घने कुहरे व बर्फीली हवाओं से ठंड में इजाफा चहनिया चंदौली 

घने कुहरे व बर्फीली हवाओं से ठंड में इजाफा चहनिया चंदौली

क्षेत्र में शनिवार की सुबह से घना कोहरा छाए रहने से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। बर्फीली हवाएं चलने से ठंड के बाद अब कोहरे की बढ़ती तीव्रता ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। सुबह के समय दृश्यता बेहद कम होने के कारण आवाजाही प्रभावित हो रहा है।

घने कोहरे का सबसे अधिक असर स्कूल जाने वाले छात्रों और स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। सुबह के समय सड़कों पर कुछ ही दूरी पर दिखाई देना मुश्किल हो जा रहा है, जिससे बच्चों और अभिभावकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, कोहरे के कारण सड़कों पर वाहनों की रफ्तार काफी धीमी हो गई है, जिससे यातायात प्रभावित हुआ है।

कोहरे और ठंड की वजह से लोग देर सुबह तक अपने घरों में ही रहने को मजबूर हैं। दैनिक कार्यों और व्यापार पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, पूर्वांचल के कई जनपदों में ठंड के साथ-साथ घना कोहरा छाया हुआ है। वाराणसी मंडल के अंतर्गत आने वाले जिलों में आगामी तीन से चार दिनों तक घने कोहरे की स्थिति बने रहने की संभावना है। इस दौरान ठंड और गलन में और बढ़ोतरी हो सकती है। बढ़ती ठंड और गलन को देखते हुए क्षेत्रीय लोगों ने प्रशासन से चट्टी-चौराहों और सार्वजनिक स्थानों पर अलाव जलवाने की मांग की है, ताकि जरूरतमंदों और राहगीरों को राहत मिल सके।

धनुष टूटने का दृश्य देख दर्शक हुए गदगद -शेरवां खखडा गांव में आयोजित श्री राम कथा केतिसरे दिन शुक्रवार की कथा वाचक पंडित मंगलम दीप महाराज कथा में बतलाया कि शिव धनुष टूटते ही चारों तरफ हर-हर महादेव व जय श्रीराम के नारे से पूरा पांडाल सहित गांव गुजायमान हो गया। इस दौरान राजा जनक के सीता स्वयंवर के लिये रखे गये शर्त को जब कोई राजा, देव-दानव-मानव पूरा नही कर पाए तब महाराज जनक निराश हो गये और उन्होने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि मैं यह समझता कि यहां कोई भी वीर पुरूष नही सभी का-पुरूष ही का-पुरूष है। तो मैं अपनी बेटी के लिए एेंसा शर्त नही रखता। स्वयंर देखने के उद्देश्य से पहुचे लक्षमण तुरन्त ही उनको बातों से कुद्ध होकर कहे महाराज जनक रघुवंशियो के समक्ष इस तरह के शब्द बोलने का किसी को कोई अधिकार नही यह धनुष क्या चीज है अगर बड़े भैया का आदेश हो तो मैं पूरी पृथ्वी को गेद तरह उठाकर पटक कई टुकड़े कर दूं। जिस पर गुरू विश्वामित्र व प्रभुराम ने लक्षमण को समझाते हुए शान्त करवाया और महाराज जनक की निराशा को आशा में तब्दील करते हुए शुभ-मुहुर्त में विश्वामित्र के आदेशानुसार प्रभु श्रीराम ने धुनष पर तमंचा चढ़ाने गये और तमंचा चढ़ाते ही वह टूट गया। धनुष के टूटते ही चारो तरफ हर-हर महादेव, व जय श्रीराम के नारे से पूरा गांव सहित पंडाल गुजायमान हो गया। इस दौरान कथा में उपस्थित मंगल मिश्रा, सूर्य बली यादव, चंद्रभूषण त्रिपाठी, वशिष्ठ नरायण त्रिपाठी,बिशाल,मनोहर, अशोक मिश्रा, सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

नई सड़क सैदपुर गाजीपुर में पुल के नीचे 45 वर्ष पुरुष को अज्ञात लोगो ने जान से मारने की कोशिश की। तत्काल प्रशासन मौके पर पहुंची तब तक बदमाश लोग भाग चुके थे,पीड़ित को तत्काल नजदीक के हॉस्पिटल ले कर जाया गया। संवाददाता – मनीष गुप्ता

मनुष्य के हृदय में होता है भगवान का वास-पंडित शक्ति मुगलसराय चन्दौली तारा जीनपुर क्षेत्र स्थित सहरोई गांव में विगत पांच वर्षों की भांति इस वर्ष भी श्री हनुमान जयंती के पावन अवसर नवयुवक मंगल दल सहरोई के तत्वाधान में सप्त दिवसीय संगीमय श्रीराम कथा का आयोजन किया गया है। कथा के दूसरे दिन पंडित शक्ति तिवारी ने नारायण के दिव्य अवतार को समझाते हुए कहा की भगवान का अवतार प्रत्येक मनुष्य के हृदय वेश में होता है। अवतार को समझाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान अपनी भावना को छोड़कर के धेनु, सुर, संत, हित में लिन्ह, मनुज अवतार भगवान ब्राह्मणों के गाय माता, के और संतों के हितों के लिये धरती पर मनुष्य का शरीर धारण करके आते हैं। इसी को समझाते हुए भगवान के बाललीला का भी वर्णन किया और उन्होंने बतलाया की चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ एक पुत्र के लिए रो रहे थे और गुरु वशिष्ट के द्वारा श्रृंगी ऋषि के पुत्र प्राप्ति यज्ञ करने से तुमको चार-चार पुत्रों की प्राप्त हुयी। इसी के बाद चारों पुत्रों का नामांकरण गुरु वशिष्ट के द्वारा करवाते हुए इन्होंने बतलाया की विश्वामित्र जो की महान ऋषि थे। असुरों का समूह जब उन्हें सताया तो उन्हें भी भगवान को मांगने की जरूरत पड़ी और विश्वामित्र सनाथ हुये और भगवान वन में तारकासुर का एक ही बाण में बध कर दिये। मारीच व सुबाहु को अग्निबाण से यज्ञ की रक्षा की। इस दौरान सैकड़ां लोगो का जन सैलाब उमड़ा रहा। कार्यकर्ता राहुल मिश्रा, अमित मिश्रा, रोहित, पवन, शिशु मिश्रा, विराट, उमेश, महानंद, दिनेश, शुभम, गोलू, तबला वादक अनिल तिवारी, सैकड़ां श्रद्धालु उपस्थित रहे।