जिलाधिकारी ने निर्वाचन कार्य का किया औचक निरीक्षणः चंदौली में मतदाताओं को जारी नोटिसों की सुनवाई जांची

जिलाधिकारी ने निर्वाचन कार्य का किया औचक निरीक्षणः चंदौली में मतदाताओं को जारी नोटिसों की सुनवाई जांची

आज दिनांक 23.01.2026 को निर्वाचन (एस०आई०आर०) कार्य के दृष्टिगत जिलाधिकारी चन्द्र मोहन गर्ग द्वारा मतदाताओं को निर्गत नोटिस की सुनवाई स्थल बी०आर०सी० कार्यालय, नियामताबाद, चन्दौली का निरीक्षण किया जहां पर 03 अतिरिक्त सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी, 380-मुगलसराय विधानसभा क्षेत्र, चन्दौली उपस्थित होकर नोटिस की सुनवाई का कार्य कर रहे थे। सुनवाई में मतदाता पर्याप्त संख्या में उपस्थित थे, नोटिस की सुनवाई करते हुए मतदाता द्वारा दिये गये साक्ष्यों को ए०ए०ई०आर०ओ० पोर्टल पर सुचारू रूप से अपलोड कराये जा रहे थे। सुनवाई में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं पायी गयी। इसी तरह 380-मुगलसराय विधानसभा क्षेत्र के 39 ए०ए०ई०आर०ओ० भी अपने-अपने सुनवाई स्थल पर उपस्थित होकर सुनवाई के कार्य में लगे है। जनपद में निर्वाचन का कार्य सभी सुनवाई स्थलों पर सुचारू रूप से चल रहा है।

अधिकारियों के आदेश को मातहत दिखा रहे ठेगा
चहनियां चन्दौली।
क्षेत्र के प्रभुपुर गावं में अराजी नं0 311पर चकरोड बनवाने के लिए पिड़ित वायुनन्दन त्रिपाठी ने उपजिलाधिकारी व खण्ड विकास अधिकारी के यहा प्रार्थना पत्र देकर गुहार लगाया गया। लेकिन उच्चाधिकारियां के आदेश के बावजूद भी मातहत सचिव व प्रारम्भ कार्य कराना उचित नही समझ रहे है। वही पिड़ित वायुनन्दन ने खण्ड विकास अधिकारी से बार-बार मिलने के पर खण्ड विकास अधिकारी ने दो दिन के अन्दर काम लगवाये जाने का आश्वासन देकर प्रार्थी को शान्त कराया। इस संबंध में तत्कालीन एडीओ पंचायत ने सचिव को कार्य कराने का लिखित आदेश दिया था लेकिन सचिव द्वारा उसे नजर अंदाज करते हुए कार्य कराना उचित नही समझा। ग्राम प्रधान चुनावी रंग में रंग कर आलाधिकारियां के आदेश को ठेगा दिखाते हुए ठंण्डे बस्ते में डाल दिया है। अधिकारियों के आदेश को दो-दिन, चार-दिन करते-करते मातहत सचिव व ग्राम प्रधान दो माह बिता दिए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारियों का आदेश का कितना मातहत पालन करते है। अधिकारियों ढ़ुलमुल रवैया पूर्ण आदेश से तंग आकर पिड़ित आमरण अनशन करने का बाध्य हो गया। वही पिड़ित वायुनन्दन ने आलाधिकारियों चेताते हुए कहा कि अगर जल्द से जल्द कार्य प्रारम्भ नही करवाया तो प्रार्थी आमरण अनशन को बाध्य होगा जिसकी सारी जिम्मेदारी मातहतों की होगी।