मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना अर्न्तगत 42जोड़ों का हुआ विवाह  चहनिया चंदौली 

मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना अर्न्तगत 42जोड़ों का हुआ विवाह  चहनिया चंदौली

क्षेत्र के स्थानीय विकास खण्ड चहनिया मुख्यमंत्री सामुहिक विवाह समारोह में 42जोड़े का विवाह सम्पन्न कराया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अरुण कुमार जायसवाल ब्लाक प्रमुख ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद दिया। साथ कहा कि मुख्यमंत्री की यह योजना गरीब परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिससे बेटियां अब परिवार पर बोझ नहीं बन रही है। समारोह में वर-वधु को उपहार स्वरूप वर्तन सेट, कपड़े, चांदी की पायल और बिछिया, पगड़ी, चुनरी, श्रृंगार बॉक्स, बैग, और 60000रूपये की धनराशि प्रदान की गई। खंड विकास अधिकारी राजेश नायक ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री सामुहिक विवाह योजना से गरीबों को सीधे लाभ पहुॅच रहा है। अब गरीब परिवार की बेटियां अपने बाप के उपर बोझ नही बन रही है। वही उन्होने लोगो को जागरूक व प्रोप्ताहित करते हुए बताया कि आप लोग ज्यादा से ज्यादा इस योजना का लाभ उठाये और किसी बहकावे के चक्कर न परे। आप की बेटी आप के उपर बोझ नही नही आप की बोझ को सरकार अपना बोझ समझ कर उसका समुचित निदान करने में लगी हुई है। बस केवल आप अपने बच्चो को शिक्षित कर उनमें अच्छे संस्कार पिरोये ताकि वह दो परिवार के बोझ को अपना दम्पत्ति जीवन यापन करते हुए खुशहाल रहे। राजीव कुमार जिला समाज कल्याण अधिकारी ने नवविवाहित जोड़ों को शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत प्रदेश सरकार आर्थिक रुप से कमजोर परिवारों को सहायता प्रदान कर रही है। इस योजना के अंतर्गत कुल एक लाख रुपये की सहायता दी जाती है, जिसमें 60,000रुपये वधु के खाते में भेजे जाते हैं। 25000की विवाह योग सामग्री कपड़ा, बर्तन, गृहस्ती संबंधित सामान दिया गया। इस कार्यक्रमों में सर्वेश कुशवाहा, संगठा राय, चन्दन जायसवाल, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति रही। वर-वधु के साथ आए मेहमानों के लिए भोजन और नाश्ते की व्यवस्था की गई थी।

भगवान भास्कर के जयकारे से गूजायमान हुई अध्यात्मिक नगरीरामनगर वाराणसीविन्ध्य पर्वत के तलहटी में भगवान भोले नाथ की त्रिशूल पर वसी नगरी वाराणसी में चार द्विवसीय डाला छठ बड़े ही धूॅमधाम के साथ मनाया गया। मॉ भगवती गंगा के दोनां तटां अध्यात्मिक नगरी तो दुसरी तरफ रामनगर के राजा का किला स्थित है। अस्सी घाट से लेकर राजघाट तक व रामनगर से लेकर पड़ाव डोमरी तक हजारां नर नारी भगवान भास्कर के महापर्व को पूर्ण करने में लगे रहे। जिसके क्रम में मंगलवार की अल सुबह ही व्रतियो ने मॉं गंगा के तट पर पहुच कर उदयाचल भगवान भास्कर को अर्ध्य दिया। जैसे भगवान भास्कर की किरणे मां गंगा के स्पर्श की कि चारों तरफ भगवान भास्कर व छठी मइया के गगन भेदी जयकारे से पूरा क्षेत्र गूजायमान हो गया और इसी अर्ध्य के साथ भगवान भास्कर महापर्व समाप्त हो गया।