संकुल स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता का हुआ आयोजन
चहनिया चन्दौली

रिपोर्ट मनोज मिश्रा

संकुल स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता का हुआ आयोजन
चहनिया चन्दौली
कम्पोजिट विद्यालय दिनदासपुर के प्रांगण में संकुल स्तरीय खेलकूद प्रतियोगिता का आयोजन का शुभारंभ मुख्य अतिथि राजीव यादव (ब्लॉक अध्यक्ष, प्राथमिक शिक्षक संघ चहनियाँ) तथा लक्ष्मीकांत त्रिपाठी (अध्यक्ष, पूर्व माध्यमिक शिक्षक संघ चहनियाँ) द्वारा दीप प्रज्वलन एवं फीता काटकर किया गया।
कार्यक्रम में ग्राम प्रधान दिनदासपुर अति विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। बच्चों ने सरस्वती वंदना और स्वागत गीत प्रस्तुत कर सभी आगंतुकों एवं अतिथियों का स्वागत किया।
50मीटर दौड़ प्राामिक बालक वर्ग प्रथम स्थान नीरज पाल हृदयपुर, द्वितीय स्थान आलोक बछौली। 100मीटर दौड़ बालक वर्ग में प्रथम स्थान नीरज पाल हृदयपुर, द्वितीय स्थान अमित चौहान दिनदासपुर। 200मीटर दौड़ प्रथम स्थान अंकुश बछौली द्वितीय स्थान रामानंद दिनदासपुर रहे। 100मीटर दौड़ बालिका वर्ग में प्रथम स्थान  संध्या बछौली, द्वितीय स्थान परी हृदयपुर जूनियर वर्ग 100मीटर दौड़ बालक वर्ग प्रथम स्थान अमन चौहान दिनदासपुर, द्वितीय स्थान अमन कुमार बछौली, 100मीटर दौड़ बालिका वर्ग, प्रथम स्थान बबिता बछौली, द्वितीय स्थान अनुष्का दिनदासपुर, कबड्डी बालक वर्ग जूनियर, विजेता टीम कम्पोजिट विद्यालय दिनदासपुर कार्यक्रम के मुख्य आयोजक हंसराज यादव प्रधानाध्यापक, कम्पोजिट विद्यालय दिनदासपुर रहे। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में मनोज गुप्ता, आत्म प्रकाश पाण्डेय, राजेश यादव, नंदकिशोर यादव, ब्रजेश मिश्रा, अखिलेश त्रिपाठी, रंजना यादव, विजय बहादुर सिंह, अनुदेशक आदि गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्रधानाध्यापक हंसराज यादव ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया।

मनुष्य के हृदय में होता है भगवान का वास-पंडित शक्ति मुगलसराय चन्दौली तारा जीनपुर क्षेत्र स्थित सहरोई गांव में विगत पांच वर्षों की भांति इस वर्ष भी श्री हनुमान जयंती के पावन अवसर नवयुवक मंगल दल सहरोई के तत्वाधान में सप्त दिवसीय संगीमय श्रीराम कथा का आयोजन किया गया है। कथा के दूसरे दिन पंडित शक्ति तिवारी ने नारायण के दिव्य अवतार को समझाते हुए कहा की भगवान का अवतार प्रत्येक मनुष्य के हृदय वेश में होता है। अवतार को समझाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान अपनी भावना को छोड़कर के धेनु, सुर, संत, हित में लिन्ह, मनुज अवतार भगवान ब्राह्मणों के गाय माता, के और संतों के हितों के लिये धरती पर मनुष्य का शरीर धारण करके आते हैं। इसी को समझाते हुए भगवान के बाललीला का भी वर्णन किया और उन्होंने बतलाया की चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ एक पुत्र के लिए रो रहे थे और गुरु वशिष्ट के द्वारा श्रृंगी ऋषि के पुत्र प्राप्ति यज्ञ करने से तुमको चार-चार पुत्रों की प्राप्त हुयी। इसी के बाद चारों पुत्रों का नामांकरण गुरु वशिष्ट के द्वारा करवाते हुए इन्होंने बतलाया की विश्वामित्र जो की महान ऋषि थे। असुरों का समूह जब उन्हें सताया तो उन्हें भी भगवान को मांगने की जरूरत पड़ी और विश्वामित्र सनाथ हुये और भगवान वन में तारकासुर का एक ही बाण में बध कर दिये। मारीच व सुबाहु को अग्निबाण से यज्ञ की रक्षा की। इस दौरान सैकड़ां लोगो का जन सैलाब उमड़ा रहा। कार्यकर्ता राहुल मिश्रा, अमित मिश्रा, रोहित, पवन, शिशु मिश्रा, विराट, उमेश, महानंद, दिनेश, शुभम, गोलू, तबला वादक अनिल तिवारी, सैकड़ां श्रद्धालु उपस्थित रहे।