मानवाधिकार न्यूज़ के राष्ट्रीय अध्यक्ष जी द्वारा कोचिंग अध्यापक को दी गई रामायण ग्रंथ

रिपोर्ट राहुल मेहानी
रिपोर्ट राहुल मेहानी

आज मैंने अपने बच्चों और हमारे प्रिय मित्र, कोचिंग अध्यापक  शोभित भास्कर जी को रामायण ग्रंथ की पुस्तकें प्रदान कीं। मैंने उनसे विनम्र निवेदन किया कि बच्चों को श्री राम के जीवन और उनके आदर्शों के बारे में जानकारी दी जाए, ताकि वे हमारे महान सांस्कृतिक और धार्मिक ग्रंथों से प्रेरणा ले सकें।

इस पहल को देखकर  शोभित भास्कर जी बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने बताया कि उनके कोचिंग क्लास के बच्चे अक्सर उनसे रामायण, भागवत गीता, और हनुमान जी की कहानियों के बारे में सुनने की इच्छा व्यक्त करते हैं। बच्चे इन कहानियों पर कई सवाल भी पूछते हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि वे हमारी संस्कृति और धार्मिक ग्रंथों के प्रति कितने उत्सुक और जिज्ञासु हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि यह अत्यंत सराहनीय कदम है, क्योंकि इससे बच्चों में न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक ज्ञान बढ़ेगा, बल्कि वे अच्छे संस्कार और नैतिक मूल्य भी सीखेंगे। उन्होंने इस प्रयास को और अधिक सफल बनाने के लिए हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया।

हमारा उद्देश्य है कि आने वाली पीढ़ी रामायण जैसे अमूल्य ग्रंथों से प्रेरणा लेकर सत्य, धर्म और मर्यादा के मार्ग पर चल सके। इस पहल को और अधिक विस्तार देने का हमारा प्रयास जारी रहेगा।

अधिकारियों के आदेश को मातहत दिखा रहे ठेगा
चहनियां चन्दौली।
क्षेत्र के प्रभुपुर गावं में अराजी नं0 311पर चकरोड बनवाने के लिए पिड़ित वायुनन्दन त्रिपाठी ने उपजिलाधिकारी व खण्ड विकास अधिकारी के यहा प्रार्थना पत्र देकर गुहार लगाया गया। लेकिन उच्चाधिकारियां के आदेश के बावजूद भी मातहत सचिव व प्रारम्भ कार्य कराना उचित नही समझ रहे है। वही पिड़ित वायुनन्दन ने खण्ड विकास अधिकारी से बार-बार मिलने के पर खण्ड विकास अधिकारी ने दो दिन के अन्दर काम लगवाये जाने का आश्वासन देकर प्रार्थी को शान्त कराया। इस संबंध में तत्कालीन एडीओ पंचायत ने सचिव को कार्य कराने का लिखित आदेश दिया था लेकिन सचिव द्वारा उसे नजर अंदाज करते हुए कार्य कराना उचित नही समझा। ग्राम प्रधान चुनावी रंग में रंग कर आलाधिकारियां के आदेश को ठेगा दिखाते हुए ठंण्डे बस्ते में डाल दिया है। अधिकारियों के आदेश को दो-दिन, चार-दिन करते-करते मातहत सचिव व ग्राम प्रधान दो माह बिता दिए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारियों का आदेश का कितना मातहत पालन करते है। अधिकारियों ढ़ुलमुल रवैया पूर्ण आदेश से तंग आकर पिड़ित आमरण अनशन करने का बाध्य हो गया। वही पिड़ित वायुनन्दन ने आलाधिकारियों चेताते हुए कहा कि अगर जल्द से जल्द कार्य प्रारम्भ नही करवाया तो प्रार्थी आमरण अनशन को बाध्य होगा जिसकी सारी जिम्मेदारी मातहतों की होगी।