काशी वन्यजीव द्वारा पर्यावरण संरक्षण हेतु कार्यक्रम का किया गया आयोजन- चंदौली मुगलसराय

काशी वन्यजीव द्वारा पर्यावरण संरक्षण हेतु कार्यक्रम का किया गया आयोजन- चंदौली मुगलसराय
दिनांक 22 जनवरी 2026 को राम कृष्ण महिला विद्या मंदिर इंटर कालेज मुगलसराय‌‌‌ में काशी वन्य जीव प्रभाग चन्दौली द्वारा परिस्थितिकीय पर्यावरण संरक्षण हेतु जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुगलसराय विधायक माननीय श्री रमेश जायसवाल जी, नगर के प्रमुख व्यवसायी एवं समाजसेवी श्री सतीश कुमार जिंदल जी, एसडीओ वन विभाग श्री वरूण प्रताप सिंह जी, विद्यालय प्रबंधक श्री रमेश सिंह जी एवं प्रधानाचार्या श्रीमती माधुरी देवी जी के द्वारा मां सरस्वती जी के चित्र पर माल्यार्पण व दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।
कार्यक्रम में विद्यालय के बच्चों द्वारा पर्यावरण संरक्षण पर सुन्दर संदेश देती हुई रंगोली बनाई गई एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों के अन्तर्गत सरस्वती वंदना, स्वागत गीत, पर्यावरण संरक्षण पर आधारित नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुति की गई तत्पश्चात उपस्थित अतिथियों द्वारा बच्चों को पुरस्कृत करते हुए बच्चों का उत्साहवर्धन किया गया।
कार्यक्रम में श्री सुधीर भास्कर पाण्डे, श्री विजय प्रताप सिंह, श्री शरद चन्द्र मिश्रा, श्रीमती कल्पना रानी, शिल्पी राय, रचना मौर्य, गायत्री सिंह, शशि यादव, लीलावती कुशवाहा, पुष्पा मिश्रा, प्रिया सिंह,अपूर्णा ,पूर्णिमा,राजन, मंजीषा आदि अध्यापिकाएं उपस्थित थीं। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती अपर्णा मालवीय द्वारा किया गया।

सीता हरण के दौरान जटायु व रावण का भंयकर युद्ध लीला का हुआ मंचनचहनियां चन्दौली। क्षेत्र स्थित कल्यानपुर सेवा समिति के तत्वाधान में चल रहे रामलीला मंचन के यह सातवें दिन रविवार रात में शुरुआत में प्रभु श्रीराम की आरती के साथ के साथ प्रारम्भ किया गया। रामलीला के सातवें दिन रावण ने माता सीता का हरण कर लिया और पुष्पक विमान से वह लंका ले जाने लगा। जिसपर माता सीता की करूण विलाप सुनकर गिद्धराज जटायु ने अपने मित्र की पुत्र बधु सीता को बचाने के लिए रावण से युद्ध करने लगा बड़ी भयंकर युद्ध हुआ रावण जटायु की मार को सहन न कर सका और क्रुद्ध होकर भगवान शिव द्वारा प्राप्त चन्द्रहासं खड्ग से जटायु पर वार कर दिया जिसमें जटायु का एक पंख कट गया लेकिन उसके बावजूद भी युद्ध नही थमा तब तक रावण ने दूसरा वार कर दिया। जिसमें जटायू का दूसरा पंख भी काट दिया जिससे आकाश से गिरकर जटायू गंभीर रूप से घायल हो गये। जब प्रभु श्रीराम व लक्षमण अपनी भार्या सीता को जंगल-वन-पहाड़ां से घुमते-घुमते रास्ते में गिरे जटायू से होती है तो जटायू ने पूरा वृतान्त प्रभु श्रीराम को सुनाया और अपना प्राण दिया। जिस पर प्रभु श्रीराम ने अपने पिता के मित्र की पुत्र बनकर अन्त्येष्टि कर सीता माता की खोज करने लगे। इस दौरान अवधेश चौबे व्यास, अरुण कुमार, जयप्रकाश चौबे, मारकंडे पांडे, अशोक कुमार, घनश्याम सिंह, शमशेर सिंह, अजय चौबे, मनोज चौबे, प्रमोद चौबे, राकेश चौबे, केसर यादव, बबलू यादव, अनुज चौबे, त्रिलोक, टुनटुन, हिमांशु, इत्यादि सैकड़ों कार्यकर्ता व भक्त उपस्थित थे।