विजय नगर कॉलोनी में सड़क और नाली निर्माण की अनदेखी — बारिश में जलभराव से जनता परेशान

पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर (चंदौली):
विजय नगर कॉलोनी वार्ड नंबर 1 के लोगों की परेशानियाँ लगातार बढ़ती जा रही हैं। इस क्षेत्र में न तो आज तक पक्की सड़क बनी है और न ही जल निकासी के लिए नाली का निर्माण किया गया है। परिणामस्वरूप, बारिश का पानी सड़क पर जमा होकर कीचड़ का रूप ले लेता है, जिससे लोगों का घर से निकलना भी दुश्वार हो गया है।

स्थानीय निवासियों ने बताया कि सड़क की जर्जर हालत और जलभराव के कारण बच्चों को स्कूल जाने में कठिनाई होती है, वहीं बुजुर्गों और महिलाओं को फिसलने का डर हमेशा बना रहता है। मोटरसाइकिल और साइकिल से निकलने वालों को अक्सर गिरने की नौबत आ जाती है। गंदा पानी कई बार घरों में भी घुस जाता है, जिससे स्वच्छता और स्वास्थ्य संबंधी खतरे उत्पन्न हो रहे हैं।

लोगों का कहना है कि कई बार शिकायतें करने के बावजूद नगर पालिका और संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। क्षेत्रवासी अब खुद ही आगे आकर आवाज उठा रहे हैं।

इस समस्या को लेकर राम उजागिर उपाध्याय, छक्कू पासवान, अमरजीत, शंकर, रामबिलास, जितेंद्र, संतोष, राजेंद्र, शेखर, विपिन, श्यामलाल, सतेंद्र, गजेंद्र, शिवा, विनोद, अखिलेश, राजदेव, एन.के. सिंह, राजीव और के.के. सिंह सहित दर्जनों लोगों ने एकजुट होकर नगर प्रशासन से जल्द कार्रवाई की मांग की है।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि जल्द ही सड़क और नाली का निर्माण कार्य नहीं शुरू किया गया, तो वे सामूहिक रूप से प्रदर्शन करेंगे और मामले को उच्च अधिकारियों तथा मानवाधिकार आयोग तक ले जाएंगे।

क्षेत्रवासियों का यह भी कहना है कि चुनाव के समय वादे तो बहुत किए जाते हैं, लेकिन जब असली जरूरत पड़ती है, तो जनप्रतिनिधि और अधिकारी आंख मूंद लेते हैं। अब जनता चाहती है कि उनके क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं जल्द उपलब्ध कराई जाएं ताकि वे सामान्य जीवन जी सकें।

रिपोर्ट: मानवाधिकार न्यूज़, पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर (चंदौली)

