पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर (मुगलसराय)

रीबॉर्न ट्रस्ट का आधिकारिक शुभारंभ एवं रक्तदान-जागरूकता शिविर सफलतापूर्वक सम्पन्न

रिपोर्ट राहुल मेहानी

१५ अगस्त २०२५, स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर रीबॉर्न ट्रस्ट (संस्थापक: सतनाम सिंह, सोशल ऐक्टिविस्ट) द्वारा रविनगर – काली मंदिर रोड, शुभ कामना एकेडमी में रक्तदान एवं स्वास्थ्य जागरूकता शिविर का आयोजन सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि श्री रमेश जायसवाल जी (विधायक, मुगलसराय), विशिष्ट अतिथि मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ, चंदौली) श्री युगुल किशोर राय और स्कूल के प्रबंध निदेशक श्री सुभाष तुलसीयन उपस्थित रहे।

सतनाम सिंह (सोशल ऐक्टिविस्ट) ने शुभ कामना एकेडमी के एमडी श्री सुभाष तुलसीयन एवं सभी शिक्षकगण का हार्दिक धन्यवाद प्रकट किया, जिनके सहयोग से यह कार्यक्रम सफल हुआ।
अपने विचार साझा करते हुए सतनाम सिंह ने कहा, “हम रक्तदान अभियान, जागरूकता कार्यक्रम, समुदाय सेवा और पौधारोपण/सपलिंग वितरण आयोजनों द्वारा हर जरूरतमंद को सहयोग देते हैं—बिना किसी भेदभाव के।”
उन्होंने रीबॉर्न ट्रस्ट के लोगो का भी अर्थ स्पष्ट किया: फीनिक्स के फैले हुए पंख नवजीवन, जुझारूपन और मुश्किलों से उभरने का प्रतीक हैं। यह लोगो सिर्फ एक चिन्ह नहीं, बल्कि विचारों का घोषणापत्र है—नयी शुरुआत करें जब दुनिया कहे “आप नहीं कर सकते”, बदलने के लिए आज ही कदम उठाएं, और साहसपूर्वक आगे बढ़ें सीमाओं के बिना।
हर बार जब यह लोगो दिखाई देता है, यह हमारे वादे की याद दिलाता है: अनस्क्रिप्टेड. अनफ़िल्टर्ड. अनस्टॉपेबल.

रीबॉर्न ट्रस्ट के सदस्य—रवनीत सिंह, तरनदीप सिंह, विष्णु जैस, हयात अंसारी, श्रद्धा कुमारी, अजीत कुमार सोनी, शिवानी कुमारी, प्रिया जैस, तारिक अब्बास, नितेश जैस, तनवीर अंसारी, अज़हर अली, ज्योति गोंड, रिप्पी सिंह, इंद्रजीत कौर —की सक्रिय भूमिका से शिविर स्मरणीय रहा। इस शिविर में कुल ३५ लोगों ने पंजीकरण कराया और २३ लोगों ने सफलता पूर्वक रक्तदान किया, जिससे कई जरूरतमंदों को जीवनदान मिला।

अंत में संस्था ने सभी रक्तदाताओं एवं सहयोगियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। इस आयोजन में प्रिया यादव, ‘महिला शक्ति’ के रूप में पहली बार रक्तदान करने वाली बनीं। शुभ कामना एकेडमी के अध्यापकगण ने भी रक्तदान करते हुए उदाहरण प्रस्तुत किया। गुरदीप कौर जी एवं अन्य कई महिलाओं ने भी रक्तदान किया, जिससे समाज में महिला सहभागिता को बढ़ावा मिला। इसके अलावा इस शिविर में कई नौजवान, जिनकी उम्र २२ से २५ वर्ष के बीच थी, उन्होंने भी उत्साहपूर्वक रक्तदान में योगदान दिया।

सूचना: अगली रक्तदान ड्राइव नवंबर – दिसंबर में आयोजित की जाएगी। इच्छुक व्यक्ति अपना नाम अभी से पंजीकृत करवा सकते हैं।
संपर्क करें: Reborn Trust 9839307216, 7080432822

