फॉर्मर रजिस्ट्री कैम्प का जिलाधिकारी ने किया स्थलीय निरीक्षण व दिए आवश्यक दिशा निर्देश

चन्दौली दिनांक 07 अप्रैल 2026

 

फॉर्मर रजिस्ट्री कैम्प का जिलाधिकारी ने किया स्थलीय निरीक्षण व दिए आवश्यक दिशा निर्देश

 

जनपद में फॉर्मर रजिस्ट्री (किसान आईडी) के लिए विशेष अभियान चल रहा है, जिसका जिला प्रशासन द्वारा स्थलीय निरीक्षण किया गया। जिलाधिकारी द्वारा प्राथमिक विद्यालय कबीरपुर न्याय पंचायत डहिया विकास खण्ड नियामताबाद का निरीक्षण कर, सभी पात्र छूटे किसानों की ई-केवाईसी व भू-अभिलेख सत्यापन (खतौनी-आधार लिंकिंग) को पूरा करने के सख्त निर्देश दिये ताकि पीएम किसान योजना का लाभ मिल सके और कृषि योजनाओं (KCC, बीमा) के लिए डेटाबेस तैयार रहे।

उन्होंने संबंधित अधिकारी को ग्राम सचिवालयों/पंचायत भवनों का दौरा कर, त्रुटि रहित पेंडिंग मामलों को जल्द से जल्द निपटाने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने बताया कि किसानों को अपना आधार कार्ड, बैंक पासबुक और खतौनी लेकर जन सेवा केंद्र या कृषि समन्वयक के पास जाकर किसान आईडी बनानी होगी। यदि आधार और खतौनी में नाम भिन्न है, तो उसे ठीक कराएं, अन्यथा रजिस्ट्री अमान्य हो जाएगी। विशेष रूप से खतौनी का आधार से सत्यापन (e-KYC) अनिवार्य कर दिया गया है, ताकि लाभार्थी ही सरकारी सुविधाओं का लाभ उठा सकें।

 

इस दौरान मुख्य विकास अधिकारी आर जगत साईं,उप जिलाधिकारी पी डी डी यू नगर अनुपम मिश्रा, डीडी एजी भीमसेन,तहसीलदार सहित अन्य संबंधित उपस्थित रहे।

सीता हरण के दौरान जटायु व रावण का भंयकर युद्ध लीला का हुआ मंचनचहनियां चन्दौली। क्षेत्र स्थित कल्यानपुर सेवा समिति के तत्वाधान में चल रहे रामलीला मंचन के यह सातवें दिन रविवार रात में शुरुआत में प्रभु श्रीराम की आरती के साथ के साथ प्रारम्भ किया गया। रामलीला के सातवें दिन रावण ने माता सीता का हरण कर लिया और पुष्पक विमान से वह लंका ले जाने लगा। जिसपर माता सीता की करूण विलाप सुनकर गिद्धराज जटायु ने अपने मित्र की पुत्र बधु सीता को बचाने के लिए रावण से युद्ध करने लगा बड़ी भयंकर युद्ध हुआ रावण जटायु की मार को सहन न कर सका और क्रुद्ध होकर भगवान शिव द्वारा प्राप्त चन्द्रहासं खड्ग से जटायु पर वार कर दिया जिसमें जटायु का एक पंख कट गया लेकिन उसके बावजूद भी युद्ध नही थमा तब तक रावण ने दूसरा वार कर दिया। जिसमें जटायू का दूसरा पंख भी काट दिया जिससे आकाश से गिरकर जटायू गंभीर रूप से घायल हो गये। जब प्रभु श्रीराम व लक्षमण अपनी भार्या सीता को जंगल-वन-पहाड़ां से घुमते-घुमते रास्ते में गिरे जटायू से होती है तो जटायू ने पूरा वृतान्त प्रभु श्रीराम को सुनाया और अपना प्राण दिया। जिस पर प्रभु श्रीराम ने अपने पिता के मित्र की पुत्र बनकर अन्त्येष्टि कर सीता माता की खोज करने लगे। इस दौरान अवधेश चौबे व्यास, अरुण कुमार, जयप्रकाश चौबे, मारकंडे पांडे, अशोक कुमार, घनश्याम सिंह, शमशेर सिंह, अजय चौबे, मनोज चौबे, प्रमोद चौबे, राकेश चौबे, केसर यादव, बबलू यादव, अनुज चौबे, त्रिलोक, टुनटुन, हिमांशु, इत्यादि सैकड़ों कार्यकर्ता व भक्त उपस्थित थे।