पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के ओम नगर वार्ड नंबर 9 में छठ पूजा बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इलाके के सैकड़ों श्रद्धालु घाट पर एकत्रित हुए और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया।

रिपोर्ट – राहुल मेहानी

ओम नगर वार्ड नंबर 9 में छठ पूजा का भव्य आयोजन

पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के ओम नगर वार्ड नंबर 9 में छठ पूजा बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इलाके के सैकड़ों श्रद्धालु घाट पर एकत्रित हुए और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया।

पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर सूर्य देव और छठी मइया की आराधना की। सुबह और शाम के अर्घ्य में भक्तों ने पारंपरिक गीत गाए और माहौल को भक्तिमय बना दिया। पूजा स्थल को आकर्षक तरीके से सजाया गया था, और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा गया।

इस अवसर पर मानवाधिकार न्यूज़ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय रस्तोगी जी और जनप्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। उन्होंने आयोजन की व्यवस्था और श्रद्धालुओं के उत्साह की सराहना की। पूजा समिति ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मानवाधिकार न्यूज़ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय जी का कहना है “छठ पूजा हमारे भारतीय संस्कृति का अनमोल हिस्सा है, जो न केवल हमारी आस्था को दर्शाता है बल्कि प्रकृति के प्रति हमारे गहरे सम्मान को भी उजागर करता है। इस पर्व में सूर्य देव और माँ गंगा की आराधना कर हम सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं।

मानवाधिकार के दृष्टिकोण से, यह पर्व हमें एकता, समानता और समर्पण का संदेश देता है, जहाँ जाति, वर्ग, धर्म से ऊपर उठकर हर व्यक्ति इसमें सम्मिलित होता है। आइए, हम सब मिलकर इस पर्व के महत्व को समझें और अपने समाज में हर व्यक्ति के अधिकारों का सम्मान करें। छठ पूजा के इस पावन अवसर पर सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ।”

छठ पूजा, जो प्रकृति और परिवार के प्रति आस्था का प्रतीक है, इस वर्ष भी पूरे जोश और उत्साह के साथ मनाई गई। आयोजकों और श्रद्धालुओं ने मिलकर इसे यादगार बना दिया।

धनुष टूटने का दृश्य देख दर्शक हुए गदगद -शेरवां खखडा गांव में आयोजित श्री राम कथा केतिसरे दिन शुक्रवार की कथा वाचक पंडित मंगलम दीप महाराज कथा में बतलाया कि शिव धनुष टूटते ही चारों तरफ हर-हर महादेव व जय श्रीराम के नारे से पूरा पांडाल सहित गांव गुजायमान हो गया। इस दौरान राजा जनक के सीता स्वयंवर के लिये रखे गये शर्त को जब कोई राजा, देव-दानव-मानव पूरा नही कर पाए तब महाराज जनक निराश हो गये और उन्होने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि मैं यह समझता कि यहां कोई भी वीर पुरूष नही सभी का-पुरूष ही का-पुरूष है। तो मैं अपनी बेटी के लिए एेंसा शर्त नही रखता। स्वयंर देखने के उद्देश्य से पहुचे लक्षमण तुरन्त ही उनको बातों से कुद्ध होकर कहे महाराज जनक रघुवंशियो के समक्ष इस तरह के शब्द बोलने का किसी को कोई अधिकार नही यह धनुष क्या चीज है अगर बड़े भैया का आदेश हो तो मैं पूरी पृथ्वी को गेद तरह उठाकर पटक कई टुकड़े कर दूं। जिस पर गुरू विश्वामित्र व प्रभुराम ने लक्षमण को समझाते हुए शान्त करवाया और महाराज जनक की निराशा को आशा में तब्दील करते हुए शुभ-मुहुर्त में विश्वामित्र के आदेशानुसार प्रभु श्रीराम ने धुनष पर तमंचा चढ़ाने गये और तमंचा चढ़ाते ही वह टूट गया। धनुष के टूटते ही चारो तरफ हर-हर महादेव, व जय श्रीराम के नारे से पूरा गांव सहित पंडाल गुजायमान हो गया। इस दौरान कथा में उपस्थित मंगल मिश्रा, सूर्य बली यादव, चंद्रभूषण त्रिपाठी, वशिष्ठ नरायण त्रिपाठी,बिशाल,मनोहर, अशोक मिश्रा, सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।