मानवाधिकार न्यूज़ -: महाराष्ट्र पुणे के विजय विहार की मेमोरियल एरिया में छठ पूजा का भव्य आयोजन, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड

रिपोर्ट – शिखा पाठक

मानवाधिकार न्यूज़ -: महाराष्ट्र पुणे के विजय विहार की मेमोरियल एरिया में छठ पूजा का भव्य आयोजन, श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड


महाराष्ट्र पुणे के विजय विहार की मेमोरियल एरिया में छठ पूजा का उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया। सोसाइटी के निवासियों ने मिलकर आयोजन किया, जिसमें श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और आस्था के साथ छठ माई की पूजा की। इस अवसर पर घाट की विशेष सजावट की गई और सुरक्षा के लिए भी खास इंतजाम किए गए।
सुबह और शाम को भक्तों ने उगते और डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। पूजा स्थल पर रंग-बिरंगे कपड़े पहने लोग और विशेष प्रसाद ‘ठेकुआ’ का वितरण मुख्य आकर्षण रहा। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक सभी ने पूजा में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया।


पूजा में शामिल महिलाओं ने पारंपरिक व्रत रखा और सूर्य भगवान से परिवार की खुशहाली की कामना की। रंग-बिरंगी साड़ियों में सजी व्रतधारी महिलाओं और बच्चों की उपस्थिति ने माहौल को बेहद उत्सवमय बना दिया। प्रसाद में ठेकुआ और फल वितरित किए गए, जिससे भक्तों में विशेष उत्साह देखा गया।
सोसाइटी के निवासियो ने बताया कि यह पर्व हमारे सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है और इसे हर साल और भी भव्यता के साथ मनाने का प्रयास रहेगा।

धनुष टूटने का दृश्य देख दर्शक हुए गदगद -शेरवां खखडा गांव में आयोजित श्री राम कथा केतिसरे दिन शुक्रवार की कथा वाचक पंडित मंगलम दीप महाराज कथा में बतलाया कि शिव धनुष टूटते ही चारों तरफ हर-हर महादेव व जय श्रीराम के नारे से पूरा पांडाल सहित गांव गुजायमान हो गया। इस दौरान राजा जनक के सीता स्वयंवर के लिये रखे गये शर्त को जब कोई राजा, देव-दानव-मानव पूरा नही कर पाए तब महाराज जनक निराश हो गये और उन्होने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि मैं यह समझता कि यहां कोई भी वीर पुरूष नही सभी का-पुरूष ही का-पुरूष है। तो मैं अपनी बेटी के लिए एेंसा शर्त नही रखता। स्वयंर देखने के उद्देश्य से पहुचे लक्षमण तुरन्त ही उनको बातों से कुद्ध होकर कहे महाराज जनक रघुवंशियो के समक्ष इस तरह के शब्द बोलने का किसी को कोई अधिकार नही यह धनुष क्या चीज है अगर बड़े भैया का आदेश हो तो मैं पूरी पृथ्वी को गेद तरह उठाकर पटक कई टुकड़े कर दूं। जिस पर गुरू विश्वामित्र व प्रभुराम ने लक्षमण को समझाते हुए शान्त करवाया और महाराज जनक की निराशा को आशा में तब्दील करते हुए शुभ-मुहुर्त में विश्वामित्र के आदेशानुसार प्रभु श्रीराम ने धुनष पर तमंचा चढ़ाने गये और तमंचा चढ़ाते ही वह टूट गया। धनुष के टूटते ही चारो तरफ हर-हर महादेव, व जय श्रीराम के नारे से पूरा गांव सहित पंडाल गुजायमान हो गया। इस दौरान कथा में उपस्थित मंगल मिश्रा, सूर्य बली यादव, चंद्रभूषण त्रिपाठी, वशिष्ठ नरायण त्रिपाठी,बिशाल,मनोहर, अशोक मिश्रा, सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

अधिकारियों के आदेश को मातहत दिखा रहे ठेगा
चहनियां चन्दौली।
क्षेत्र के प्रभुपुर गावं में अराजी नं0 311पर चकरोड बनवाने के लिए पिड़ित वायुनन्दन त्रिपाठी ने उपजिलाधिकारी व खण्ड विकास अधिकारी के यहा प्रार्थना पत्र देकर गुहार लगाया गया। लेकिन उच्चाधिकारियां के आदेश के बावजूद भी मातहत सचिव व प्रारम्भ कार्य कराना उचित नही समझ रहे है। वही पिड़ित वायुनन्दन ने खण्ड विकास अधिकारी से बार-बार मिलने के पर खण्ड विकास अधिकारी ने दो दिन के अन्दर काम लगवाये जाने का आश्वासन देकर प्रार्थी को शान्त कराया। इस संबंध में तत्कालीन एडीओ पंचायत ने सचिव को कार्य कराने का लिखित आदेश दिया था लेकिन सचिव द्वारा उसे नजर अंदाज करते हुए कार्य कराना उचित नही समझा। ग्राम प्रधान चुनावी रंग में रंग कर आलाधिकारियां के आदेश को ठेगा दिखाते हुए ठंण्डे बस्ते में डाल दिया है। अधिकारियों के आदेश को दो-दिन, चार-दिन करते-करते मातहत सचिव व ग्राम प्रधान दो माह बिता दिए। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अधिकारियों का आदेश का कितना मातहत पालन करते है। अधिकारियों ढ़ुलमुल रवैया पूर्ण आदेश से तंग आकर पिड़ित आमरण अनशन करने का बाध्य हो गया। वही पिड़ित वायुनन्दन ने आलाधिकारियों चेताते हुए कहा कि अगर जल्द से जल्द कार्य प्रारम्भ नही करवाया तो प्रार्थी आमरण अनशन को बाध्य होगा जिसकी सारी जिम्मेदारी मातहतों की होगी।

कई सालों से बॉलीवुड के शान जाने माने गोवर्धन असरानी अपने कई किरदारों में हम सब को हंसाते थे आज हम सब के बीच नहीं रहे हम सब उनकी आत्मा को शांति के लिए प्राथना करते हे भगवान उन्हें चारणो में स्थान दे ॐ शांति