दो द्विवसीय विधायक खेल स्पर्धा का हुआ समापन चहनिया चन्दौली

दो द्विवसीय विधायक खेल स्पर्धा का हुआ समापन
चहनिया चन्दौली
युवा कल्याण एवं प्रादेशिक विकास दल विभाग द्वारा आयोजित उत्तर प्रदेश ग्रामीण खेल लीग के अंतर्गत दो दिवसीय माननीय विधायक खेल स्पर्धा विधानसभा सकलडीहा के दूसरे दिन के खेल का आयोजन चहनियां स्थित खण्डवारी देवी इंटर कालेज के फील्ड पर रविवार को सम्पन्न हुआ। रविवार को सबजूनियर, जूनियर एवं सीनियर कैटेगरी में कुश्ती, जूडो, बैडमिंटन, फुटबॉल एवं भारोत्तोलन का आयोजन हुआ। रविवार के खेल में फुटबॉल जूनियर बालक वर्ग में एनटीएश स्पोटिंग विजेता एवं चहनिया फुटबॉल क्लब उपविजेता रही। सब जूनियर बालक वर्ग फुटबॉल में नौदर विजेता और के.फ.सी चहनिया उपविजेता रही। बैडमिंटन सबजूनियर अकल बालक में शाबीर प्रथम, शिवम् द्वितीय एवं जूनियर बैडमिंटन अकल बालक में आनंद चौहान प्रथम, आदित्य कुमार द्वितीय तथा युगल में आनन्द व शमीम प्रथम, मनीष व अंशनारायण द्वितीय रहे। सब जूनियर कुश्ती 55किलो में सूरज प्रथम, अर्पित कुमार यादव द्वितीय, जूनियर कुश्ती 57किलो में शुभम यादव प्रथम, अभिषेक कुमार द्वितीय, आर्यन तृतीय रहे। इस अवसर पर क्षेत्रीय युवा कल्याण अधिकारी राजन यादव, रजनीश पांडेय, राहुल वर्मा, खेल शिक्षक सुशील पांडेय, रवींद्र सिंह, खेल अनुदेशक वैशाली, गौतम लाल, प्रियंका यादव, नीलम यादव, परमानंद यादव, शतेंद्र कुमार सिंह, तपेश्वर वकील, जयप्रकाश और ब्लॉक व्यायाम शिक्षक प्रवीण कुमार त्रिपाठी एवं प्रदीप, विजय उपस्थित रहे। खेल का संचालन अनीस सिंह ने किया।

सीता हरण के दौरान जटायु व रावण का भंयकर युद्ध लीला का हुआ मंचनचहनियां चन्दौली। क्षेत्र स्थित कल्यानपुर सेवा समिति के तत्वाधान में चल रहे रामलीला मंचन के यह सातवें दिन रविवार रात में शुरुआत में प्रभु श्रीराम की आरती के साथ के साथ प्रारम्भ किया गया। रामलीला के सातवें दिन रावण ने माता सीता का हरण कर लिया और पुष्पक विमान से वह लंका ले जाने लगा। जिसपर माता सीता की करूण विलाप सुनकर गिद्धराज जटायु ने अपने मित्र की पुत्र बधु सीता को बचाने के लिए रावण से युद्ध करने लगा बड़ी भयंकर युद्ध हुआ रावण जटायु की मार को सहन न कर सका और क्रुद्ध होकर भगवान शिव द्वारा प्राप्त चन्द्रहासं खड्ग से जटायु पर वार कर दिया जिसमें जटायु का एक पंख कट गया लेकिन उसके बावजूद भी युद्ध नही थमा तब तक रावण ने दूसरा वार कर दिया। जिसमें जटायू का दूसरा पंख भी काट दिया जिससे आकाश से गिरकर जटायू गंभीर रूप से घायल हो गये। जब प्रभु श्रीराम व लक्षमण अपनी भार्या सीता को जंगल-वन-पहाड़ां से घुमते-घुमते रास्ते में गिरे जटायू से होती है तो जटायू ने पूरा वृतान्त प्रभु श्रीराम को सुनाया और अपना प्राण दिया। जिस पर प्रभु श्रीराम ने अपने पिता के मित्र की पुत्र बनकर अन्त्येष्टि कर सीता माता की खोज करने लगे। इस दौरान अवधेश चौबे व्यास, अरुण कुमार, जयप्रकाश चौबे, मारकंडे पांडे, अशोक कुमार, घनश्याम सिंह, शमशेर सिंह, अजय चौबे, मनोज चौबे, प्रमोद चौबे, राकेश चौबे, केसर यादव, बबलू यादव, अनुज चौबे, त्रिलोक, टुनटुन, हिमांशु, इत्यादि सैकड़ों कार्यकर्ता व भक्त उपस्थित थे।