चंदौली पी डी डी यू नगर! पब्लिक इंटरेस्ट थिंकर्स असेंबली” पिता” संस्था  द्वारा प्रताड़ित पतियों पर संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस चर्चा के केंद्र में था बेंगलुरु में  अतुल सुभाष  नामक एक इंजीनियर द्वारा लिखा सुसाइड नोट और उस सुसाइड नोट पर उसका  लाईव वीडियो जिसमें उसने अपने आत्महत्या के कारणों के साथ इस कारण में अपनी तथा अपने पत्नी और ससुराल पक्ष के धन लोलुपता, भारतीय न्याय पद्धति के गुण दोष, न्याय और न्यायालय की गतिविधियों का चर्चा करते हुए अपनी प्रताड़ना और अपनी अंतिम इच्छा तक को समाज और न्यायिक तंत्र के समक्ष रखा है.
अतुल सुभाष कोई अकेला प्रताडित नहीं पुरुषों में बढ़ती आत्महत्या इस विषय की गंभीरता इस चर्चा को समाज की जरूरत बना दिया आयोजक संस्था ने इस चर्चा के पीछे जो कारण रखे हैं उसमे समाजिक दायित्व और न्यायिक प्रक्रिया में सुधार की मांग है.
यह कार्यक्रम नगर के श्री दर्शन वेला के सभागार में आयोजित हुआ जिसमें  वरिष्ठ अधिवक्ता सदानन्द सिंह महिला पक्ष विशेष  वरिष्ठ अधिवक्ता महेन्द्र प्रताप सिंह,
दिवानी और फौजदारी   पक्ष से  वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश सिंह  के नेतृत्व में युवा और महिला अधिवक्ताओं का एक पैनल इस चर्चा का हिस्सा रहा वही पत्रकार दीर्घा से इस चर्चा में वरिष्ठ पत्रकारों की संवेदनशील सत्य दृष्टि का नेतृत्व पत्रकार.  पवन कुमार तिवारी के साथ.             पत्रकार बंधुओं की सहभागिता हुयी. प्रबुद्ध दीर्घा में रिटायर पुलिस अधिकारी, समाज सेवी, यूनियन का नेतृत्व करने वाले, समाज के सभी वर्गों के साथ महिला प्रमुखों की भी सहभागिता रही. इस चर्चा में प्रताड़ित भुक्तभोगी यों की  उपस्थित सुनिश्चित कर रही थी की महिला अपने प्रति सामाजिक निष्ठा और न्यायिक अधिकार को अब  वो एक आत्मघाती हथियार की तरह प्रयोग करने की ओर बढ़ चली हैं.
यह चर्चा आत्महत्या से अपनी जीवन लीला समाप्त करने वाले युवा वर्ग की समस्या से जुड़ी रही  जो विवाह और प्रेम की जीवन  प्रथा  को एक कुरीति और भय का नाम दे रही. यह आत्महत्या  उस घटना को सार्वजनिक करती  है  जिसमें मरने वाला अपने  मौत से पूर्व कुछ सवाल अपनी ओर से  छोड़ गया.एक पढ़ा लिखा इंजीनियर काफी ऊंची वेतन भुगतान पाने वाला आखिर किस प्रताड़ना मे था जो इस प्रकार विवश हुआ उसकी न्याय की गुहार क्या  है? यह न्याय पद्धति  कितना न्याय प्रिय है? विशेषाधिकार का दुरुपयोग कितना घातक? आदि  इन सभी विषयों को जोड़ता “अतुल सुभाष की मौत” हत्या, आत्महत्या या न्यायिक दोष “विषय पर यह चर्चा चार सत्र में हुयी पहले सत्र में विषय और घटना परिचय जिसका संचालन सतनाम सिंह( सोशल एक्टिविस्ट) दूसरे सत्र चर्चा नियम और घटना परिचय महिला अधिवक्ता श्वेता सिद्धिदात्री और चर्चा काल का संचालन युवा पत्रकार राजेश गोस्वामी तथा प्रश्न काल का संचालन चर्चा संयोजक चंद्र भूषण मिश्र कौशिक ने किया.

इस संवाद पर चर्चा में “पिता” संस्था के सदस्य, जैसे कुलविंदर सिंह, आनंद, अमित महलका, अजहर अंसारी, योगेंद्र यादव अल्लू, बिजेंद्र सिंह, दिनेश शर्मा, रवनीत सिंह, हमीर शाह,  नीतीश कुमार, प्रवीण यदुवेंदु, प्रिया जैस, राजेश गुप्ता, रीना जी, रुचिका शाह, श्वेता जी, तनवीर अंसारी, तारीक जी, विकास खरवार, विकास आनंद और अन्य सदस्य मौजूद रहे।

जाम में घंटो फसी रही जनता – महाराष्ट्र
खराड़ी से वागोली के बीच रोड पर लगा भयंकर जाम, गणपति विसर्जन में लगा था जाम ,देर से आई प्रशासन भी नही हटा पाई जाम।
जनता बेहाल और विसर्जन की भीड़ सम्हले नही सम्हल रही थी।