महासंग्राम G.K. Competition में 3200 छात्रों की अद्भुत भागीदारी

महासंग्राम G.K. Competition में 3200 छात्रों की अद्भुत भागीदारी
नगरपालिका इंटर कॉलेज, पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर | 16 नवंबर 2025

पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के नगरपालिका इंटर कॉलेज में 16 नवंबर 2025 को शिक्षा जगत में एक ऐतिहासिक आयोजन देखने को मिला। क्षेत्र की प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थाओं — MCI Institute, ROY Classes, Samarpan Classes और CBS Coaching Center — के संयुक्त तत्वावधान में महासंग्राम G.K. Competition का भव्य आयोजन किया गया।

इस प्रतियोगिता में 3200 से अधिक छात्रों ने प्रतिभाग किया, जिसने इसे जिले की सबसे

बड़ी और सबसे सफल शैक्षणिक प्रतिस्पर्धाओं में शामिल कर दिया। विशाल संख्या में आए प्रतिभागियों ने न सिर्फ अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम को सफल बनाया, बल्कि अपने ज्ञान और प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन भी किया।

प्रतियोगिता का उद्देश्य

आयोजन का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में—

सामान्य ज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना

प्रतिस्पर्धात्मक मानसिकता विकसित करना

प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को एक बड़ा मंच देना

शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक माहौल बनाना

आयोजक संस्थाओं ने बताया कि इस तरह की प्रतियोगिताएँ छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ-साथ उज्वल भविष्य की दिशा तय करने में मदद करती हैं।

धनुष टूटने का दृश्य देख दर्शक हुए गदगद -शेरवां खखडा गांव में आयोजित श्री राम कथा केतिसरे दिन शुक्रवार की कथा वाचक पंडित मंगलम दीप महाराज कथा में बतलाया कि शिव धनुष टूटते ही चारों तरफ हर-हर महादेव व जय श्रीराम के नारे से पूरा पांडाल सहित गांव गुजायमान हो गया। इस दौरान राजा जनक के सीता स्वयंवर के लिये रखे गये शर्त को जब कोई राजा, देव-दानव-मानव पूरा नही कर पाए तब महाराज जनक निराश हो गये और उन्होने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि मैं यह समझता कि यहां कोई भी वीर पुरूष नही सभी का-पुरूष ही का-पुरूष है। तो मैं अपनी बेटी के लिए एेंसा शर्त नही रखता। स्वयंर देखने के उद्देश्य से पहुचे लक्षमण तुरन्त ही उनको बातों से कुद्ध होकर कहे महाराज जनक रघुवंशियो के समक्ष इस तरह के शब्द बोलने का किसी को कोई अधिकार नही यह धनुष क्या चीज है अगर बड़े भैया का आदेश हो तो मैं पूरी पृथ्वी को गेद तरह उठाकर पटक कई टुकड़े कर दूं। जिस पर गुरू विश्वामित्र व प्रभुराम ने लक्षमण को समझाते हुए शान्त करवाया और महाराज जनक की निराशा को आशा में तब्दील करते हुए शुभ-मुहुर्त में विश्वामित्र के आदेशानुसार प्रभु श्रीराम ने धुनष पर तमंचा चढ़ाने गये और तमंचा चढ़ाते ही वह टूट गया। धनुष के टूटते ही चारो तरफ हर-हर महादेव, व जय श्रीराम के नारे से पूरा गांव सहित पंडाल गुजायमान हो गया। इस दौरान कथा में उपस्थित मंगल मिश्रा, सूर्य बली यादव, चंद्रभूषण त्रिपाठी, वशिष्ठ नरायण त्रिपाठी,बिशाल,मनोहर, अशोक मिश्रा, सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।