


श्रीकृष्ण सुदामा दोस्ती बेमिशाल-रमेश
चहनिया चन्दौली
स्थानीय कस्बा में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के अंतिम दिन बुद्धवार को पंडित रमेश तिवारी महाराज द्वारा श्रीकृष्ण सुदामा की दोस्ती पर विस्तृत चर्चा करते हुए सबको मन्त्रमुग्ध कर दिया। श्री तिवारी ने बताया कि श्रीकृष्ण और सुदामा बचपन में संदिप्नी ऋषि के आश्रम में साथ-साथ पढ़े लिखे और ज्ञान अर्जन किया था। सुदामा जी वचपन काल से संकोची व्यक्ति थे वे अपनी पीड़ा किसी को नही बताना चाहते सब कुछ नारायण पर छोड़ देते थे। वही नारायण चाहते थे सुदामा आकर मुझसे कहे। यही बीच की डोरी भक्त और भगवान और दोस्त की मर्यादा को बाध रखा था। सुदामा जी अपने दोस्त के सम्मान को कभी भी ठेस नही पहुचाना चाहते थे। गरीबी की असहनीय पीड़ा को सहन करते हुए उनकी पत्नी ने उन्हे बार-बार श्रीकृष्ण से मदद माने हेतु प्रेरित करती थी लेकिन सुदामा जी नही जाते थे एक दिन सुदामा जी विवश व लाचार होकर पत्नी का बात मानकर श्री कृष्ण के यहा चले जाते है। जैसे महल के द्वार पर पहुचते है और द्वारपालां से बताया कि श्रीकृष्ण हमारे मित्र है। उनसे जाकर कहो तो द्वारपालों द्वारा जमकर ढ़हाके लगाकर हसने लगे। इस पर उनको बड़ी ग्लानी हुई। उसी समय एक मंत्री ने जाकर श्रीकृष्ण से सारीबात को बताया। जिस पर श्री कृष्ण सुदामा का नाम सुनकर पागलों की भॉति दौड़ते हुए नंगे पाव नगर की गलियां में उन्हे ढूढ़ने लगे और मिलन होने पर दोनो एक दुसरे मिलकर रोने लगे। वही श्री तिवारी ने आज की समाज की ओर इशारा करते हुए कहा कि आज का मित्र, मित्र के नाम धोखा, धड़ी, अनैतिक कार्य, लूट-खसोट में लगे है। ऐसा करने से बहुत बड़ा पाप होता जिसका कष्ट उसे जन्मजन्मान्तर तक भोगना पड़ता है। वही कार्यक्रम के अंतिम दिन मुख्य यजमान अजय सिंह छेदी ने आरती पूजन कर सबको प्रसाद वितरण किया। इस दौरान संजय सिंह, सोनू सिंह, राजेन्द्र पाण्डेय, भूतपूर्व प्रधान सरिद्वार यादव, इन्द्रजीत मौर्या, योगेश मिश्र सहित सैकड़ों श्रीमद्भागवत प्रेमी मौजूद रहे।






