पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर को मिला गोल्ड और सिल्वर मेडल।

पावर लिफ्टिंग चैंपियनशिप में पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर को मिला गोल्ड और सिल्वर मेडल।
दीन दयाल इस्थित आर. एस.फिटनेस जिम में मेहनत करते हुए दो युवाओं ने पावर लिफ्टिंग चैंपेनशिप में जीत हासिल की है।
एक ‘ शुभांकर कुंडू पुत्र सुशील कुमार कुंडू निवासी पटेल नगर’ ने बेंच प्रेस में 140 किलो वजन उठा कर गोल्ड मेडल प्राप्त किया।
दूसरी तरफ दीन दयाल में आर पी एफ कॉलोनी के निवासी ‘ अमन कुमार पुत्र स्व० सुरेश’ ने 90 किलो वजन उठा कर सिल्वर मेडल प्राप्त किया ।
आर. एस.फिटनेस के कोच मोहम्मद राजा जी ने इन दोनों युवाओं को पूरा प्रशिक्षण दिया और कहा कि जो मेहनत करेगा उसको सफलता जरूर मिलेगी, शुभांकर और अमन का पूरा सहयोग जिम की टीम ने मिल कर किया जिसमे शुभम ,अंश,अमन,अभिषेक,और लालू थे ।
युवाओं की जीतने की खुशी सुनते ही जिम में खुशी की लहर दौड़ पड़ी।
जिम में उपस्थित सभी लोगो को प्रोत्साहन मिला और आगे के लिए मेहनत करने के लिए कोच मोहम्मद राजा जी ने भी सबको प्रोत्साहन दिया।

संवाददाता – राहुल मेहानी

अधिकारियों के आदेश को मातहत दिखा रहे ठेगा
चहनियां चन्दौली।
क्षेत्र के प्रभुपुर गावं में अराजी नं0 311पर चकरोड बनवाने के लिए पिड़ित वायुनन्दन त्रिपाठी ने उपजिलाधिकारी व खण्ड विकास अधिकारी के यहा प्रार्थना पत्र देकर गुहार लगाया गया। लेकिन उच्चाधिकारियां के आदेश के बावजूद भी मातहत सचिव व प्रारम्भ कार्य कराना उचित नही समझ रहे है। वही पिड़ित वायुनन्दन ने खण्ड विकास अधिकारी से बार-बार मिलने के पर खण्ड विकास अधिकारी ने दो दिन के अन्दर काम लगवाये जाने का आश्वासन देकर प्रार्थी को शान्त कराया। इस संबंध में तत्कालीन एडीओ पंचायत ने सचिव को कार्य कराने का लिखित आदेश दिया था लेकिन सचिव द्वारा उसे नजर अंदाज करते हुए कार्य कराना उचित नही समझा। ग्राम प्रधान चुनावी रंग में रंग कर आलाधिकारियां के आदेश को ठेगा दिखाते हुए ठंण्डे बस्ते में डाल दिया है। अधिकारियों के आदेश को दो-दिन, चार-दिन करते-करते मातहत सचिव व ग्राम प्रधान दो माह बिता दिए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारियों का आदेश का कितना मातहत पालन करते है। अधिकारियों ढ़ुलमुल रवैया पूर्ण आदेश से तंग आकर पिड़ित आमरण अनशन करने का बाध्य हो गया। वही पिड़ित वायुनन्दन ने आलाधिकारियों चेताते हुए कहा कि अगर जल्द से जल्द कार्य प्रारम्भ नही करवाया तो प्रार्थी आमरण अनशन को बाध्य होगा जिसकी सारी जिम्मेदारी मातहतों की होगी।