मकर सक्रांति, मौनी अमावस्या को लेकर हुई बैठक चहनियां चन्दौलीं

मकर सक्रांति, मौनी अमावस्या को लेकर हुई बैठक चहनियां चन्दौलीं

उपजिलाधिकारी के निर्देश पर मंगलवार को बलुआ स्थित पश्चिम वाहिनीं गंगा तट पर मकर सक्रांति व मौनी अमावस्या को लेकर तहसीलदार सकलडीहा संदीप श्रीवास्तव, क्षेत्राधिकारी सकलडीहा स्नेहा तिवारी के नेतृत्व में सभी विभागों संग बैठक किया गया। जिसमें सभी विभागों को अलग अलग जिम्मेदारी दी गयी। बैठक में स्नान के दौरान पुलिस प्रशासन, एंटी रोमियो, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ को चुस्त दुरुस्त व्यवस्था के साथ रहने को निर्देशित किया गया। वही जिला पंचायत को प्रकाश की व्यवस्था, महिला वस्त्र बदलने का कक्ष, खोया पाया केंद्र, रैन बसेरा, पीडब्ल्यूडी विभाग को पानी के अंदर और बाहर बैरिकेटिंग, जिला पंचायत राज अधिकारी को साफ सफाई, खण्ड विकास अधिकारी कैमरे, वन विभाग को अलाव, स्वास्थ्य विभाग को एम्बुलेंस, स्ट्रेक्चर, स्टाफ ड्यूटी, जलनिगम विभाग को पानी की व्यवस्था, बिजलीं विभाग को 15से 18जनवरी तक चौबीस घण्टे बिजलीं की सप्लाई, सिचाई विभाग, पूर्ति विभाग आदि विभागीय अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई। इस दौरान अधिकारीद्वय क्षेत्राधिकारी स्नेहा तिवारी ने कहा कि मौनी अमावस्या और मकर सक्रांति स्नान पर किसी प्रकार से शृद्धालुओं को परेशानी न हो। किसी भी प्रकार की कोई गलती हुई तो विभागीय अधिकारी जिम्मेदार होंगे। इस दौरान जिला पंचायत राजस्व अधिकारी सतीश सिंह, पीडब्ल्यूडी एई शैलेन्द्र सिंह, पूर्ति अधिकारी ममता सिंह, बिजलीं विभाग जेई सुभाष यादव, स्वास्थ्य विभाग रौशन आरा, सिचाई विभाग सुशांत श्रीवास्तव, वन रेंजर राम सवारे यादव, बृजेश कुमार, मनोज सिंह, राजेश पासवान, पंकज यादव आदि उपस्थित रहे।

भगवान भास्कर के जयकारे से गूजायमान हुई अध्यात्मिक नगरीरामनगर वाराणसीविन्ध्य पर्वत के तलहटी में भगवान भोले नाथ की त्रिशूल पर वसी नगरी वाराणसी में चार द्विवसीय डाला छठ बड़े ही धूॅमधाम के साथ मनाया गया। मॉ भगवती गंगा के दोनां तटां अध्यात्मिक नगरी तो दुसरी तरफ रामनगर के राजा का किला स्थित है। अस्सी घाट से लेकर राजघाट तक व रामनगर से लेकर पड़ाव डोमरी तक हजारां नर नारी भगवान भास्कर के महापर्व को पूर्ण करने में लगे रहे। जिसके क्रम में मंगलवार की अल सुबह ही व्रतियो ने मॉं गंगा के तट पर पहुच कर उदयाचल भगवान भास्कर को अर्ध्य दिया। जैसे भगवान भास्कर की किरणे मां गंगा के स्पर्श की कि चारों तरफ भगवान भास्कर व छठी मइया के गगन भेदी जयकारे से पूरा क्षेत्र गूजायमान हो गया और इसी अर्ध्य के साथ भगवान भास्कर महापर्व समाप्त हो गया।

धनुष टूटने का दृश्य देख दर्शक हुए गदगद -शेरवां खखडा गांव में आयोजित श्री राम कथा केतिसरे दिन शुक्रवार की कथा वाचक पंडित मंगलम दीप महाराज कथा में बतलाया कि शिव धनुष टूटते ही चारों तरफ हर-हर महादेव व जय श्रीराम के नारे से पूरा पांडाल सहित गांव गुजायमान हो गया। इस दौरान राजा जनक के सीता स्वयंवर के लिये रखे गये शर्त को जब कोई राजा, देव-दानव-मानव पूरा नही कर पाए तब महाराज जनक निराश हो गये और उन्होने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि मैं यह समझता कि यहां कोई भी वीर पुरूष नही सभी का-पुरूष ही का-पुरूष है। तो मैं अपनी बेटी के लिए एेंसा शर्त नही रखता। स्वयंर देखने के उद्देश्य से पहुचे लक्षमण तुरन्त ही उनको बातों से कुद्ध होकर कहे महाराज जनक रघुवंशियो के समक्ष इस तरह के शब्द बोलने का किसी को कोई अधिकार नही यह धनुष क्या चीज है अगर बड़े भैया का आदेश हो तो मैं पूरी पृथ्वी को गेद तरह उठाकर पटक कई टुकड़े कर दूं। जिस पर गुरू विश्वामित्र व प्रभुराम ने लक्षमण को समझाते हुए शान्त करवाया और महाराज जनक की निराशा को आशा में तब्दील करते हुए शुभ-मुहुर्त में विश्वामित्र के आदेशानुसार प्रभु श्रीराम ने धुनष पर तमंचा चढ़ाने गये और तमंचा चढ़ाते ही वह टूट गया। धनुष के टूटते ही चारो तरफ हर-हर महादेव, व जय श्रीराम के नारे से पूरा गांव सहित पंडाल गुजायमान हो गया। इस दौरान कथा में उपस्थित मंगल मिश्रा, सूर्य बली यादव, चंद्रभूषण त्रिपाठी, वशिष्ठ नरायण त्रिपाठी,बिशाल,मनोहर, अशोक मिश्रा, सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।