आर्य महिला डिग्री कॉलेज वाराणसी में दिनांक 28 मार्च 2026 को Alumni Meet 2025–26 “उमंग” कार्यक्रम बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया गया

वाराणसी। आर्य महिला डिग्री कॉलेज वाराणसी में दिनांक 28 मार्च 2026 को Alumni Meet 2025–26 “उमंग” कार्यक्रम बड़े ही धूमधाम

और उत्साह के साथ आयोजित किया गया। इस आयोजन में वर्ष 1997 बैच की पूर्व छात्राओं ने विशेष रूप से भाग लिया और पुरानी यादों को ताजा किया।

कार्यक्रम में 1997 बैच की छात्राओं—शाइस्ता, सुचंदा, किरण, नीतू, नमिता और सावित्री—की गरिमामयी उपस्थिति रही। ये सभी मनोविज्ञान (Psychology Honours) की छात्राएं रही हैं, जिन्होंने अपने छात्र जीवन के अनुभव साझा किए और कॉलेज के प्रति अपने जुड़ाव को व्यक्त किया।

इस अवसर पर मनोविज्ञान विभाग की प्राध्यापिका प्रोफेसर शुब्रा बनर्जी भी उपस्थित रहीं। उन्होंने कॉलेज के विकास हेतु ₹50,000 की राशि दान स्वरूप प्रदान की, जिसे संस्थान के शैक्षणिक और बुनियादी विकास में उपयोग किया जाएगा।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, संवाद सत्र और स्मृति साझा करने के विभिन्न आयोजन हुए, जिससे पूरा परिसर उत्साह और भावनाओं से सराबोर रहा। कॉलेज प्रशासन ने सभी पूर्व छात्राओं का आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को जारी रखने की बात कही।

यह आयोजन न केवल पूर्व छात्राओं के पुनर्मिलन का अवसर बना, बल्कि संस्थान के प्रति उनके समर्पण और सहयोग की भावना को भी दर्शाता है।

मनुष्य के हृदय में होता है भगवान का वास-पंडित शक्ति मुगलसराय चन्दौली तारा जीनपुर क्षेत्र स्थित सहरोई गांव में विगत पांच वर्षों की भांति इस वर्ष भी श्री हनुमान जयंती के पावन अवसर नवयुवक मंगल दल सहरोई के तत्वाधान में सप्त दिवसीय संगीमय श्रीराम कथा का आयोजन किया गया है। कथा के दूसरे दिन पंडित शक्ति तिवारी ने नारायण के दिव्य अवतार को समझाते हुए कहा की भगवान का अवतार प्रत्येक मनुष्य के हृदय वेश में होता है। अवतार को समझाते हुए उन्होंने कहा कि भगवान अपनी भावना को छोड़कर के धेनु, सुर, संत, हित में लिन्ह, मनुज अवतार भगवान ब्राह्मणों के गाय माता, के और संतों के हितों के लिये धरती पर मनुष्य का शरीर धारण करके आते हैं। इसी को समझाते हुए भगवान के बाललीला का भी वर्णन किया और उन्होंने बतलाया की चक्रवर्ती सम्राट राजा दशरथ एक पुत्र के लिए रो रहे थे और गुरु वशिष्ट के द्वारा श्रृंगी ऋषि के पुत्र प्राप्ति यज्ञ करने से तुमको चार-चार पुत्रों की प्राप्त हुयी। इसी के बाद चारों पुत्रों का नामांकरण गुरु वशिष्ट के द्वारा करवाते हुए इन्होंने बतलाया की विश्वामित्र जो की महान ऋषि थे। असुरों का समूह जब उन्हें सताया तो उन्हें भी भगवान को मांगने की जरूरत पड़ी और विश्वामित्र सनाथ हुये और भगवान वन में तारकासुर का एक ही बाण में बध कर दिये। मारीच व सुबाहु को अग्निबाण से यज्ञ की रक्षा की। इस दौरान सैकड़ां लोगो का जन सैलाब उमड़ा रहा। कार्यकर्ता राहुल मिश्रा, अमित मिश्रा, रोहित, पवन, शिशु मिश्रा, विराट, उमेश, महानंद, दिनेश, शुभम, गोलू, तबला वादक अनिल तिवारी, सैकड़ां श्रद्धालु उपस्थित रहे।