भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की मनाई गयी 102वीं जयन्ती चहनिया चन्दौली

स्थानीय क्षेत्र के लच्छू ब्रम्ह बाबा के प्रांगण में शुक्रवार को भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की 101वीं जयन्ती धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथी सपा राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोज सिंह काका व सकलडीहा विधायक प्रभुनारायण सिंह यादव ने कर्पूरी ठाकुर के तैलचित्र पर माल्यपर्ण कर दीप प्रज्जवलित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया।
वही कार्यक्रम के मुख्य अतिथी सपा विधायक प्रभुनारायण सिंह यादव ने भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर के व्यक्तित्व चरित्र पर विस्तृत चर्चा करते हुए बताया कि श्री ठाकुर बेहद ही ईमानदार कर्तव्यनिष्ठ, गरीब, असहाय, मजलूम की सेवा करते रहते थे। इसी ईमानदारी व कर्तव्य निष्ठा के बल पर बिहार में दो बार पूर्व मुख्यमंत्री बने। उनकी ईमानदारी के किस्से पूरे देश में आज भी सुनाए जाते हैं। बिहार में पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण लागू कर सामाजिक न्याय का बिगुल फूंकने वाले झोपड़ी के लाल भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की 24जनवरी को जयंती मनाई जाती है। जननायक कर्पूरी ठाकुर ने बिहार की राजनीति में समाजवादी विचारों का समावेश किया और अपनी नीतियों से राज्य को नए मुकाम तक पहुंचाया। कर्पूरी ठाकुर के फैसले आज भी प्रेरणा का स्रोत बने हुए हैं, और उनके बताए रास्ते पर चलकर बिहार ने सफलता की ऊंचाईयां हासिल की हैं। कई राजनेता उनके आदर्शों का अनुसरण करने का प्रयास करते हैं। कर्पूरी ठाकुर की ईमानदारी उन्हें अन्य राजनेताओं से अलग बनाती है।
डॉ. लोहिया और कर्पूरी ठाकुर की दोस्ती 24जनवरी 1924को समस्तीपुर के पितोझिया गांव में जन्मे कर्पूरी ठाकुर ने डॉ. राम मनोहर लोहिया के आदर्शों को अपनाया। डॉ. लोहिया ने कर्पूरी ठाकुर को हमेशा जननायक कहा और उनकी राजनीति को देश के लिए बदलाव का प्रतीक माना। लोहिया का मानना था कि अगर उन्हें पांच कर्पूरी ठाकुर मिल जाएं, तो देश में बदलाव आजाएगा कर्पूरी ठाकुर ने बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में दो कार्यकाल पूरे किए, पहले दिसंबर 1970से जून 1971तक, और फिर जून 1977से अप्रैल 1979तक। उनके कार्यकाल में लिए गए कई निर्णय जनहित में थे, जिसके कारण उन्हें जननायक की उपाधि प्राप्त हुई। कर्पूरी ठाकुर की गरीबी और जनहित में नीतियां कर्पूरी ठाकुर का जीवन बेहद साधारण था। विधायक बनने के बाद, उनके माता-पिता उन्हें 25पैसे दिया करते थे। एक बार जब उनके पिता के पास पैसे नहीं थे, तो कर्पूरी ठाकुर घर से बाहर चले गए, ताकि उन्हें शर्मिंदगी न हो। इस घटना ने उन्हें वृद्धावस्था पेंशन लागू करने के लिए प्रेरित किया, जिससे गरीब वृद्धों को वित्तीय मदद मिल सके। सादगी और ईमानदारी के प्रतीक कर्पूरी ठाकुर सादगी के प्रतीक थे। इस दौरान सपा मनोज सिंह काका, राजेन्द्र प्रताप सिंह, पूर्व एमएलसी अरविन्द सिंह, धनन्जय सिंह, प्रदेश अध्यक्ष इन्द्रजीत शर्मा, राष्ट्रीय अध्यक्ष हलीम सलमानी, चन्द्रशेखर यादव, अशोक शर्मा, बुलबुल सलमानी, कार्यक्रम आयोजक हीरा शर्मा, कार्यक्रम की अध्यक्षता मोहन शर्मा व संचालन महमूद सलमानी ने किया।
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