपर माता सीता की करूण विलाप सुनकर गिद्धराज जटायु ने अपने मित्र की पुत्र बधु सीता को बचाने के लिए रावण से युद्ध करने लगा बड़ी भयंकर युद्ध हुआ रावण जटायु की मार को सहन न कर सका और क्रुद्ध होकर भगवान शिव द्वारा प्राप्त चन्द्रहासं खड्ग से जटायु पर वार कर दिया जिसमें जटायु का एक पंख कट गया लेकिन उसके बावजूद भी युद्ध नही थमा तब तक रावण ने दूसरा वार कर दिया। जिसमें जटायू का दूसरा पंख भी काट दिया जिससे आकाश से गिरकर जटायू गंभीर रूप से घायल हो गये। जब प्रभु श्रीराम व लक्षमण अपनी भार्या सीता को जंगल-वन-पहाड़ां से घुमते-घुमते रास्ते में गिरे जटायू से होती है तो जटायू ने पूरा वृतान्त प्रभु श्रीराम को सुनाया और अपना प्राण दिया। जिस पर प्रभु श्रीराम ने अपने पिता के मित्र की पुत्र बनकर अन्त्येष्टि कर सीता माता की खोज करने लगे। इस दौरान अवधेश चौबे व्यास, अरुण कुमार, जयप्रकाश चौबे, मारकंडे पांडे, अशोक कुमार, घनश्याम सिंह, शमशेर सिंह, अजय चौबे, मनोज चौबे, प्रमोद चौबे, राकेश चौबे, केसर यादव, बबलू यादव, अनुज चौबे, त्रिलोक, टुनटुन, हिमांशु, इत्यादि सैकड़ों कार्यकर्ता व भक्त उपस्थित थे।