बाढ़ प्रबंधन योजना के तहत की जा रही विभिन्न विभागों की तैयारियों की आयोजित हुई समीक्षा बैठक

बाढ़ प्रबंधन योजना के तहत की जा रही विभिन्न विभागों की तैयारियों की आयोजित हुई समीक्षा बैठक

 

 

 

तटबंधों और कटाव-रोधी कार्यों एवं नहरों की सिल्ट सफाई का कार्य पूर्व-मॉनसून निरीक्षण कर कमजोर/मरम्मत का कार्य समय से किया जाय

 

 

चंदौली/दिनांक 17 अप्रैल, 2026

 

जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग की अध्यक्षता मे वर्ष 2026-27 की बाढ़ से प्रभावी ढंग से निपटने हेतु स्टीयरिंग ग्रुप की समीक्षा बैठक कलेक्ट्रेट सभागार में सम्पन्न हुई।

 

सभी संबंधित विभागों को बाढ़ से पहले की तैयारियों (प्री-मानसून एक्टिविटी) को समय से पूरा करने का निर्देश दिया। अधिशासी अभियंता चंद्र प्रभा द्वारा संवेदनशील, अतिसंवेदनशील तटबंधों चंद्रप्रभा, गढ़ई नदी, गुरैनी, भोका बंधी एवं अन्य तटबंधो के बारे में जानकारी दी गई। जिलाधिकारी द्वारा वर्ष 2026-27 में सम्भावित बाढ़ से बचाव हेतु की जा रही तैयारियों, तथा पिछले वर्ष हुए प्रभावित ग्रामों तटबंधों के बारे में अधिशासी अभियंता चन्द्र प्रभा से जानकारी प्राप्त किया गया।

 

बैठक दौरान जिलाधिकारी द्वारा बारी-बारी से चन्द्र प्रभा, सिंचाई विभाग, जिला पूर्ति विभाग, चिकित्सा विभाग, पशुपालन विभाग ,पंचायती राज, कृषि विभाग, विद्युत विभाग, लोक निर्माण विभाग तथा शिक्षा विभाग के द्वारा बाढ़ के दौरान किए जाने वाले संपूर्ण तैयारियों एवं अन्य कार्यों तथा उनके दायित्वों के बारे में विस्तृत जानकारी दिया गया। बैठक दौरान जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि ग्रामीण क्षेत्रों में तथा विभिन्न परीक्षेत्रों में पड़ने वाले ड्रेनेज की साफ-सफाई पहले ही करा ली जाए जिससे की जल जमाव (वाटर लॉगिंग) की समस्या न आए तथा सिल्ट की साफ सफाई की उचित व्यवस्था करें । इसका सत्यापन भी करा लें। ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के अंतर्गत भी कार्य कराए जाए। कहा कि बाढ़ बचाव के दृष्टिगत जो भी कार्य कराए उसकी गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें सभी प्रकार के कराए जाने वाले निर्माण कार्यों की गुणवत्ता मानक के अनुरूप रहनी चाहिए। कहा कि बाढ़ बचाव के दृष्टिगत आवश्यक वस्तुएं भी क्रय करने हेतु सभी टेंडर्स की प्रक्रिया 15 जून से पूर्व ही पूर्ण कर लें।

 

इस अवसर पर अपर जिलाधिकारी वित्त राजस्व राजेश कुमार, प्रभागीय वनाधिकारी बी. शिव शंकर, मुख्य चिकित्साधिकारी, अधिशासी अभियंता चन्द्र प्रभा, जिला विकास अधिकारी, डीसी नरेगा, आपदा विशेषज्ञ, जिला कृषि अधिकारी, नगर पालिका तथा नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी गण तहसीलदार गण तथा जनपद स्तरीय अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।

