डाला छठ महापर्व को लेकर क्षेत्राधिकारी ने घाटों का निरीक्षण थाने में किया बैठक।

चहनिया चंदौली
पुलिस अधीक्षक चन्दौली आदित्य लांग्हे के निर्देश पर आगामी डाला छठ महापर्व को देखते हुए गुरुवार की शाम को सकलडीहा क्षेत्राधिकारी स्नेहा तिवारी के नेतृत्व में थानाध्यक्ष बलुआ अतुल कुमार प्रजापति की अध्यक्षता में राजस्व विभाग सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों की मौजूदगी में ग्राम प्रधान, छठ महापर्व के आयोजन समिति के सदस्यों, वालंटियरों, नाव चालकों, गोताखोरों व थाना स्थानीय के पुलिस बल के साथ बैठक कर आवश्यक दिशा निर्देश दिया गया
क्षेत्राधिकारी संग अन्य विभागों के लोगो ने बलुआ गंगा घाट, टांडाकला गंगा घाट, जमालपुर , हसनपुर तिरगावां गंगा घाट, रैया पोखरें सहित आदि छठ घाटों का स्थालीय निरीक्षण करते हुए साफ सफाई, बैरिकेडिंग, प्रकाश की व्यवस्था , पीए सिस्टम, प्रसाधन कक्ष, चेंजिंग रूम आदि के सम्बन्ध में सम्बन्धित को निर्देशित करते हुए लोगों को जागरूक किया गया। बैठक में क्षेत्राधिकारी स्नेहा तिवारी ने कहा कि छठ पूजा के प्रति हर अधिकारी सक्रियता दिखाये । हर घाट और तालाबो पर सुरक्षा व्यवस्था के साथ साथ हर व्यवस्था दुरुस्त होना चाहिए । किसी भी श्रृद्धालु को कोई कष्ट नही होना चाहिए । अगर कही किसी भी प्रकार की अड़चन आये तो ग्राम प्रधान व समिति के लोग थाने पर सम्पर्क करें । बलुआ थाना अध्यक्ष अतुल कुमार प्रजापति ने कहा कि अगर छठ पूजा में कोई भी व्यधान डालता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाही किया जायेगा । बैठक में नायब तहसीलदार राजेन्द्र प्रसाद,एसआई जमिलुद्दीन,एसआई बिनोद सिंह,डा. अजय सिंह, ग्राम प्रधान जयराम शास्त्री,आशुतोष सिंह,नारद यादव,धर्मेंद्र यादव आदि गांवो के प्रधान और समिति के लोग उपस्थित रहे ।

रिपोर्ट मनोज मिश्रा

मानवाधिकार न्यूज़ की ओर से मज़दूरों को समर्पित एक अपील
“फिर से चाहिए 8 घंटे का अधिकार –
मज़दूर न किसी का ग़ुलाम है, न कोई व्यापार!”

आज 1 मई – अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस है। यह वह दिन है जब पूरी दुनिया उन मेहनतकश हाथों को सलाम करती है, जिन्होंने अपने खून-पसीने से दुनिया का निर्माण किया है।
लेकिन आज एक बार फिर वही सवाल खड़ा है –
क्या हमारे मज़दूरों को वह सम्मान, वह अधिकार मिल पा रहे हैं जिसके लिए उन्होंने लड़ाई लड़ी थी?

1886 में अमेरिका के शिकागो में जब मज़दूरों ने 8 घंटे की शिफ्ट के लिए अपनी जानें दीं, तब जाकर यह अधिकार मिला।
मगर आज फिर वही मज़दूर 12 से 18 घंटे काम करने को विवश है –
कम मज़दूरी, ज़्यादा काम, और सम्मान शून्य।

मानवाधिकार न्यूज़ की ओर से हम यह स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं:

8 घंटे का काम मज़दूर का हक़ है, एहसान नहीं।

हर श्रमिक को सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, और काम का सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए।

मज़दूर को कोई ठेके का सामान न समझें – वह भी एक इंसान है, जिसके सपने हैं, परिवार है, और जीने का हक़ है।


आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है –
मज़दूरों की आवाज़ को फिर से बुलंद करना।
उनके हक़ के लिए एकजुट होना।

हमारा संकल्प:
“रोटी भी चाहिए, इज़्ज़त भी चाहिए,
इंसान हैं हम – गुलाम नहीं!”

आपका
संजय रस्तोगी
राष्ट्रीय अध्यक्ष – मानवाधिकार न्यूज़