संयुक्त कृषि निदेशक ने उर्वरक की दुकानों का किया निरीक्षण चंदौली/दिनांक 18 दिसम्बर, 2025

संयुक्त कृषि निदेशक ने उर्वरक की दुकानों का किया निरीक्षण चंदौली/दिनांक 18 दिसम्बर, 2025

संयुक्त कृषि निदेशक, वाराणसी मण्डल, वाराणसी शैलेन्द्र कुमार शाक्य द्वारा उप कृषि निदेशक चन्दौली कार्यालय का निरीक्षण किया गया। इस दौरान इन्होंने समस्त योजनाओं की भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा बैठक आहूत की गई।

बैठक के दौरान उप कृषि निदेशक भीमसेन के साथ-साथ समस्त योजना प्रभारी/कर्मचारियों को निर्देशित किया गया कि समस्त योजनाओं के समस्त भौतिक कार्य ससमय कराते हुए नियमानुसार वित्तीय प्रगति बढ़ाएं। निरीक्षण के समय उप कृषि निदेशक के साथ कर्मचारी उपस्थित रहे।

कृषकों को निर्धारित दर पर गुणवत्तायुक्त उर्वरक प्राप्त हो सके इसके लिए जिला कृषि अधिकारी विनोद कुमार यादव के साथ बालाजी एग्रीजंक्शन सेन्टर भिखारीपुर चन्दौली का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान एग्रीजंक्शन संचालक अजीत कुमार उपस्थित मिले उन्होंने बताया कि 503 बोरी यूरिया एवं 26 बोरी डी0ए0पी0 उपलब्ध है जिसका पॉस मशीन से मिलान करने पर सही पाया गया तथा कृषकों से दूरभाष पर वार्ता की गई। तद्पश्चात बहुउद्देशीय प्राथमिक ग्रामीण सहकारी समिति पचोखर, विकास खण्ड नियामताबाद का जिला कृषि अधिकारी के साथ निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान महेन्द सिंह, सचिव एवं चन्दन यादव, सहायक विकास अधिकारी सहकारिता उपस्थित मिले। इसी क्रम में सचिव द्वारा बताया गया कि 119 बोरी यूरिया, डी0ए0पी0 34 बोरी उपलब्ध है। मौके पर रेट बोर्ड एवं देय अनुदान का विवरण नहीं पाया गया जिसके क्रम में मौके पर उपस्थित जिला कृषि अधिकारी को निर्देशित किया गया कि समस्त उर्वरकों की उपलब्धता एवं उर्वरक रेट बोर्ड एवं देय अनुदान से सम्बन्धित बैनर एवं वालपेंटिंग करवाया जाना सुनिश्चित करें तथा कृत कार्यवाही से अवगत कराएं। साथ ही किसी भी विक्रेता द्वारा अनुदानित उर्वरकों के साथ गैर अनुदानित उत्पादों की टैगिंग कर बिक्री करने का ऐसा कोई तथ्य प्रकाश में आता हैै, तो विक्रेता के विरूद्ध कड़ी कार्यवाही की जाए।

धनुष टूटने का दृश्य देख दर्शक हुए गदगद -शेरवां खखडा गांव में आयोजित श्री राम कथा केतिसरे दिन शुक्रवार की कथा वाचक पंडित मंगलम दीप महाराज कथा में बतलाया कि शिव धनुष टूटते ही चारों तरफ हर-हर महादेव व जय श्रीराम के नारे से पूरा पांडाल सहित गांव गुजायमान हो गया। इस दौरान राजा जनक के सीता स्वयंवर के लिये रखे गये शर्त को जब कोई राजा, देव-दानव-मानव पूरा नही कर पाए तब महाराज जनक निराश हो गये और उन्होने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि मैं यह समझता कि यहां कोई भी वीर पुरूष नही सभी का-पुरूष ही का-पुरूष है। तो मैं अपनी बेटी के लिए एेंसा शर्त नही रखता। स्वयंर देखने के उद्देश्य से पहुचे लक्षमण तुरन्त ही उनको बातों से कुद्ध होकर कहे महाराज जनक रघुवंशियो के समक्ष इस तरह के शब्द बोलने का किसी को कोई अधिकार नही यह धनुष क्या चीज है अगर बड़े भैया का आदेश हो तो मैं पूरी पृथ्वी को गेद तरह उठाकर पटक कई टुकड़े कर दूं। जिस पर गुरू विश्वामित्र व प्रभुराम ने लक्षमण को समझाते हुए शान्त करवाया और महाराज जनक की निराशा को आशा में तब्दील करते हुए शुभ-मुहुर्त में विश्वामित्र के आदेशानुसार प्रभु श्रीराम ने धुनष पर तमंचा चढ़ाने गये और तमंचा चढ़ाते ही वह टूट गया। धनुष के टूटते ही चारो तरफ हर-हर महादेव, व जय श्रीराम के नारे से पूरा गांव सहित पंडाल गुजायमान हो गया। इस दौरान कथा में उपस्थित मंगल मिश्रा, सूर्य बली यादव, चंद्रभूषण त्रिपाठी, वशिष्ठ नरायण त्रिपाठी,बिशाल,मनोहर, अशोक मिश्रा, सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।