निर्माणाधीन हाईवे के किनारे नाली निर्माण कराने की किया मांग – चहनियां चंदौली

निर्माणाधीन हाईवे के किनारे नाली निर्माण कराने की किया मांग – चहनियां चंदौली

क्षेत्र स्थित तीरगाँवा से मारूफपुर तक 437 करोड़ की लागत से बन रहे फोर लेन स्टेट हाईवे 69 के किनारे किनारे बनने वाली नाली कई जगह अधूरी पड़ी हुयी है। बारिश का समय नजदीक होने से ग्रामीणों में बरसात का पानी घरों में, दुकानों में, स्कूलों में भरने की आशंका के बीच अधूरी नालियों को पूरा कराने की मांग जोर पकड़ने लगी है।

मारूफपुर गांव के सामने बनी नाली आधी अधूरी पड़ी है। जबकि वर्ष 2024 में ही ग्रामीण दुर्गेश पाण्डेय की मांग पर केंद्रीय मंत्री डॉ महेंद्र नाथ पाण्डेय ने एक्सचीयन राजेश कुमार से पहले से प्रस्तावित नाली को 200 मीटर और आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था। जिसके बाद जेई द्वारा नापी करके नाली का निर्माण कार्य शुरू भी करा दिया। लेकिन तीन दिन तक काम के बाद निर्माण बंद हो गया और अभी तक बंद पड़ा है। जिसके सम्बन्ध में जटाधारी महाविद्यालय के प्रबंधक डॉ एस पी सिंह ने बताया कि मारुफपुर बाजार से सैदपुर घाट की तरफ जाने वाली नालियों का निर्माण जटाधारी महाविद्यालय मारुफपुर के गेट पर ही छोड़ दिया गया जिससे बरसात में आने वाले पानी से महाविद्यालय कैम्पस भर जाने की सम्भावना है ऐसी स्थिति में महाविद्यालय में पढ़ने वाले छात्र छात्राओं और अध्यापकों को आने जाने में असुविधा होगी। जिसके लिए लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता को पत्र लिखकर नाली निर्माण की गुहार लगायी है। जिससे जल भराव की समस्या से निजात मिल सके।

धनुष टूटने का दृश्य देख दर्शक हुए गदगद -शेरवां खखडा गांव में आयोजित श्री राम कथा केतिसरे दिन शुक्रवार की कथा वाचक पंडित मंगलम दीप महाराज कथा में बतलाया कि शिव धनुष टूटते ही चारों तरफ हर-हर महादेव व जय श्रीराम के नारे से पूरा पांडाल सहित गांव गुजायमान हो गया। इस दौरान राजा जनक के सीता स्वयंवर के लिये रखे गये शर्त को जब कोई राजा, देव-दानव-मानव पूरा नही कर पाए तब महाराज जनक निराश हो गये और उन्होने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि मैं यह समझता कि यहां कोई भी वीर पुरूष नही सभी का-पुरूष ही का-पुरूष है। तो मैं अपनी बेटी के लिए एेंसा शर्त नही रखता। स्वयंर देखने के उद्देश्य से पहुचे लक्षमण तुरन्त ही उनको बातों से कुद्ध होकर कहे महाराज जनक रघुवंशियो के समक्ष इस तरह के शब्द बोलने का किसी को कोई अधिकार नही यह धनुष क्या चीज है अगर बड़े भैया का आदेश हो तो मैं पूरी पृथ्वी को गेद तरह उठाकर पटक कई टुकड़े कर दूं। जिस पर गुरू विश्वामित्र व प्रभुराम ने लक्षमण को समझाते हुए शान्त करवाया और महाराज जनक की निराशा को आशा में तब्दील करते हुए शुभ-मुहुर्त में विश्वामित्र के आदेशानुसार प्रभु श्रीराम ने धुनष पर तमंचा चढ़ाने गये और तमंचा चढ़ाते ही वह टूट गया। धनुष के टूटते ही चारो तरफ हर-हर महादेव, व जय श्रीराम के नारे से पूरा गांव सहित पंडाल गुजायमान हो गया। इस दौरान कथा में उपस्थित मंगल मिश्रा, सूर्य बली यादव, चंद्रभूषण त्रिपाठी, वशिष्ठ नरायण त्रिपाठी,बिशाल,मनोहर, अशोक मिश्रा, सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।