मिर्जापुर के कछवां थाना क्षेत्र के नरायनपुर गांव निवासी चंद्र प्रकाश पटेल, जो भारतीय सेना के जवान थे, युद्धाभ्यास के दौरान तोप पर शहीद हो गए। सेना के सूबेदार नरेंद्र सिंह ने बताया कि यह तोप पर कैजुएल्टी का मामला है। शहीद जवान का पार्थिव शरीर सेना द्वारा आज दोपहर में कछवां लाया जाएगा, जहां पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार गंगा तट पर किया जाएगा।
चंद्र प्रकाश पटेल का 2010 में भारतीय सेना में पहले प्रयास में चयन हुआ था। वह सेना की 99वीं बटालियन में तैनात थे और इन दिनों राजस्थान के सूरतगढ़ में तैनात थे। 22 अक्टूबर को वह घर आए थे, और एक सप्ताह के बाद सेना की ड्यूटी के लिए वापस लौट गए थे।
शहीद के परिवार में मातम, गांव में उमड़ी भीड़ चंद्र प्रकाश के निधन की सूचना मिलते ही गांव में गम का माहौल छा गया। शहीद जवान की पत्नी स्नेहा पटेल और ढाई साल के बेटे अयांश के साथ उनका परिवार गहरे शोक में डूबा हुआ है। परिवार के अन्य सदस्य, विशेष रूप से उनके माता-पिता राजपति और राजनाथ पटेल, जो शहादत की खबर सुनकर विलाप कर रहे थे, इस दुःखद घटना से बुरी तरह प्रभावित हैं।

सीता राम स्वयंवर देख श्रोता हुए गदगद-चंदौली सकलडीहा विकास खंड क्षेत्र के सहरोई गांव में श्री हनुमान जयंती के पावन अवसर पर नवयुवक मंगल दल सहरोई के तत्वाधान में सात दिवसीय संगीतमय राम कथा का आयोजन किया गया है कथा के चौथे दिन पंडित शक्ति तिवारी कथा में भी बताया की जिस कार्य को दस हजार राजा नहीं कर पाये उस कार्य को श्री रघुनाथ ने करके दिखाये। यह दृश्य देखकर जितने राजा थे सब सकुचा जाते हैं। और लगे खलबली मचाने उसी समय अजगौ धनुष के लिए परशुराम सभा में आ जाते हैं। और सब के सब राजा अपने पिता का नाम बताकर कतार बद्ध खड़े हो गये। और लगे चिखारने की निकाल कर के वापस करो जिसने शिव पिनाक धनुष को खंड-खंड किया। राम कहते हैं महाराज वह आपका कोई दास ही होगा लेकिन परशुराम का क्रोध शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा था। तब लक्ष्मण भैया कौतकी करने लगे और अंत में कहना ही पड़ा की महाराज हमें कुंभड की भतिया न समझिएगा जो हाथों की तर्जनी देखकर डर जाये। हम रघुवंशी हैं हम जानते हैं कि जो क्षत्री ब्राह्मण के चरणों में निष्ठा बनाकर रहता है। वह संसार में निर्भर होकर जीता है। परशुराम सोच में पड़ गए कि ब्राह्मण के चरणों में इतनी निष्ठा भगवान को छोड़कर दूसरा कोई हो ही नहीं सकते। परशुराम धनुष की प्रतंचा चढ़वाकर रघुनाथ की परीक्षण किया और तीन बार जय जय कार लगाकर वापस महेंद्र पर्वत पर चले जाते हैं। फिर राजाओं ने राहत की सांस ली और दूतो को अयोध्या भेज कर चक्रवर्ती राजा दशरथ पत्र दिया गया और चक्रवर्ती राजा दशरथ पूरे धूमधाम से बारात लेकर आये। और पंडित शक्ति तिवारी ने बहुत ही खूबसूरत मट फोड की गीत गाते हुए विवाह की मंगल गीत सुनाये। जिसकी सभी श्रोता बंधु भाव विभोर होकर खूब आनंदित हुये। सैकड़ो श्रोताओं का हुजूम लग रहा। वहीं उपस्थित मुख्य अतिथि पूर्व सांसद रामकिशन यादव। राहुल मिश्रा समाज सेवीक, महानंद मिश्रा, अमित मिश्रा, रोहित, पवन, शिशु, विराट, उमेश, दिनेश, शुभम, गोलू, तबला वादक अनिल तिवारी, निक्की राशिक, प्रदुम्न, सैकड़ो श्रद्धालु उपस्थित रहे।