समाजवादी पार्टी ने रीता चिरई को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी चंदौली में संगठन को मिलेगा नया बल

समाजवादी पार्टी ने रीता चिरई को सौंपी बड़ी जिम्मेदारी चंदौली में संगठन को मिलेगा नया बल

चंदौली। समाजवादी पार्टी ने संगठन को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए विकाश खंड चहनियां के अंतर्गत ग्राम सभा कैलीं की निवासिनी दलित महिला श्रीमती रीता चिरई को पुनः समाजवादी बाबा साहब अंबेडकर वाहिनी, जनपद चंदौली का जिलाध्यक्ष नियुक्त किया है। यह नियुक्ति समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव की अनुमति एवं प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल की सहमति से की गई है।

इस संबंध में प्राप्त आधिकारिक पत्र के अनुसार, यह निर्णय पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों को जन-जन तक पहुँचाने तथा बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों को समाज के अंतिम व्यक्ति तक ले जाने के उद्देश्य से लिया गया है। पार्टी नेतृत्व को पूर्ण विश्वास है कि रीता चिरई एक कर्मठ वफादार व संघर्षशील गरीब महिला हैं जो अपने अनुभव, संगठनात्मक क्षमता और जनसंपर्क के माध्यम से संगठन को नई ऊँचाइयों तक ले जाएंगी।

रीता चिरई लंबे समय से समाजवादी पार्टी से जुड़ी रही हैं और सामाजिक न्याय, महिला सशक्तिकरण तथा दलित-पिछड़े वर्गों के अधिकारों के लिए निरंतर सक्रिय रही हैं। उनके पुनः जिलाध्यक्ष बनने से चंदौली जनपद में बाबा साहब अंबेडकर वाहिनी को मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

नियुक्ति के उपरांत पार्टी कार्यकर्ताओं एवं समर्थकों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। स्थानीय कार्यकर्ताओं ने फूल-मालाओं से उनका स्वागत कर उन्हें बधाई दी और विश्वास जताया कि उनके नेतृत्व में संगठन जनहित के मुद्दों को मजबूती से उठाएगा।

समाजवादी पार्टी ने आशा व्यक्त की है कि रीता चिरई पार्टी की नीतियों, सिद्धांतों एवं समाजवादी विचारधारा को घर-घर तक पहुँचाने का कार्य करेंगी तथा आगामी राजनीतिक गतिविधियों में संगठन को मजबूत आधार प्रदान करेंगी।

धनुष टूटने का दृश्य देख दर्शक हुए गदगद -शेरवां खखडा गांव में आयोजित श्री राम कथा केतिसरे दिन शुक्रवार की कथा वाचक पंडित मंगलम दीप महाराज कथा में बतलाया कि शिव धनुष टूटते ही चारों तरफ हर-हर महादेव व जय श्रीराम के नारे से पूरा पांडाल सहित गांव गुजायमान हो गया। इस दौरान राजा जनक के सीता स्वयंवर के लिये रखे गये शर्त को जब कोई राजा, देव-दानव-मानव पूरा नही कर पाए तब महाराज जनक निराश हो गये और उन्होने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि मैं यह समझता कि यहां कोई भी वीर पुरूष नही सभी का-पुरूष ही का-पुरूष है। तो मैं अपनी बेटी के लिए एेंसा शर्त नही रखता। स्वयंर देखने के उद्देश्य से पहुचे लक्षमण तुरन्त ही उनको बातों से कुद्ध होकर कहे महाराज जनक रघुवंशियो के समक्ष इस तरह के शब्द बोलने का किसी को कोई अधिकार नही यह धनुष क्या चीज है अगर बड़े भैया का आदेश हो तो मैं पूरी पृथ्वी को गेद तरह उठाकर पटक कई टुकड़े कर दूं। जिस पर गुरू विश्वामित्र व प्रभुराम ने लक्षमण को समझाते हुए शान्त करवाया और महाराज जनक की निराशा को आशा में तब्दील करते हुए शुभ-मुहुर्त में विश्वामित्र के आदेशानुसार प्रभु श्रीराम ने धुनष पर तमंचा चढ़ाने गये और तमंचा चढ़ाते ही वह टूट गया। धनुष के टूटते ही चारो तरफ हर-हर महादेव, व जय श्रीराम के नारे से पूरा गांव सहित पंडाल गुजायमान हो गया। इस दौरान कथा में उपस्थित मंगल मिश्रा, सूर्य बली यादव, चंद्रभूषण त्रिपाठी, वशिष्ठ नरायण त्रिपाठी,बिशाल,मनोहर, अशोक मिश्रा, सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।