एचडीएफसी बैंक ने रक्तदान शिविर का किया आयोजन, काशी के प्रमुख उद्यमी और समाजसेवी श्री राजेंद्र गोयनका एवं श्री दीपक बहल ने दीप प्रज्वलन कर किया पुनीत मुहिम का शुभारंभ

रिपोर्ट हर्षिता मेहानी

एचडीएफसी बैंक ने रक्तदान शिविर का किया आयोजन, काशी के प्रमुख उद्यमी और समाजसेवी श्री राजेंद्र गोयनका एवं श्री दीपक बहल ने दीप प्रज्वलन कर किया पुनीत मुहिम का शुभारंभ

दिनांक 6 दिसंबर वाराणसी।
एचडीएफसी बैंक ने वाराणसी में 2007 से शुरू हुई अपनी देश व्यापी पुनीत मुहिम परिवर्तन के अंतर्गत रक्तदान आयोजन की परंपरा की निरंतरता को बनाए हुए अपनी दो शाखाओं मकबूल आलम रोड शाखा एवं रथयात्रा शाखा पर किया रक्तदान शिविर का आयोजन।

इस मानवीय और पुनीत कार्य का शुभारंभ काशी के प्रमुख उद्यमी और समाजसेवी श्री राजेंद्र गोयनका एवं श्री दीपक बहल ने दीप प्रज्वलन करके किया।

आईएमएस बीएचयू ब्लड बैंक के संग संयुक्त रूप में आयोजित इस पुनीत कार्यक्रम में विशिष्टजनों का स्वागत बैंक के जोनल हेड श्री मनीष टंडन एवं सर्किल हेड श्री प्रदीप शुक्ला ने किया।

अपने संबोधन में श्री मनीष टंडन ने विशिष्ट अतिथियों और सभी सहभागी  दानदाताओं को संबोधित करते हुए बताया कि ये मानवीय पहलू हमारे बैंक के संस्कारों में शामिल है और हमारा शीर्ष नेतृत्व हमें सदैव प्रेरित करता है कि हम समाज और मानवता के यथा संभव योगदान करें और मानवता की सेवा में श्रेष्ठ दानों में रक्तदान है। 2007 से हमारी इस मानवीय सेवा का शुभारम्भ हुआ तबसे अबतक हम लोगों ने इस निस्वार्थ सेवा से गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड बना दिया, अब तक हमने देश भर में 7500 से ज्यादा कैंप लगाए है और लगभग 6 लाख यूनिट रक्तदान किया है। हमारी सभी उपलब्धियों और सेवाओं के पीछे हमारी प्रेरणा ऊर्जा हमारे ग्राहकों का विश्वास और समर्थन है।

विशिष्ट अतिथि श्री राजेंद्र गोयनका जी ने अपने संबोधन में बैंक की इस मुहीम को सराहा और कहा कि कारोबारी जगत में जो संस्था अपने मानवीय मूल्यों और आचरण को प्राथमिकता देते हैं वही संस्था श्रेष्ठता के शिखर को पाते हैं क्योंकि मानव समाज का विकास और उत्थान ही तो अर्थशास्त्र का भी उद्देश्य है, और आपका बैंक अपनी सेवाओं और सहभागिता से सभी के लिए एक सशक्त उदाहरण है।

श्री दीपक बहल ने अपने संबोधन में पूरे बैंक को धन्यवाद और आभार व्यक्त करते हुए कहा कि रक्तदान का महत्व क्या है ये बताने की आवश्यकता नहीं है, हम सबने अपने किसी न किसी निकटजनों के लिए या  स्वयं के लिए अनुभव किया है। मैं पूरे विश्वास से कह सकता हूं कि आयोजन दुनिया में दान संबंधित विविध आयोजन होते हैं पर ये आयोजन सबसे सर्वोत्तम है। और आपका बैंक जिस प्रतिबद्धता और वचनबद्धता और समर्पण से इसका आयोजन करता है वो अनुकरणीय है।

अपराह्न 2 बजे तक दोनों शिविरों में 72 यूनिट रक्तदान किया जा चुका था। उक्त अवसर पर दोनों शिविरों में शहर के गणमान्यजन बैंक के अधिकारी, बैंककर्मी,एवं ग्राहक पूर्ण उत्साह से उपस्थित थे।

