श्री कृष्ण जन्मोत्सव कथा प्रसंग सुन भक्त हुए निहाल

श्री कृष्ण जन्मोत्सव कथा प्रसंग सुन भक्त हुए निहाल

चहनियां चंदौली क्षेत्र तरगांव अजगरा स्थित बाबा शीतलू ब्रह्म् बाबा व अति प्राचीन शिव हनुमान मंदिर प्रांगण में सात दिवसीय भागवत कथा के चौथे दिन बृहस्पतिवार को कथावाचक श्री आशुतोष महाराज ने अपने मुखार बिंदु से भगवान विष्णु के अवतारों,विशेष रूप से भगवान कृष्ण की लीलाओं और भक्ति योग का वर्णन किया। महाराज जी ने बताया कि जब-जब धारा पर पाप का बोझ बढ़ जाता है। तब -तब भगवान को किसी न किसी रूप में अवतार लेकर पापियों का नाश कर आम जन को मुक्ति दिलाना है। जब कंस का पाप चरमोकर्ष पर पहुंच गया।तब नारायण ने कृष्ण रूप में जन्म लेकर देवकी और वासुदेव को कंस के अत्याचारों से मुक्ति कराया और प्रजा को उनके भय से मुक्त किया। वही प्रभु ने अपने मित्रों और सखाओं संग बहुत लीलाएं की।भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव कथा का प्रसंग सुनकर भक्त निहाल हो गये। वहीं उपस्थित व आयोजक धनंजय ओझा, मनोज तिवारी, सुनील तिवारी, अमित ओझा, विनायक ओझा, राजीव ओझा, त्रिलोकी नाथ, शिव शंकर ओझा, किशन, आदर्श त्रिपाठी, सौरव ओझा, राहुल ओझा, रोहित सेठ, आदि उपस्थित थे।

प्रबोधिनी एकादशी पर श्रद्धालुओं ने़ लगाई आस्था की डुबकीचहनिया चन्दौली।क्षेत्र के मां भागीरथी के पश्चिमी वाहिनी बलुआ घाट पर प्रबोधिनी एकादशी के पावन पर्व पर हजारां श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाते हुए मन्दिर पूजा पाठ कर याचक ओर भिक्षुओं का दानपुन्य कर यश के भागी बने। इसी क्रम में क्षेत्र के महुआरी, कांवर, महुअरकलां, पूरा विजयी, तिरगावां, टाण्डाकलां, सैफपुर, नादी-निधौरा समस्त गंगा तटीय गावों के घाटो पर भारी भीड़ उमड़ी रही।शनिवार की अलसुबह ही हजरो श्रद्धालुओं की भीड़ बलुआ घाट पर पहुचने लगी और देखते ही देखते मेले जैसे रूवरूप लेते हुए भारी भीड़ के रूप में तब्दील हो गयी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु अपने योग चर्तुमासा निद्रा से जागते हैं इसी कारण इसे देव उठान या देवउठनी एकादशी भी कहा जाता है। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन मॉ तुलसी का विवाह भी श्री हरि नारायण से सम्पन्न कराया जाता है। उसी मान्यता के अनुसार समस्त जगत में मांगलिक कार्यक्रम प्रारम्भ हो जाते है। वही सुरक्षा की दृष्टि से उपनिरीक्षक विनोद सिंह, महिला कांस्टेबल कौशल्या देवी, चिंता देवी, राजेश कुमार, सरोज देवेंद्र प्रताप यादव के साथ गोताखोरों की टीम भी नाव से गंगा में निगरानी करती रही।