सतनाम सिंह (सोशल ऐक्टिविस्ट)
संस्थापक एवं अध्यक्ष, रीबॉर्न ट्रस्ट

चंदौली पी डी डी यू नगर! पब्लिक इंटरेस्ट थिंकर्स असेंबली” पिता” संस्था  द्वारा प्रताड़ित पतियों पर संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस चर्चा के केंद्र में था बेंगलुरु में  अतुल सुभाष  नामक एक इंजीनियर द्वारा लिखा सुसाइड नोट और उस सुसाइड नोट पर उसका  लाईव वीडियो जिसमें उसने अपने आत्महत्या के कारणों के साथ इस कारण में अपनी तथा अपने पत्नी और ससुराल पक्ष के धन लोलुपता, भारतीय न्याय पद्धति के गुण दोष, न्याय और न्यायालय की गतिविधियों का चर्चा करते हुए अपनी प्रताड़ना और अपनी अंतिम इच्छा तक को समाज और न्यायिक तंत्र के समक्ष रखा है.
अतुल सुभाष कोई अकेला प्रताडित नहीं पुरुषों में बढ़ती आत्महत्या इस विषय की गंभीरता इस चर्चा को समाज की जरूरत बना दिया आयोजक संस्था ने इस चर्चा के पीछे जो कारण रखे हैं उसमे समाजिक दायित्व और न्यायिक प्रक्रिया में सुधार की मांग है.
यह कार्यक्रम नगर के श्री दर्शन वेला के सभागार में आयोजित हुआ जिसमें  वरिष्ठ अधिवक्ता सदानन्द सिंह महिला पक्ष विशेष  वरिष्ठ अधिवक्ता महेन्द्र प्रताप सिंह,
दिवानी और फौजदारी   पक्ष से  वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश सिंह  के नेतृत्व में युवा और महिला अधिवक्ताओं का एक पैनल इस चर्चा का हिस्सा रहा वही पत्रकार दीर्घा से इस चर्चा में वरिष्ठ पत्रकारों की संवेदनशील सत्य दृष्टि का नेतृत्व पत्रकार.  पवन कुमार तिवारी के साथ.             पत्रकार बंधुओं की सहभागिता हुयी. प्रबुद्ध दीर्घा में रिटायर पुलिस अधिकारी, समाज सेवी, यूनियन का नेतृत्व करने वाले, समाज के सभी वर्गों के साथ महिला प्रमुखों की भी सहभागिता रही. इस चर्चा में प्रताड़ित भुक्तभोगी यों की  उपस्थित सुनिश्चित कर रही थी की महिला अपने प्रति सामाजिक निष्ठा और न्यायिक अधिकार को अब  वो एक आत्मघाती हथियार की तरह प्रयोग करने की ओर बढ़ चली हैं.
यह चर्चा आत्महत्या से अपनी जीवन लीला समाप्त करने वाले युवा वर्ग की समस्या से जुड़ी रही  जो विवाह और प्रेम की जीवन  प्रथा  को एक कुरीति और भय का नाम दे रही. यह आत्महत्या  उस घटना को सार्वजनिक करती  है  जिसमें मरने वाला अपने  मौत से पूर्व कुछ सवाल अपनी ओर से  छोड़ गया.एक पढ़ा लिखा इंजीनियर काफी ऊंची वेतन भुगतान पाने वाला आखिर किस प्रताड़ना मे था जो इस प्रकार विवश हुआ उसकी न्याय की गुहार क्या  है? यह न्याय पद्धति  कितना न्याय प्रिय है? विशेषाधिकार का दुरुपयोग कितना घातक? आदि  इन सभी विषयों को जोड़ता “अतुल सुभाष की मौत” हत्या, आत्महत्या या न्यायिक दोष “विषय पर यह चर्चा चार सत्र में हुयी पहले सत्र में विषय और घटना परिचय जिसका संचालन सतनाम सिंह( सोशल एक्टिविस्ट) दूसरे सत्र चर्चा नियम और घटना परिचय महिला अधिवक्ता श्वेता सिद्धिदात्री और चर्चा काल का संचालन युवा पत्रकार राजेश गोस्वामी तथा प्रश्न काल का संचालन चर्चा संयोजक चंद्र भूषण मिश्र कौशिक ने किया.

इस संवाद पर चर्चा में “पिता” संस्था के सदस्य, जैसे कुलविंदर सिंह, आनंद, अमित महलका, अजहर अंसारी, योगेंद्र यादव अल्लू, बिजेंद्र सिंह, दिनेश शर्मा, रवनीत सिंह, हमीर शाह,  नीतीश कुमार, प्रवीण यदुवेंदु, प्रिया जैस, राजेश गुप्ता, रीना जी, रुचिका शाह, श्वेता जी, तनवीर अंसारी, तारीक जी, विकास खरवार, विकास आनंद और अन्य सदस्य मौजूद रहे।

सीता हरण के दौरान जटायु व रावण का भंयकर युद्ध लीला का हुआ मंचनचहनियां चन्दौली। क्षेत्र स्थित कल्यानपुर सेवा समिति के तत्वाधान में चल रहे रामलीला मंचन के यह सातवें दिन रविवार रात में शुरुआत में प्रभु श्रीराम की आरती के साथ के साथ प्रारम्भ किया गया। रामलीला के सातवें दिन रावण ने माता सीता का हरण कर लिया और पुष्पक विमान से वह लंका ले जाने लगा। जिसपर माता सीता की करूण विलाप सुनकर गिद्धराज जटायु ने अपने मित्र की पुत्र बधु सीता को बचाने के लिए रावण से युद्ध करने लगा बड़ी भयंकर युद्ध हुआ रावण जटायु की मार को सहन न कर सका और क्रुद्ध होकर भगवान शिव द्वारा प्राप्त चन्द्रहासं खड्ग से जटायु पर वार कर दिया जिसमें जटायु का एक पंख कट गया लेकिन उसके बावजूद भी युद्ध नही थमा तब तक रावण ने दूसरा वार कर दिया। जिसमें जटायू का दूसरा पंख भी काट दिया जिससे आकाश से गिरकर जटायू गंभीर रूप से घायल हो गये। जब प्रभु श्रीराम व लक्षमण अपनी भार्या सीता को जंगल-वन-पहाड़ां से घुमते-घुमते रास्ते में गिरे जटायू से होती है तो जटायू ने पूरा वृतान्त प्रभु श्रीराम को सुनाया और अपना प्राण दिया। जिस पर प्रभु श्रीराम ने अपने पिता के मित्र की पुत्र बनकर अन्त्येष्टि कर सीता माता की खोज करने लगे। इस दौरान अवधेश चौबे व्यास, अरुण कुमार, जयप्रकाश चौबे, मारकंडे पांडे, अशोक कुमार, घनश्याम सिंह, शमशेर सिंह, अजय चौबे, मनोज चौबे, प्रमोद चौबे, राकेश चौबे, केसर यादव, बबलू यादव, अनुज चौबे, त्रिलोक, टुनटुन, हिमांशु, इत्यादि सैकड़ों कार्यकर्ता व भक्त उपस्थित थे।