एल्युमिनियम फॉस्फाइड आम जनता को न बेचा जाए: जिला कृषि अधिकारी ने जारी की चेतावनी, प्रतिबंधित कीटनाशक पर नियम

चंदौली/दिनांक 02 फरवरी 2026
जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव ने बताया कि एल्युमिनियम फॉस्फाइड एक पंजीकृत कीटनाशक है जो “प्रतिबंधित कीटनाशकों” की श्रेणी में आता है जिसके कारण सार्वजनिक जोखिम को रोकने के लिए इसकी बिक्री और उपयोग विशिष्ट कानूनी शर्तों के अधीन है। इसके अलावा कीटनाशी नियम 1971 के नियम 19 में विशेष रूप से वर्णित है कि इसके पैकिंग पर “चमकीला लाल” लेबल लगाना अनिवार्य है जो इसे “अत्यंत विषैला” (श्रेणी) दर्शाता है। लेबल पर अनिवार्य चेतावनियाँ, विषैलेपन के लक्षण और प्राथमिक उपचार के उपाय शामिल होने चाहिए। रिकॉर्ड के अनुसार इसका कोई विशिष्ट विषनाशक भी उपलब्ध नहीं है और विषैलेपन की स्थिति में केवल लक्षणात्मक और सहायक चिकित्सा ही प्रदान की जानी चाहिए ।
इसके अतिरिक्त कीटनाशक नियम 1971 का नियम 41 यह प्रावधान करता है कि निर्माताओं और वितरकों को उन परिसरों में पर्याप्त मात्रा में विषनाशक और प्राथमिक उपचार की दवाएं रखनी चाहिए जहां कीटनाशकों का भंडारण किया जाता है जिनकी आवश्यकता साँस लेने, त्वचा के संपर्क, निगलने आदि से उत्पन्न विषाक्तता के मामलों के उपचार के लिए हो सकती है।
उपरोक्त के मद्देनजर यह उल्लेख करना प्रासंगिक है कि एल्युमिनियम फॉस्फाइड एक विषैला रसायन है और यदि इसका उपयोग लेबल और लीफलेट पर दिए गए निर्देशों के अनुसार नहीं किया जाता है तो ये मनुष्यों और पर्यावरण के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं।
एल्युमिनियम फॉस्फाइड (एएलपी) खुदरा विक्रेताओं/डीलरों और निर्माताओं द्वारा अनाधिकृत व्यक्तियों या आम जनता को न बेचा जाए क्योंकि यह एक प्रतिबंधित उपयोग वाला कीटनाशक है जिसका उपयोग केवल सरकारी एजेंसियों या अधिकृत कीट नियंत्रण ऑपरेटरों (पीसीओ) द्वारा किया जाना है और यह सुनिश्चित करें कि कीटनाशक नियम 1971 के नियम 41 का अनुपालन हो और कीटनाशक अधिनियम 1968 का उल्लंघन पाए जाने पर ऐसे डीलरों/खुदरा विक्रेताओं के खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। सभी हितधारकों के मार्गदर्शन के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) ने भारतीय मानक आईएस 4015.1998 प्रकाशित किया है।





