जिला राइफल क्लब *वाराणसी* से अपना सफर शुरू करने वाले *विशाल विश्वकर्मा* ने *ISSF ‘B’ Judges Course (राइफल/पिस्टल)* सफलतापूर्वक पूर्ण कर बनारस के पहले ISSF ‘B’ (राइफल/पिस्टल) प्रमाणित जज* बनने का गौरव हासिल किया है।

जिला राइफल क्लब *वाराणसी* से अपना सफर शुरू करने वाले *विशाल विश्वकर्मा* ने *ISSF ‘B’ Judges Course (राइफल/पिस्टल)* सफलतापूर्वक पूर्ण कर बनारस के पहले ISSF ‘B’ (राइफल/पिस्टल) प्रमाणित जज* बनने का गौरव हासिल किया है।

 

*इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फेडरेशन ने दिया प्रमाण पत्र*

इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट्स फेडरेशन *ISSF* ने राष्ट्रीय राइफल संघ *NRAI* के तत्वावधान में 20 से 24 जून 2026 तक नई दिल्ली में आयोजित इस प्रतिष्ठित कोर्स में विशाल विश्वकर्मा को *राइफल/पिस्टल* में दक्षता प्रमाण पत्र प्रदान किया।

 

*15 साल का सफर, वाराणसी से लखनऊ तक*

विशाल ने बताया कि उन्होंने लगभग *15-16 वर्ष पूर्व* वाराणसी जिला राइफल क्लब से निशानेबाजी शुरू की थी। परिवार के *अटूट सहयोग* के दम पर वे आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं। वर्तमान में वे *जी.डी. गोयनका स्कूल, लखनऊ* में शूटिंग कोच के पद पर कार्यरत हैं। साथ ही वे *नेशनल राइफल संघ के आजीवन सदस्य और *उत्तर प्रदेश राज्य राइफल संघ की टेक्निकल कमेटी के सदस्य* भी हैं।

 

विश्वस्तरीय गुरुओं से मिली सीख

इस कोर्स में उन्हें ग्रेट ब्रिटेन के पॉल गम्न सर, फ्रांस की घिसलेन ब्रेज मैम, भारत के धीरज कुमार सिंह सर एवं अरुण वेरेशी सर जैसे विश्वप्रसिद्ध प्रशिक्षकों से प्रशिक्षण मिला।

 

‘यह सम्मान पूरे बनारस क्षेत्र का है’

विशाल ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने *माता पिता, परिवार के सदस्य, गुरुजनों और मित्रगण* को दिया। साथ ही उन्होंने *उत्तर प्रदेश राज्य राइफल संघ* और *नेशनल राइफल संघ* के सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।

विद्यालय में जर्जर पीपल का पड़ टूटी चहारदिवारी से खतराजागरण संवादाता चहनिया चन्दौली।क्षेत्र स्थित कम्पेजिट विद्यालय लक्षमनगढ़ में विद्यालय की चहार दिवारी गुणवत्ता विहीन बनने के कारण जगह-जगह टूट कर क्षतिग्रस्त हे गयी। साथ विद्यालय प्रागण से सअे विशालकाय जर्जर पीपल का पेड़ भारी दुर्घटना को दावत दे रहा है। इतनी बड़ी गम्भीर समस्या से विद्यालय सबंधित अध्किारी, ग्राम प्रधान जिले के अधिकारी मौन साधे हुए है।गौरतलब तो यह है कि प्रायः बच्चे विद्यालय के प्रागण में ख्ेलते नजर आते है और चहारदिवारी अूटी होने के कारण वह कब विद्यालय से बाहर हो जायेगे इसका किसी को अंदाजा नही रहता। इतना ही बलिक बच्चे खेलते-खेते उसी विशालकाय जर्जर पीपल के बृक्ष के नीचे आकर बैठ जाते है और वह पेड़ कब गिर जायेगा इसे कोई नही बता सकता। जबकि इस वर्ष पेड़ काफी पुराना होने के कारण भयंकर वारिष व तेज हवा के कारण वह 75अंश के कोण पर आकर टिका हुआ वह कब जमीदोज हो जायेगा यह भगवान भरोसे ही है। जबकि गौर करे तो विद्यालय प्रांगण में अगर बारिश हो जाय तो जलजमाव का होना तय है। वही ग्रामीणां सहित गाव के सम्भ्रान्तां का कहना है कि शिक्षा के विभाग के आलाधिकारी तत्काल मामले को गम्भीरता से लेते हुए जर्जर पीपल को कटवाते हुए टूटी हुई चहारदिवारी को अविलम्ब बनवाये जाने की मांग की है। ताकि समय रहते भारी घटना को रोका जा सके। इस संदर्भ में एबीएस सुरेन्द्र सहाय ने बताया मामला संज्ञान में नही जाचं कर आवश्यक कार्रवाई की जायेगी।