श्रीमद् भागवत कथा सुनने से होती है मोक्ष की प्राप्ति-आशुतोष

श्रीमद् भागवत कथा सुनने से होती है मोक्ष की प्राप्ति-आशुतोष
जागरण संवाददाता चहनिया चन्दौली
क्षेत्र तारगांव अजगरा स्थित बाबा शीतलू ब्रह्म् बाबा व अति प्राचीन शिव हनुमान मंदिर प्रांगण में सात दिवसीय भागवत कथा का आयोजन चल रहा है। भागवत कथा की पॉचवे दिन शुक्रवार को कथावाचक श्री आशुतोष महाराज ने श्री कृष्ण जन्म की वर्णन करते हुए उनके बाल लीलाओं की विस्तृत व्याख्या करते हुए कहा कि कृष्ण को वासुदेव जी यमुना नदी पार करते हुए नंदगांव लेके गए जहा यमुना नदी को पार करने लगे वही यमुना जी अपने भगवान श्रीकृष्ण के चरण स्पर्ष कर आगे का मार्ग प्रशस्त किया। जब वासुदेव जी नन्द गाव पहुचकर अपने मित्र नन्द जी के पास जाकर बालक को छोड़कर सारी व्यस्था बताते हुए वहा से पुनः वापस कारागार में आ गये।
दुसरी तरफ मथुरा के अत्याचारी राजा कंस का अपने बहन देवकी के आठवें पुत्र का बधकर निर्भय होना चाहता था लेकिन प्रभु की महिमा कौन जाने क्या होगा। भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रमाह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। कंस एक दुष्ट शासक था जिसने भविष्यवाणी के डर से अपनी बहन देवकी के सभी बच्चों को मार डाला था। भगवान कृष्ण ने देवकी और वसुदेव को कंस के अत्याचारों से मुक्त कराया और प्रजा को उनके भय से मुक्त किया। वही प्रभु ने अपने मित्रो ओर सखाअे संग बहुत लीलाए की। वहीं उपस्थित आयोजक आदि उपस्थित थे। धनंजय ओझा, मनोज तिवारी, सुनील तिवारी, अमित ओझा, विनायक ओझा, राजीव ओझा, त्रिलोकी नाथ, शिव शंकर ओझा, किशन , आदर्श त्रिपाठी, सौरव ओझा, राहुल, रोहित सेठ, आदि उपस्थित थे।

अधिकारियों के आदेश को मातहत दिखा रहे ठेगा
चहनियां चन्दौली।
क्षेत्र के प्रभुपुर गावं में अराजी नं0 311पर चकरोड बनवाने के लिए पिड़ित वायुनन्दन त्रिपाठी ने उपजिलाधिकारी व खण्ड विकास अधिकारी के यहा प्रार्थना पत्र देकर गुहार लगाया गया। लेकिन उच्चाधिकारियां के आदेश के बावजूद भी मातहत सचिव व प्रारम्भ कार्य कराना उचित नही समझ रहे है। वही पिड़ित वायुनन्दन ने खण्ड विकास अधिकारी से बार-बार मिलने के पर खण्ड विकास अधिकारी ने दो दिन के अन्दर काम लगवाये जाने का आश्वासन देकर प्रार्थी को शान्त कराया। इस संबंध में तत्कालीन एडीओ पंचायत ने सचिव को कार्य कराने का लिखित आदेश दिया था लेकिन सचिव द्वारा उसे नजर अंदाज करते हुए कार्य कराना उचित नही समझा। ग्राम प्रधान चुनावी रंग में रंग कर आलाधिकारियां के आदेश को ठेगा दिखाते हुए ठंण्डे बस्ते में डाल दिया है। अधिकारियों के आदेश को दो-दिन, चार-दिन करते-करते मातहत सचिव व ग्राम प्रधान दो माह बिता दिए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारियों का आदेश का कितना मातहत पालन करते है। अधिकारियों ढ़ुलमुल रवैया पूर्ण आदेश से तंग आकर पिड़ित आमरण अनशन करने का बाध्य हो गया। वही पिड़ित वायुनन्दन ने आलाधिकारियों चेताते हुए कहा कि अगर जल्द से जल्द कार्य प्रारम्भ नही करवाया तो प्रार्थी आमरण अनशन को बाध्य होगा जिसकी सारी जिम्मेदारी मातहतों की होगी।