संविधान दिवस के अवसर पर बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण 

संविधान दिवस के अवसर पर बाबा साहब डॉ भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण

चहनिया चंदौली

चहनिया क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालयों में संविधान दिवस की दिलाया गया शपथ

प्रधानाध्यापक विरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि 26 नवम्बर1949 में संविधान को स्वीकार किया गया ,तब से आज तक हमारा देश बाबा साहब अंबेडकर जी के बनाए हुए संविधान से उत्तरोत्तर प्रगति कर रहा है !

संविधान सभा के सभी विद्वान प्रतिनिधियों ने बड़ी मेहनत और लगन के साथ इस संविधान को बनाकर भारत को मज़बूत बनाने का प्रयास किया है !

राज्य शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित नंद कुमार शर्मा ने बच्चों को संविधान की प्रस्तावना को बताकर कहा कि संविधान दिवस मनाने के पीछे इसका मूल उद्देश्य बच्चों को जागरूक करना तथा संवैधानिक अधिकारों के बारे में जानकारी प्राप्त कर अपने मौलिक अधिकारों की रक्षा करना है !

भारत रत्न बोधिसत्व डॉ . भीमराव अंबेडकर पूरे विश्व के लिए एक नायक के रूप में जाने जाते हैं !विश्व के कई देशों में उनके सम्मान के लिए उनकी मूर्ति स्थापित है !लोगों के मूल अधिकारों तथा कर्तव्यों को संवैधानिक रूप प्रदान करते हुए एक सशक्त भारत की बुनियाद रखने का काम किया !

इस अवसर विद्यालय के प्रधानाध्यापक वीरेंद्र सिंह यादव ,शिक्षक नंद कुमार शर्मा ,पूजा सिंह, रूबीसिंह, ममतरानी गुप्ता ,गौतमलाल ,विजय राज रवि ,लक्ष्मीकांत तिवारी ,प्रदीप कुमारसिंह ,उमाचौबे, उमेश ,रामभजन ,सुशीला देवी ,मंजू देवी, रसोइया तारादेवी ,तेतरा देवी ,पिंकी रानी ,केवलादेवी सहित सभी बच्चे उपस्थित रहे!

पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर के ओम नगर वार्ड नंबर 9 में छठ पूजा बड़े ही धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाई गई। इलाके के सैकड़ों श्रद्धालु घाट पर एकत्रित हुए और सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया।

धनुष टूटने का दृश्य देख दर्शक हुए गदगद -शेरवां खखडा गांव में आयोजित श्री राम कथा केतिसरे दिन शुक्रवार की कथा वाचक पंडित मंगलम दीप महाराज कथा में बतलाया कि शिव धनुष टूटते ही चारों तरफ हर-हर महादेव व जय श्रीराम के नारे से पूरा पांडाल सहित गांव गुजायमान हो गया। इस दौरान राजा जनक के सीता स्वयंवर के लिये रखे गये शर्त को जब कोई राजा, देव-दानव-मानव पूरा नही कर पाए तब महाराज जनक निराश हो गये और उन्होने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि मैं यह समझता कि यहां कोई भी वीर पुरूष नही सभी का-पुरूष ही का-पुरूष है। तो मैं अपनी बेटी के लिए एेंसा शर्त नही रखता। स्वयंर देखने के उद्देश्य से पहुचे लक्षमण तुरन्त ही उनको बातों से कुद्ध होकर कहे महाराज जनक रघुवंशियो के समक्ष इस तरह के शब्द बोलने का किसी को कोई अधिकार नही यह धनुष क्या चीज है अगर बड़े भैया का आदेश हो तो मैं पूरी पृथ्वी को गेद तरह उठाकर पटक कई टुकड़े कर दूं। जिस पर गुरू विश्वामित्र व प्रभुराम ने लक्षमण को समझाते हुए शान्त करवाया और महाराज जनक की निराशा को आशा में तब्दील करते हुए शुभ-मुहुर्त में विश्वामित्र के आदेशानुसार प्रभु श्रीराम ने धुनष पर तमंचा चढ़ाने गये और तमंचा चढ़ाते ही वह टूट गया। धनुष के टूटते ही चारो तरफ हर-हर महादेव, व जय श्रीराम के नारे से पूरा गांव सहित पंडाल गुजायमान हो गया। इस दौरान कथा में उपस्थित मंगल मिश्रा, सूर्य बली यादव, चंद्रभूषण त्रिपाठी, वशिष्ठ नरायण त्रिपाठी,बिशाल,मनोहर, अशोक मिश्रा, सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।