श्रीमदभागवत कथा का ज्ञान कल्प वृक्ष समान-अखिलानन्द चहनिया चन्दौली।

श्रीमदभागवत कथा का ज्ञान कल्प वृक्ष समान-अखिलानन्द
चहनिया चन्दौली।
क्षेत्र के कल्यानपुर गाव में जयराम चौबे के अहाते में सात द्विवसीय श्रीमदभागवत कथा ज्ञान सप्ताह के तिसरे दिन श्रीश्री अखिलानन्द महाराज जी ने मंगलाचरण की विस्तृत व्याख्या करते बताया कि किसी भी शुभ कार्य करने से पूर्व उस कार्य का मंलाचरण किया जाता है। ताकि मंगलाचरण होने के उपरात सब प्रकार के गलती का दोष पाप सब कुछ मिट जाता है। जो भी कार्य किया जाय उस कार्य से मंगलमय होता है। मंगलाचरण में किसी भी देवी, देवता नही होते बस केवल जीव के अराध्य देव की अराधना कर उन्ही के उपर सब कुछ छोड़ दिया जाता है यही मंगलाचरण का मूल उद्देश्य है। वही श्रीश्री अखिलान्नद महाराज ने श्रीमद् भागवत कथा का व्याख्यान करते हुए बताया कि यह किताब नही है यह किताब का पन्ना नही है। यह जीव के जीवन में कल्प वृक्ष समान है। इसके श्रवण मात्र से मनुष्य सात जन्मो के पाप से मुक्त हो जाता है और उसके जीवन का उद्धार हो जाता है। इस पुराण में संस्कार, संस्कृति, सभ्यता सहित राष्ट्र निर्माण करने में अचुक ताकत रखती है। धर्म सम्राट महाराज परिक्षित के पास पांच शुद्धियां थी जिसमें मातृ शुद्धि, पितृ शुद्धि, वंश शुद्धि, अन्न शुद्धि, जल शुद्धि क्योकि माता के संस्कार स्वरूप ही पुत्र में संस्कार आता है और उनके उपर ही भगवान की कृपा हेाती है। माता-पिता ही पुत्र पुत्रादि के प्रथम गुरू होते है। माता द्वारा दिए गये ज्ञान के फलस्वरूप ही पुत्र में स्ंास्कार, धर्मपरायणता, ईमानदारी, सेंवाभाव परापकार जैसी भावनाए उत्पन्न होती है। जिससे जीव अपने जीवन में कभी भी अमर्यादित होता है। कथा में मुख्य यजमान रूवरूप जयराम चौबे, ईश्वरदत्त चौबे, सीमा चौबे रहे। इस दौरान गौरीश्ंाकर, विजय श्ंाकर, आलोक, महेन्द्र, ंसतोष, देवी प्रसाद, विजय लाल यादव, रविप्रकाश, देव प्रकाश, देवमूरत, सत्य प्रकाश, जमुना प्रसाद सहित सैकड़ों भागवत कथा प्रेमी उपस्थित रहे। कथा अंत में नारायण जी की आरती के फलस्वरूप लोगो में प्रसाद का वितरण किया गया चारो तरफ हर-हर महादेव, जयश्रीराम के गगनभेदी उद्घोष से पूरा पांडाल सहित क्षेत्र भक्तिमय बन गया।