जर्जर चहारदिवारी दे रही दुर्घटना को दावत  – चाहनिया चंदौली

जर्जर चहारदिवारी दे रही दुर्घटना को दावत

चहनिया चन्दौली।

क्षे त्र के हदयपुर गांव में कम्पोजिट विद्यालय की बाउन्ड्रीवाल बिगत तीन माह से गिरी पड़ी हुई और कुछ चहारदिवारी लटकी हुई है जिससे कभी भी बच्चों के साथ भारी घटा सकती है। विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने इसकी सूचना विभाग में दे दी है लेकिन विभागीय कार्यवाही की लचर व्यवस्था के चलते स्थित भयावह बनी हुई है। जबकि शासन द्वारा सख्त निर्देश जारी किया गया है कि समस्त प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों का कायाकल्प किया जाय लेकिन सरकार के आदेश को मातहत कर्मचारी व ग्राम प्रधानों द्वारा अनसुना कर दिया जा रहा है। जो अध्यापको के लिए सिरदर्द बना हुआ क्रूो जब मध्यान भोजन हेतु बच्चों को छोड़ा जाता तो दो अध्यापक बच्चों की निगरानी में लगे रहते है बच्चे पठन-पाठन के दौरान हमेशा भाग जाया करते जैसे पता चला यह बच्चा आया और कक्षा में नही है तो अध्यापक किसी अनहोनी को लेकर उसे ढ़ूढने लगता है। वही अभिभावकों ने तत्काल चहारदिवारी निर्माण करवाये जाने की मांग की है। वही इस सबंध में विकास खण्ड अधिकारी का कहना है कि मामला मेरे संज्ञान मे ंनही अगर ऐसा तो जांच करवाकर कार्यवाही की जायेगी।

भगवान भास्कर के जयकारे से गूजायमान हुई अध्यात्मिक नगरीरामनगर वाराणसीविन्ध्य पर्वत के तलहटी में भगवान भोले नाथ की त्रिशूल पर वसी नगरी वाराणसी में चार द्विवसीय डाला छठ बड़े ही धूॅमधाम के साथ मनाया गया। मॉ भगवती गंगा के दोनां तटां अध्यात्मिक नगरी तो दुसरी तरफ रामनगर के राजा का किला स्थित है। अस्सी घाट से लेकर राजघाट तक व रामनगर से लेकर पड़ाव डोमरी तक हजारां नर नारी भगवान भास्कर के महापर्व को पूर्ण करने में लगे रहे। जिसके क्रम में मंगलवार की अल सुबह ही व्रतियो ने मॉं गंगा के तट पर पहुच कर उदयाचल भगवान भास्कर को अर्ध्य दिया। जैसे भगवान भास्कर की किरणे मां गंगा के स्पर्श की कि चारों तरफ भगवान भास्कर व छठी मइया के गगन भेदी जयकारे से पूरा क्षेत्र गूजायमान हो गया और इसी अर्ध्य के साथ भगवान भास्कर महापर्व समाप्त हो गया।

प्रभु श्रीराम की बारात का मंचन देख दर्शक हुए गदगद चहनिया चन्दौली। क्षेत्र स्थित कल्यानपुर सेवा समिति के तत्वाधान में चल रहे रामलीला मंचन के चौथे दिन बृहस्पतिवार रात में शुरुआत में प्रभु श्रीराम की आरती के साथ शुभारम्भ किया गया। धनुष टूटते ही राजा जनक के राजपुरोहित शतानंद जी क आदेशानुसार अयोध्या में खबर भेजवाया गया और वहा से बारात सज-धजकर मिथिला के रवाना हो गई। बारात में दर्जनों घोड़ा, हाथी, ऊट, कई जोड़ बैण्ड बाजा के साथ हजारों बाराती बारात की शोभ बढ़ा रहे थे। जो आक्रषण का केन्द्र बना रहा।गांव वासियों ने जगह-जगह पुष्प की वर्षा व आरती करते नजर आये। बारात में कई झांकियां आक्रषण का केन्द्र बनी रही। भगवान शिव और उनकी गणों की झांकी विशेष आकर्षण का केन्द्र रही। बारात पूरे गांव का भ्रमण कर रामलीला स्थल पर पहुचा जहा चारो ओर रीराम के जयकारे व हर-हर महादेव गगनभेदी नारे से गुजांयमान रहा। तत्पश्चात लोगों में महाप्रसाद वितरित किया गया। इस दौरान अवधेश चौबे व्यास, अरुण कुमार, जयप्रकाश चौबे, मारकंडे पांडे, अशोक कुमार, घनश्याम सिंह, शमशेर सिंह, अजय चौबे, मनोज चौबे, प्रमोद चौबे, राकेश चौबे, केसर यादव, बबलू यादव, अनुज चौबे, त्रिलोक, टुनटुन, हिमांशु, इत्यादि सैकड़ो कार्यकर्ता व भक्त उपस्थित थे।