दिगंबर जैन समाज वाराणसी के भक्तों ने चतुर्मास के लिए श्रीफल अर्पण किया – चहनिया चन्दौली

दिगंबर जैन समाज वाराणसी के भक्तों ने चतुर्मास के लिए श्रीफल अर्पण किया

चहनिया चन्दौली

महासमाधि धारक परम पूज्य आचार्य श्री 108विद्यासागर जी महाराज से दीक्षित एवं परम पूज्य आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के आज्ञानुवर्ती शिष्य मुनि श्री 108 धर्म सागर जी महाराज, मुनि श्री 108भाव सागर जी महाराज का मंगल विहार बनारस की ओर चल रहा है। जो चहनिया में बृहस्पतिवार को प्रातः काल की बेला में मुनि श्री के लिए दिगंबर जैन समाज वाराणसी के महानुभावों ने चातुर्मास के लिए श्रीफल अर्पण किया, यहां पर मुनि संघ की आहारचर्या संपन्न हुई। मुनि श्री धर्म सागर जी महाराज का 51वां अवतरण दिवस मनाया गया, पाद प्रक्षालन, पूजन की गई, इस अवसर पर जरूरतमंदों को फल, वस्त्र एवं औषधि का वितरण किया गया, आगामी दिनों में मुनि संघ के मंगल प्रवेश की संभावना 11जुलाई के आसपास वाराणसी में 50वर्ष में प्रथम बार होगा, इस अवसर पर धर्म सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री भावसागर जी महाराज ने कहा कि भक्ति से तन, मन, वचन,वतन, धन, जीवन सफल हो जाता है, पूजा भक्ति एक अमृत रस है, भरत चक्रवर्ती जब पूजन करते थे तो द्रव्य के पहाड़ बन जाते थे, भक्ति से शरीर मन, आत्मा, हृदय शुद्ध होते है एवं, समाज, देश, परिवार शुद्ध होता है, मोक्ष के द्वार का ताला भक्ति रूपी चाबी से खोला जाता है, भक्ति पापी मन को पवित्र करती है, तल्लीनता से भक्ति करने से अतिशय, चमत्कार होते हैं, भक्ति से आनंद, उत्साह, सफलता की प्राप्ति होती है, भक्ति से ऊर्जा मिलती है, आप ऐसी भावना करें, हे प्रभु मेरे पैरों में इतनी शक्ति देना की दौड़-दौड़कर आपके दरवाजे आ सकूं तीर्थ क्षेत्र की वंदना कर सकू, मुझे ऐसी सद्बुद्धि देना कि सुबह शाम घुटने के बल बैठकर आपको नमस्कार सकूं ,जब तक जिऊँ जीभ पर आपका नाम रहे, प्रेम से भरी हुई आंखें देना, श्रद्धा से झुका हुआ सिर देना, सहयोग करते हुए हाथ देना, सत्पथ पर चलते हुए पाव देना और स्मरण करता हुआ मन देना अपनी कृपा दृष्टि और सद्बुद्धि देना भक्ति मुक्ति महल की चाबी है, गुणीजनों में दान, पूजा, विनय का भाव होना भक्ति है, भक्ति सर्वश्रेष्ठ रस है, भक्ति जीने की कला सिखाती है, भक्ति श्रद्धा की कसौटी है, पूजा भक्ति एक सरिता है, विनय भक्ति का श्रेष्ठ तरीका है, प्रभु के गुण अनुराग को भक्ति पूजा, अर्चना, वंदना या प्रार्थना कहते हैं, जिससे विशेष शक्तियों की प्राप्ति होती है, और आध्यात्मिक सिद्धियां प्रकट होती है। मन का विकार धुल जाता है, इससे शरीर समाज, देश, परिवार विश्व शुद्ध होता है। इस दौरान क्षेत्र के सभ्रान्त भक्तवत्सल उपस्थित रहे।

श्रीकृष्ण जन्मोत्सव कथा प्रसंग सुनकर भक्त हुए निहाल चहनियां चन्दौली क्षेत्र के पक्खोपुर गांव में श्री त्रिदण्डी स्वामी के शिष्य सुन्दरदास यति जी महराज ने अपने मुखार विन्दु से भगवान विष्णु के अवतारों, विशेष रूप से भगवान कृष्ण की लीलाओं और भक्ति योग का वर्णन किया। स्वामी जी ने बताया कि जब-जब धरा पर पाप का बोझ बढ़ जाता है तब-तब भगवान को किसी न किसी रूप में अवतार लेकर पापियो का ाश कर आमजन को मुक्ति दिलाना है। जब कंस का पाप चरमोकर्ष पर पहुच गया तब नाथ नारायण ने श्रीकृष्ण रूप में जन्म लेकर कंस का अंत करके मथुरा का उद्धार किया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव कथा का प्रसंग सुनकर भक्त निहाल हो गये। इस दौरान जिउत बन्धन यदव, राजेश सिंह, प्रभाकर सिंह, निरज पाण्डेय, पंकज पाण्डेय, दीपक सिंह, ओमप्रकाश सिंह, अशोक, सारनाथ, प्रेमकुमार सिंह सहित सैकड़ो ग्रामवासी मौजूद रहे – चाहनिया चंदौली