पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर हिनौली के सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल में जबरन धन-संग्रह का आरोप

पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर हिनौली के सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल में जबरन धन-संग्रह का आरोप

20 रुपये की ‘पीस रसीद’ देकर 400 रुपये की वसूली, अभिभावकों में भारी नाराज़गी

 

चंदौली। पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर के हिनौली स्थित सेंट मैरी कॉन्वेंट स्कूल पर अभिभावकों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि विद्यालय प्रबंधन द्वारा नाबालिग बच्चों से बिना अनुमति के धन-संग्रह कराया जा रहा है।

 

अभिभावकों का कहना है कि स्कूल ने बच्चों को 20 रुपये की ‘पीस रसीद’ दी, जिसे आधार बनाकर प्रति बच्चा 400 रुपये जमा कराना अनिवार्य कर दिया गया है। इस अनिवार्य वसूली से अभिभावकों में गहरा रोष है, क्योंकि न तो इसकी कोई पारदर्शी जानकारी दी गई और न ही अभिभावकों की अनुमति ली गई।

 

कई अभिभावकों ने आशंका जताई कि इस प्रकार से एकत्र हो रहा धन किस उद्देश्य के लिए उपयोग होगा, यह स्पष्ट नहीं है।

विश्व हिंदू परिषद, चंदौली इकाई ने भी मामले पर आपत्ति जताते हुए जिलाधिकारी को पत्रक सौंपकर उच्चस्तरीय जाँच की मांग की है।

 

प्रशासन से आग्रह किया गया है कि बच्चों की मासूमियत का इस्तेमाल कर इस प्रकार की अनिवार्य धन-वसूली पर तुरंत रोक लगाई जाए।

 

उधर, विद्यालय प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

मानवाधिकार न्यूज़ की ओर से मज़दूरों को समर्पित एक अपील
“फिर से चाहिए 8 घंटे का अधिकार –
मज़दूर न किसी का ग़ुलाम है, न कोई व्यापार!”

आज 1 मई – अंतर्राष्ट्रीय मज़दूर दिवस है। यह वह दिन है जब पूरी दुनिया उन मेहनतकश हाथों को सलाम करती है, जिन्होंने अपने खून-पसीने से दुनिया का निर्माण किया है।
लेकिन आज एक बार फिर वही सवाल खड़ा है –
क्या हमारे मज़दूरों को वह सम्मान, वह अधिकार मिल पा रहे हैं जिसके लिए उन्होंने लड़ाई लड़ी थी?

1886 में अमेरिका के शिकागो में जब मज़दूरों ने 8 घंटे की शिफ्ट के लिए अपनी जानें दीं, तब जाकर यह अधिकार मिला।
मगर आज फिर वही मज़दूर 12 से 18 घंटे काम करने को विवश है –
कम मज़दूरी, ज़्यादा काम, और सम्मान शून्य।

मानवाधिकार न्यूज़ की ओर से हम यह स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं:

8 घंटे का काम मज़दूर का हक़ है, एहसान नहीं।

हर श्रमिक को सामाजिक सुरक्षा, स्वास्थ्य, और काम का सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए।

मज़दूर को कोई ठेके का सामान न समझें – वह भी एक इंसान है, जिसके सपने हैं, परिवार है, और जीने का हक़ है।


आज की सबसे बड़ी ज़रूरत है –
मज़दूरों की आवाज़ को फिर से बुलंद करना।
उनके हक़ के लिए एकजुट होना।

हमारा संकल्प:
“रोटी भी चाहिए, इज़्ज़त भी चाहिए,
इंसान हैं हम – गुलाम नहीं!”

आपका
संजय रस्तोगी
राष्ट्रीय अध्यक्ष – मानवाधिकार न्यूज़