उ0प्र0 पुलिस भर्ती व पदोन्नति बोर्ड, लखनऊ के द्वारा आयोजित

चंदौली/दिनांक 14 मार्च, 2026 (सू0वि0)

उ0प्र0 पुलिस भर्ती व पदोन्नति बोर्ड, लखनऊ के द्वारा आयोजित उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस व समकक्ष पदों की परीक्षा को निष्पक्ष, नकल विहीन, पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराये जाने के उद्देश्य से जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग एवं पुलिस अधीक्षक आदित्य लांग्हे ने सामुहिक रूप से महेंद्र टेक्निकल इंटर कालेज चंदौली का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान लगाये गये सीसीटीवी कैमरों की मॉनिटरिंग हेतु कंट्रोल रूम को देखते हुए परीक्षा कक्ष में पहुचकर परिक्षार्थियों का प्रवेश पत्र एवं आधार चेक किया गया। उन्होने परीक्षा के दौरान विद्यालय के प्रधानाचार्य एवं केन्द्र व्यवस्थापक के साथ लगाये गये सेक्टर एवं जोनल तथा स्टेट्रिक मजिस्टेªट को कड़े निर्देश दिया कि किसी प्रकार की लापरवाही न बरती जाय। कड़ाई से अपने कार्यो एवं दायित्वो का शत प्रतिशत निर्वहन किया जाय। किसी भी केन्द्र पर लापरवाही पाये जाने पर सम्बन्धित के विरूद्ध उचित कार्यवाही की जायेगी। जनपद में कुल-11 परीक्षा केन्द्रों पर प्रथम दिन दो पालीयों में परीक्षा सकुशल सम्पन्न हुयी। जिसमें प्रथम पाली में 3600 अभ्यर्थी में 2488 उपस्थित रहें व 1112 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहें इसी प्रकार द्वितीय पाली में 3600 में

2606 उपस्थित रहें व 994 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहें।

सीता हरण के दौरान जटायु व रावण का भंयकर युद्ध लीला का हुआ मंचनचहनियां चन्दौली। क्षेत्र स्थित कल्यानपुर सेवा समिति के तत्वाधान में चल रहे रामलीला मंचन के यह सातवें दिन रविवार रात में शुरुआत में प्रभु श्रीराम की आरती के साथ के साथ प्रारम्भ किया गया। रामलीला के सातवें दिन रावण ने माता सीता का हरण कर लिया और पुष्पक विमान से वह लंका ले जाने लगा। जिसपर माता सीता की करूण विलाप सुनकर गिद्धराज जटायु ने अपने मित्र की पुत्र बधु सीता को बचाने के लिए रावण से युद्ध करने लगा बड़ी भयंकर युद्ध हुआ रावण जटायु की मार को सहन न कर सका और क्रुद्ध होकर भगवान शिव द्वारा प्राप्त चन्द्रहासं खड्ग से जटायु पर वार कर दिया जिसमें जटायु का एक पंख कट गया लेकिन उसके बावजूद भी युद्ध नही थमा तब तक रावण ने दूसरा वार कर दिया। जिसमें जटायू का दूसरा पंख भी काट दिया जिससे आकाश से गिरकर जटायू गंभीर रूप से घायल हो गये। जब प्रभु श्रीराम व लक्षमण अपनी भार्या सीता को जंगल-वन-पहाड़ां से घुमते-घुमते रास्ते में गिरे जटायू से होती है तो जटायू ने पूरा वृतान्त प्रभु श्रीराम को सुनाया और अपना प्राण दिया। जिस पर प्रभु श्रीराम ने अपने पिता के मित्र की पुत्र बनकर अन्त्येष्टि कर सीता माता की खोज करने लगे। इस दौरान अवधेश चौबे व्यास, अरुण कुमार, जयप्रकाश चौबे, मारकंडे पांडे, अशोक कुमार, घनश्याम सिंह, शमशेर सिंह, अजय चौबे, मनोज चौबे, प्रमोद चौबे, राकेश चौबे, केसर यादव, बबलू यादव, अनुज चौबे, त्रिलोक, टुनटुन, हिमांशु, इत्यादि सैकड़ों कार्यकर्ता व भक्त उपस्थित थे।