नासूर बनती जा रही चहनियां में जाम की समस्याचहनिया चन्दौलींशासन के लाख प्रयास के बावजूद भी चहनियॉ बाजार में अतिक्रमण व सड़कां पर ठेला, खोमचा व टेम्पों चालकां की मनमानी तथा सड़कों पर आड़े-तिरछे खड़े वाहनों से प्रायः जाम व झाम की समस्या का दंश झेलना पड़ रहा है। पुलिस के लाख प्रयासों के बावजूद भी चहनियॉ वाया बलुआ मार्ग शिवमन्दिर के पास अबैध टेम्पों स्टैण्ड में लगी टेम्पुओ की लम्बी कतार तथा कस्बा से सैदपुर मार्ग पर टेम्पों व वाहनों को आड़े तिरछे खड़ा कर देने से जाम की समस्या से जूझना पड़ रहा है। कभी-कभी तो सवारियों के बैठाने को लेकर बाद-विवाद व लड़ाई झगड़ा की नौबत आ जाती है। बावजूद भी स्थानीय पुलिस पिकेट पर न रहकर चाय-पान की दुकानों पर आराम फरमाते दिखे जाते है। वही लोगों ने दबी जुबान बताया कि अबैध टेम्पों स्टैण्ड के कारण आयेदिन जाम लगता जो स्टैण्ड पुलिस प्रशसन के संरक्षण फलता-फूलता रहता है। वही लोगों ने शासन प्रशासन से यथाशीघ्र बाजार में अतिक्रमण व जाम की समस्या से निजात दिलाये जाने की मांग किया है।

रिपोर्ट मनोज मिश्रा

धनुष टूटने का दृश्य देख दर्शक हुए गदगद -शेरवां खखडा गांव में आयोजित श्री राम कथा केतिसरे दिन शुक्रवार की कथा वाचक पंडित मंगलम दीप महाराज कथा में बतलाया कि शिव धनुष टूटते ही चारों तरफ हर-हर महादेव व जय श्रीराम के नारे से पूरा पांडाल सहित गांव गुजायमान हो गया। इस दौरान राजा जनक के सीता स्वयंवर के लिये रखे गये शर्त को जब कोई राजा, देव-दानव-मानव पूरा नही कर पाए तब महाराज जनक निराश हो गये और उन्होने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि मैं यह समझता कि यहां कोई भी वीर पुरूष नही सभी का-पुरूष ही का-पुरूष है। तो मैं अपनी बेटी के लिए एेंसा शर्त नही रखता। स्वयंर देखने के उद्देश्य से पहुचे लक्षमण तुरन्त ही उनको बातों से कुद्ध होकर कहे महाराज जनक रघुवंशियो के समक्ष इस तरह के शब्द बोलने का किसी को कोई अधिकार नही यह धनुष क्या चीज है अगर बड़े भैया का आदेश हो तो मैं पूरी पृथ्वी को गेद तरह उठाकर पटक कई टुकड़े कर दूं। जिस पर गुरू विश्वामित्र व प्रभुराम ने लक्षमण को समझाते हुए शान्त करवाया और महाराज जनक की निराशा को आशा में तब्दील करते हुए शुभ-मुहुर्त में विश्वामित्र के आदेशानुसार प्रभु श्रीराम ने धुनष पर तमंचा चढ़ाने गये और तमंचा चढ़ाते ही वह टूट गया। धनुष के टूटते ही चारो तरफ हर-हर महादेव, व जय श्रीराम के नारे से पूरा गांव सहित पंडाल गुजायमान हो गया। इस दौरान कथा में उपस्थित मंगल मिश्रा, सूर्य बली यादव, चंद्रभूषण त्रिपाठी, वशिष्ठ नरायण त्रिपाठी,बिशाल,मनोहर, अशोक मिश्रा, सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।