चंदन राय की बलिदानी पुण्यतिथि मनायी गयी – चहनियां चंदौली

चंदन राय की बलिदानी पुण्यतिथि मनायी गयी – चहनियां चंदौली त्रिशक्ति सेवा फाउंडेशन द्वारा अमर बलिदान चंदन राय की आठवीं पुण्यतिथि मंगलवार को नदेसर मारूफपुर उनके आवास पर मनाया गया। सर्वप्रथम बलिदान चंदन राय की पुण्य-तिथि व शहिद जवान चंदन राय की प्रतिमा पर माला फूल चढ़ाकर विनम्र भाव से श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। श्रद्धांजलि देते वक्त उपस्थित मुख्य अतिथि स्वतंत्र निदेशक भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड भारत सरकार एवं पूर्व विधान परिषद सदस्य उत्तर प्रदेश शिवनाथ यादव, सुशील सिंह विधायक सैयद राजा, सूर्य मूनी तिवारी वरिष्ठ भाजपा नेता,प्रख्यात नेत्र सर्जन डॉक्टर संजय त्रिपाठी, विजय यादव चैयरमैन, कारगिल युद्ध के अयोध्या योध्दा अजय सिंह रघुवंशी, पूर्व प्रधान सरिद्वार यादव,सहित कयी गणमान्य लोग शहीद जवान चंदन राय की की प्रतिमा पर माला फूल चढ़कर विनम्र भाव से श्रद्धांजलि अर्पित की गयी। वही ग्रामवासी युवा क्षेत्रवासियों ने हजारों की संख्या में जवान चंदन राय बलिदान दिवस पर नारे लग रहे थे कि जब तक सूरज चांद रहेगा तब तक चंदन राय तुम्हारा नाम रहेगा। इस अवसर पर संस्कृति कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया था।शहीद परिवार का सम्मान मेधवी छात्र-छात्राओं का सम्मान के साथ जरूरमंद लोगों में कंबल का भी वितरण किया गया।

सीता हरण के दौरान जटायु व रावण का भंयकर युद्ध लीला का हुआ मंचनचहनियां चन्दौली। क्षेत्र स्थित कल्यानपुर सेवा समिति के तत्वाधान में चल रहे रामलीला मंचन के यह सातवें दिन रविवार रात में शुरुआत में प्रभु श्रीराम की आरती के साथ के साथ प्रारम्भ किया गया। रामलीला के सातवें दिन रावण ने माता सीता का हरण कर लिया और पुष्पक विमान से वह लंका ले जाने लगा। जिसपर माता सीता की करूण विलाप सुनकर गिद्धराज जटायु ने अपने मित्र की पुत्र बधु सीता को बचाने के लिए रावण से युद्ध करने लगा बड़ी भयंकर युद्ध हुआ रावण जटायु की मार को सहन न कर सका और क्रुद्ध होकर भगवान शिव द्वारा प्राप्त चन्द्रहासं खड्ग से जटायु पर वार कर दिया जिसमें जटायु का एक पंख कट गया लेकिन उसके बावजूद भी युद्ध नही थमा तब तक रावण ने दूसरा वार कर दिया। जिसमें जटायू का दूसरा पंख भी काट दिया जिससे आकाश से गिरकर जटायू गंभीर रूप से घायल हो गये। जब प्रभु श्रीराम व लक्षमण अपनी भार्या सीता को जंगल-वन-पहाड़ां से घुमते-घुमते रास्ते में गिरे जटायू से होती है तो जटायू ने पूरा वृतान्त प्रभु श्रीराम को सुनाया और अपना प्राण दिया। जिस पर प्रभु श्रीराम ने अपने पिता के मित्र की पुत्र बनकर अन्त्येष्टि कर सीता माता की खोज करने लगे। इस दौरान अवधेश चौबे व्यास, अरुण कुमार, जयप्रकाश चौबे, मारकंडे पांडे, अशोक कुमार, घनश्याम सिंह, शमशेर सिंह, अजय चौबे, मनोज चौबे, प्रमोद चौबे, राकेश चौबे, केसर यादव, बबलू यादव, अनुज चौबे, त्रिलोक, टुनटुन, हिमांशु, इत्यादि सैकड़ों कार्यकर्ता व भक्त उपस्थित थे।