कहीं बज बजाती नालियां तो कहीं झाड़- झंखाड से पटा रास्ता ग्रामीण हलकान-चंदौली तारा जीवनपुर स्थित सहरोई गांव में इन दिनों बज बजाती नालिया तो कहीं गांव में मेन रास्तों पर झाड़ -झंखारों से पटा हुआ है। हाल यह है कि अगर समय रहते साफ सफाई नहीं की गई तो संक्रामक बीमारियों को इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में मेन रास्तों पर झाड़ झंखाड इस तरह पट गया कि उसपर राह चलना दुष्कर हो गया है। बरसात के दिनों में झाड़-झंखाड़ो में विशैल जीव जंतुओं का निवास हो गया है। जो कि हमेशा दुर्घटनाएं की आशंका बनी रहती है। नाबदान के पानी से उठ रहे दुर्गंध से ग्रामीण का नरकी जीवन जीने को विवश हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि सफाई कर्मी गांव में दर्शन दुर्लभ हो गया है। कभी -कभार आकर हाजिरी लगाकर रफू चक्कर हो जाता है। ग्रामीणों ने सफाई कर्मी से इस संदर्भ में कहा जाता कि झाड़- झंखाड व नालियों को साफ कर दीजिए तो यह कह कर टाल देता है कि आप लोग हमारे अधिकारियों से बात कर लीजिए। वहीं ग्रामीण प्रधान व सचिव से कई बार अवगत करवाया लेकिन निजात दिलाने में असमर्थ हैं। वहीं उपस्थित नामवर मिश्रा, ईश्वरी, उमेश मिश्रा, रमेश मिश्रा, राजेंद्र प्रजापति, पखंडू गुप्ता, कुंवारू गुप्ता, चंद्रबली खरवार, महानंद मिश्रा, शिशु मिश्रा, लादी प्रजापति, देवेन्द्र मिश्रा सुनील मिश्रा, बेचू, दर्जनों ग्रामीणों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि यदि नाली व झाड़ झंखाड का समुचित व्यवस्था नहीं हुआ तो हम ग्रामीण विकासखंड कार्यालय का घेराव करते हुए धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे।

सीता हरण के दौरान जटायु व रावण का भंयकर युद्ध लीला का हुआ मंचनचहनियां चन्दौली। क्षेत्र स्थित कल्यानपुर सेवा समिति के तत्वाधान में चल रहे रामलीला मंचन के यह सातवें दिन रविवार रात में शुरुआत में प्रभु श्रीराम की आरती के साथ के साथ प्रारम्भ किया गया। रामलीला के सातवें दिन रावण ने माता सीता का हरण कर लिया और पुष्पक विमान से वह लंका ले जाने लगा। जिसपर माता सीता की करूण विलाप सुनकर गिद्धराज जटायु ने अपने मित्र की पुत्र बधु सीता को बचाने के लिए रावण से युद्ध करने लगा बड़ी भयंकर युद्ध हुआ रावण जटायु की मार को सहन न कर सका और क्रुद्ध होकर भगवान शिव द्वारा प्राप्त चन्द्रहासं खड्ग से जटायु पर वार कर दिया जिसमें जटायु का एक पंख कट गया लेकिन उसके बावजूद भी युद्ध नही थमा तब तक रावण ने दूसरा वार कर दिया। जिसमें जटायू का दूसरा पंख भी काट दिया जिससे आकाश से गिरकर जटायू गंभीर रूप से घायल हो गये। जब प्रभु श्रीराम व लक्षमण अपनी भार्या सीता को जंगल-वन-पहाड़ां से घुमते-घुमते रास्ते में गिरे जटायू से होती है तो जटायू ने पूरा वृतान्त प्रभु श्रीराम को सुनाया और अपना प्राण दिया। जिस पर प्रभु श्रीराम ने अपने पिता के मित्र की पुत्र बनकर अन्त्येष्टि कर सीता माता की खोज करने लगे। इस दौरान अवधेश चौबे व्यास, अरुण कुमार, जयप्रकाश चौबे, मारकंडे पांडे, अशोक कुमार, घनश्याम सिंह, शमशेर सिंह, अजय चौबे, मनोज चौबे, प्रमोद चौबे, राकेश चौबे, केसर यादव, बबलू यादव, अनुज चौबे, त्रिलोक, टुनटुन, हिमांशु, इत्यादि सैकड़ों कार्यकर्ता व भक्त उपस्थित थे।