बाबा ताड़केश्वर नाथ जी के साल्वी भंडारे का भव्य आयोजन संपन्न – पड़ाव – पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर

बाबा ताड़केश्वर नाथ जी के साल्वी भंडारे का भव्य आयोजन संपन्न

रिपोर्ट – मोहम्मद आरिफ

आज बाबा ताड़केश्वर नाथ जी जो मुगलसराय पड़ाव पर स्थित है उनके पवित्र आशीर्वाद से साल्वी भंडारे का आयोजन पूरे हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस धार्मिक कार्यक्रम में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया और बाबा के दर्शन का लाभ प्राप्त किया।

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह से ही हो रही थी और बाबा की विशेष पूजा-अर्चना से हुई, जिसमें क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक और सामाजिक हस्तियों ने भाग लिया। इसके बाद भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और बाबा का आशीर्वाद प्राप्त किया।

कार्यक्रम का आयोजन सामाजिक लोगो के द्वारा किया गया था, जिनके द्वारा बाबा की परंपराओं को ध्यान में रखते हुए भंडारे का भव्य आयोजन किया गया। श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्था की गई थी ताकि वे आरामदायक और सुरक्षित रूप से इस धार्मिक आयोजन का आनंद उठा सकें।
इस अवसर पर बिरहा का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था।

दिनांक 23.9.24 को मानवाधिकार न्यूज़ के राष्ट्र अध्यक्ष संजय जी के पुत्र सक्षम का जन्मदिन था, और इस उपलक्ष में उनके द्वारा जरूरतमंदों को खाना एवं मिठाई बांटने का काम किया गया, अध्यक्ष जी का कहना है की जन्मदिन पर केक काटने के साथ-साथ बच्चों को यह भी संस्कार दिए जाने चाहिए।

पांच द्विवसीय रामकथा का हुआ समापन -मिर्जापुर शेरवा खखड़ा गांव में आयोजितपांच दिवसीय संगीतमय रामकथा का आयोजन किया गया था ।कथा अंतिम दिन कथावाचक परम पूज्य मंगलम दीपक महाराज ने कथा में बताया कि नारायण की कृपा कब किसपर बरस जायेगी उसको कोई नहीं जान पाता जिस प्रकार प्रभु श्रीराम की कृपा हनुमान जी पर हुई, सुग्रीव जी व विभिषण जी पर हुई। निच्छल भाव से युक्त जीवन यापन करने वालो पर कब प्रभु की कृपा हो जायेगी उसको तो वही जान सकते है। चंचल चित जीव सुग्रीव जिस पर रघुनाथ जी की कृपा हुई और विभिषण जी के पूरा राजपाठ ही दे दिया और अपने परम शिष्य हनुमान जी पर अपनी कृपा बरसा कर उन्हे अमरता का वरदान दिया और अष्ट सिद्धियां प्रदान कर दी। परम पूज्य मंगलम दीपक महाराज ने बतलाया की जीवन में यदि जीना सीखना है तो रामचरितमानस का चरण, शरण ,ग्रहण करना चाहिए रामचरितमानस हमको जीना सिखाती है भाई भाई के प्रति प्रेम कैसा होना चाहिए, माता-पिता के प्रति प्रेम कैसा होना चाहिए, पिता और पुत्र के प्रति प्रेम कैसा होना चाहिए, यह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी के जीवन से सीखा जा सकता हैऔर उन्होंने बतलाया की मनुष्य का शरीर साधन का धाम है मोक्ष का दरवाजा है और इस सांसारिक भव कुप से बाहर निकालने के लिए केवल और केवल एक नाम ओम, राम, शिव इन्हीं तीन नाम में से एक का जाप करें इसी में हम सब का कल्याण है और उन्होंने बतलाया की भगवान ज्ञान से मिले या ना मिले वैराग्य से मिले या ना मिले लेकिन प्रभु प्रेम से जरूर मिल जाते है।वही कथा के अतिम दिन प्रसाद वितरण किया जिसमें हजारो नर-नारी बूढ़े-जवान बच्चे शामील रहे। इस दौरान मुख्य अतिथि चकिया विधायक कैलाश आचार्य, उमापती पाठक पूर्व प्रधान, मंगल मिश्रा, सुजीत मोदनवाल, सूर्य बली यादव, चंद्रभूषण त्रिपाठी, वशिष्ठ नरायण त्रिपाठी, अशोक मिश्रा, अवधेश मिश्रा, मनोहर, प्रसिद्ध तबला वादक अनिल द्विवेदी, बबलू तिवारी, सहित सैकड़ो श्रद्धालु उपस्थित थे।