बबुरी स्थानीय कस्बा निवासी गौतम पटवा की 14 वर्षीय पुत्री जाह्नवी (कक्षा 11 की छात्रा) की साड़ी से फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया।

बबुरी स्थानीय कस्बा निवासी गौतम पटवा की 14 वर्षीय पुत्री जाह्नवी (कक्षा 11 की छात्रा) की साड़ी से फांसी लगाकर आत्महत्या कर लिया। इस घटना के बाद से क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। मृतका के पिता ने अपने ही परिवार के सदस्यों (मृतका के चाचा, चाची और दादा) पर बेटी की हत्या करने का गंभीर आरोप लगाया है।

घटना के बाद से मृतका के पिता गौतम पटवा और परिजन गहरे सदमे और आक्रोश में हैं। पिता ने पुलिस के सामने कड़ा रुख अपनाते हुए ऐलान किया है कि जब तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो जाती, तब तक वे बेटी के शव का अंतिम संस्कार (अंत्येष्टि) नहीं करेंगे। काफी समझाने बुझाने के बाद परिजन बेटी के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजने को तैयार हुए। घटना की सूचना मिलते ही थाना अध्यक्ष बबुरी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँच गए। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने घटना स्थल से साक्ष्य जुटाए हैं और जरूरी नमूनों (सैंपल्स) को अपने कब्जे में लेकर जांच के लिए भेज दिया है।मृतका जाह्नवी दो बहनें थी, जिसमें से उसकी बड़ी बहन वैष्णवी अपनी बुआ के साथ रहती है। जाह्नवी अपनी माँ संजू और पिता गौतम पटवा के साथ रहती थी। थाना अध्यक्ष बबुरी किशोर कुमार चौबे का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है, और फॉरेंसिक रिपोर्ट व पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। आरोपियों के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

रिपोर्ट वैभव त्रिपाठी

पांच द्विवसीय रामकथा का हुआ समापन -मिर्जापुर शेरवा खखड़ा गांव में आयोजितपांच दिवसीय संगीतमय रामकथा का आयोजन किया गया था ।कथा अंतिम दिन कथावाचक परम पूज्य मंगलम दीपक महाराज ने कथा में बताया कि नारायण की कृपा कब किसपर बरस जायेगी उसको कोई नहीं जान पाता जिस प्रकार प्रभु श्रीराम की कृपा हनुमान जी पर हुई, सुग्रीव जी व विभिषण जी पर हुई। निच्छल भाव से युक्त जीवन यापन करने वालो पर कब प्रभु की कृपा हो जायेगी उसको तो वही जान सकते है। चंचल चित जीव सुग्रीव जिस पर रघुनाथ जी की कृपा हुई और विभिषण जी के पूरा राजपाठ ही दे दिया और अपने परम शिष्य हनुमान जी पर अपनी कृपा बरसा कर उन्हे अमरता का वरदान दिया और अष्ट सिद्धियां प्रदान कर दी। परम पूज्य मंगलम दीपक महाराज ने बतलाया की जीवन में यदि जीना सीखना है तो रामचरितमानस का चरण, शरण ,ग्रहण करना चाहिए रामचरितमानस हमको जीना सिखाती है भाई भाई के प्रति प्रेम कैसा होना चाहिए, माता-पिता के प्रति प्रेम कैसा होना चाहिए, पिता और पुत्र के प्रति प्रेम कैसा होना चाहिए, यह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी के जीवन से सीखा जा सकता हैऔर उन्होंने बतलाया की मनुष्य का शरीर साधन का धाम है मोक्ष का दरवाजा है और इस सांसारिक भव कुप से बाहर निकालने के लिए केवल और केवल एक नाम ओम, राम, शिव इन्हीं तीन नाम में से एक का जाप करें इसी में हम सब का कल्याण है और उन्होंने बतलाया की भगवान ज्ञान से मिले या ना मिले वैराग्य से मिले या ना मिले लेकिन प्रभु प्रेम से जरूर मिल जाते है।वही कथा के अतिम दिन प्रसाद वितरण किया जिसमें हजारो नर-नारी बूढ़े-जवान बच्चे शामील रहे। इस दौरान मुख्य अतिथि चकिया विधायक कैलाश आचार्य, उमापती पाठक पूर्व प्रधान, मंगल मिश्रा, सुजीत मोदनवाल, सूर्य बली यादव, चंद्रभूषण त्रिपाठी, वशिष्ठ नरायण त्रिपाठी, अशोक मिश्रा, अवधेश मिश्रा, मनोहर, प्रसिद्ध तबला वादक अनिल द्विवेदी, बबलू तिवारी, सहित सैकड़ो श्रद्धालु उपस्थित थे।