भागवत ज्ञान यज्ञ का कथा सुनने से होती है मोक्ष की प्राप्ति उपेंद्रनाथ भारद्वाज- चहनियां चंदौली

भागवत ज्ञान यज्ञ का कथा सुनने से होती है मोक्ष की प्राप्ति उपेंद्रनाथ भारद्वाज- चहनियां चंदौली

क्षेत्र स्थित फुलवरिया गांव में माता शुभांगी देवी तथा तस्य पुत्र श्री बाबा श्री राम अवतार ब्रह्म् जी के 14वां वार्षिक श्रृंगार महोत्सव के अवसर पर भागवत ज्ञान यज्ञ आयोजन किया गया था। जो कि 17 फरवरी 2026 दिन मंगलवार को कथा का समापन किया गया। इसी क्रम में कथा वाचक व्यास उपेंद्रनाथ भारद्वाज ने श्री कृष्ण जन्म की वर्णन करते हुए उनके बाल लीलाओं की विस्तृत व्याख्या करते हुए बताया कि जब-जब पृथ्वी पर पापों का अत्याचार बढ़ता है तब -तब पृथ्वी पर भगवान किसी ने किसी रूप में भगवान जन्म लेते हैं। उन्होंने कहा कि भागवत ज्ञान यज्ञ कथा श्रवण करने से प्राणियों की मौक्ष प्राप्त हो जाती है। कलयुग में भागवत ज्ञान यज्ञ कथा मोक्ष प्राप्ति का सबसे उत्तम व सरल रास्ता है। जो भी श्रोता भागवत कथा स्मरण करता है या सुनता है कि सारे पाप निष्फल हो जाते हैं। और वह उत्तम फल प्राप्त कर मोक्ष प्राप्त करता है। वहीं उपस्थित हृदय नारायण उपाध्याय, रामसेवकउपाध्याय, जितेंद्र उपाध्याय जितेंद्र उपाध्याय, डॉ अजय उपाध्याय, मोहन चंद उपाध्याय,घुराराम प्रधान, पारस उपाध्याय, अवधेश, सैकड़ो कार्यकर्ता व भक्त गण उपस्थित थे।

चंदौली पी डी डी यू नगर! पब्लिक इंटरेस्ट थिंकर्स असेंबली” पिता” संस्था  द्वारा प्रताड़ित पतियों पर संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस चर्चा के केंद्र में था बेंगलुरु में  अतुल सुभाष  नामक एक इंजीनियर द्वारा लिखा सुसाइड नोट और उस सुसाइड नोट पर उसका  लाईव वीडियो जिसमें उसने अपने आत्महत्या के कारणों के साथ इस कारण में अपनी तथा अपने पत्नी और ससुराल पक्ष के धन लोलुपता, भारतीय न्याय पद्धति के गुण दोष, न्याय और न्यायालय की गतिविधियों का चर्चा करते हुए अपनी प्रताड़ना और अपनी अंतिम इच्छा तक को समाज और न्यायिक तंत्र के समक्ष रखा है.
अतुल सुभाष कोई अकेला प्रताडित नहीं पुरुषों में बढ़ती आत्महत्या इस विषय की गंभीरता इस चर्चा को समाज की जरूरत बना दिया आयोजक संस्था ने इस चर्चा के पीछे जो कारण रखे हैं उसमे समाजिक दायित्व और न्यायिक प्रक्रिया में सुधार की मांग है.
यह कार्यक्रम नगर के श्री दर्शन वेला के सभागार में आयोजित हुआ जिसमें  वरिष्ठ अधिवक्ता सदानन्द सिंह महिला पक्ष विशेष  वरिष्ठ अधिवक्ता महेन्द्र प्रताप सिंह,
दिवानी और फौजदारी   पक्ष से  वरिष्ठ अधिवक्ता ज्ञान प्रकाश सिंह  के नेतृत्व में युवा और महिला अधिवक्ताओं का एक पैनल इस चर्चा का हिस्सा रहा वही पत्रकार दीर्घा से इस चर्चा में वरिष्ठ पत्रकारों की संवेदनशील सत्य दृष्टि का नेतृत्व पत्रकार.  पवन कुमार तिवारी के साथ.             पत्रकार बंधुओं की सहभागिता हुयी. प्रबुद्ध दीर्घा में रिटायर पुलिस अधिकारी, समाज सेवी, यूनियन का नेतृत्व करने वाले, समाज के सभी वर्गों के साथ महिला प्रमुखों की भी सहभागिता रही. इस चर्चा में प्रताड़ित भुक्तभोगी यों की  उपस्थित सुनिश्चित कर रही थी की महिला अपने प्रति सामाजिक निष्ठा और न्यायिक अधिकार को अब  वो एक आत्मघाती हथियार की तरह प्रयोग करने की ओर बढ़ चली हैं.
यह चर्चा आत्महत्या से अपनी जीवन लीला समाप्त करने वाले युवा वर्ग की समस्या से जुड़ी रही  जो विवाह और प्रेम की जीवन  प्रथा  को एक कुरीति और भय का नाम दे रही. यह आत्महत्या  उस घटना को सार्वजनिक करती  है  जिसमें मरने वाला अपने  मौत से पूर्व कुछ सवाल अपनी ओर से  छोड़ गया.एक पढ़ा लिखा इंजीनियर काफी ऊंची वेतन भुगतान पाने वाला आखिर किस प्रताड़ना मे था जो इस प्रकार विवश हुआ उसकी न्याय की गुहार क्या  है? यह न्याय पद्धति  कितना न्याय प्रिय है? विशेषाधिकार का दुरुपयोग कितना घातक? आदि  इन सभी विषयों को जोड़ता “अतुल सुभाष की मौत” हत्या, आत्महत्या या न्यायिक दोष “विषय पर यह चर्चा चार सत्र में हुयी पहले सत्र में विषय और घटना परिचय जिसका संचालन सतनाम सिंह( सोशल एक्टिविस्ट) दूसरे सत्र चर्चा नियम और घटना परिचय महिला अधिवक्ता श्वेता सिद्धिदात्री और चर्चा काल का संचालन युवा पत्रकार राजेश गोस्वामी तथा प्रश्न काल का संचालन चर्चा संयोजक चंद्र भूषण मिश्र कौशिक ने किया.

इस संवाद पर चर्चा में “पिता” संस्था के सदस्य, जैसे कुलविंदर सिंह, आनंद, अमित महलका, अजहर अंसारी, योगेंद्र यादव अल्लू, बिजेंद्र सिंह, दिनेश शर्मा, रवनीत सिंह, हमीर शाह,  नीतीश कुमार, प्रवीण यदुवेंदु, प्रिया जैस, राजेश गुप्ता, रीना जी, रुचिका शाह, श्वेता जी, तनवीर अंसारी, तारीक जी, विकास खरवार, विकास आनंद और अन्य सदस्य मौजूद रहे।