Category: धर्म

भगवान भास्कर के जयकारे से गूजायमान हुई अध्यात्मिक नगरीरामनगर वाराणसीविन्ध्य पर्वत के तलहटी में भगवान भोले नाथ की त्रिशूल पर वसी नगरी वाराणसी में चार द्विवसीय डाला छठ बड़े ही धूॅमधाम के साथ मनाया गया। मॉ भगवती गंगा के दोनां तटां अध्यात्मिक नगरी तो दुसरी तरफ रामनगर के राजा का किला स्थित है। अस्सी घाट से लेकर राजघाट तक व रामनगर से लेकर पड़ाव डोमरी तक हजारां नर नारी भगवान भास्कर के महापर्व को पूर्ण करने में लगे रहे। जिसके क्रम में मंगलवार की अल सुबह ही व्रतियो ने मॉं गंगा के तट पर पहुच कर उदयाचल भगवान भास्कर को अर्ध्य दिया। जैसे भगवान भास्कर की किरणे मां गंगा के स्पर्श की कि चारों तरफ भगवान भास्कर व छठी मइया के गगन भेदी जयकारे से पूरा क्षेत्र गूजायमान हो गया और इसी अर्ध्य के साथ भगवान भास्कर महापर्व समाप्त हो गया।

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पांच द्विवसीय रामकथा का हुआ समापन -मिर्जापुर शेरवा खखड़ा गांव में आयोजितपांच दिवसीय संगीतमय रामकथा का आयोजन किया गया था ।कथा अंतिम दिन कथावाचक परम पूज्य मंगलम दीपक महाराज ने कथा में बताया कि नारायण की कृपा कब किसपर बरस जायेगी उसको कोई नहीं जान पाता जिस प्रकार प्रभु श्रीराम की कृपा हनुमान जी पर हुई, सुग्रीव जी व विभिषण जी पर हुई। निच्छल भाव से युक्त जीवन यापन करने वालो पर कब प्रभु की कृपा हो जायेगी उसको तो वही जान सकते है। चंचल चित जीव सुग्रीव जिस पर रघुनाथ जी की कृपा हुई और विभिषण जी के पूरा राजपाठ ही दे दिया और अपने परम शिष्य हनुमान जी पर अपनी कृपा बरसा कर उन्हे अमरता का वरदान दिया और अष्ट सिद्धियां प्रदान कर दी। परम पूज्य मंगलम दीपक महाराज ने बतलाया की जीवन में यदि जीना सीखना है तो रामचरितमानस का चरण, शरण ,ग्रहण करना चाहिए रामचरितमानस हमको जीना सिखाती है भाई भाई के प्रति प्रेम कैसा होना चाहिए, माता-पिता के प्रति प्रेम कैसा होना चाहिए, पिता और पुत्र के प्रति प्रेम कैसा होना चाहिए, यह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी के जीवन से सीखा जा सकता हैऔर उन्होंने बतलाया की मनुष्य का शरीर साधन का धाम है मोक्ष का दरवाजा है और इस सांसारिक भव कुप से बाहर निकालने के लिए केवल और केवल एक नाम ओम, राम, शिव इन्हीं तीन नाम में से एक का जाप करें इसी में हम सब का कल्याण है और उन्होंने बतलाया की भगवान ज्ञान से मिले या ना मिले वैराग्य से मिले या ना मिले लेकिन प्रभु प्रेम से जरूर मिल जाते है।वही कथा के अतिम दिन प्रसाद वितरण किया जिसमें हजारो नर-नारी बूढ़े-जवान बच्चे शामील रहे। इस दौरान मुख्य अतिथि चकिया विधायक कैलाश आचार्य, उमापती पाठक पूर्व प्रधान, मंगल मिश्रा, सुजीत मोदनवाल, सूर्य बली यादव, चंद्रभूषण त्रिपाठी, वशिष्ठ नरायण त्रिपाठी, अशोक मिश्रा, अवधेश मिश्रा, मनोहर, प्रसिद्ध तबला वादक अनिल द्विवेदी, बबलू तिवारी, सहित सैकड़ो श्रद्धालु उपस्थित थे।

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धनुष टूटने का दृश्य देख दर्शक हुए गदगद -शेरवां खखडा गांव में आयोजित श्री राम कथा केतिसरे दिन शुक्रवार की कथा वाचक पंडित मंगलम दीप महाराज कथा में बतलाया कि शिव धनुष टूटते ही चारों तरफ हर-हर महादेव व जय श्रीराम के नारे से पूरा पांडाल सहित गांव गुजायमान हो गया। इस दौरान राजा जनक के सीता स्वयंवर के लिये रखे गये शर्त को जब कोई राजा, देव-दानव-मानव पूरा नही कर पाए तब महाराज जनक निराश हो गये और उन्होने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि मैं यह समझता कि यहां कोई भी वीर पुरूष नही सभी का-पुरूष ही का-पुरूष है। तो मैं अपनी बेटी के लिए एेंसा शर्त नही रखता। स्वयंर देखने के उद्देश्य से पहुचे लक्षमण तुरन्त ही उनको बातों से कुद्ध होकर कहे महाराज जनक रघुवंशियो के समक्ष इस तरह के शब्द बोलने का किसी को कोई अधिकार नही यह धनुष क्या चीज है अगर बड़े भैया का आदेश हो तो मैं पूरी पृथ्वी को गेद तरह उठाकर पटक कई टुकड़े कर दूं। जिस पर गुरू विश्वामित्र व प्रभुराम ने लक्षमण को समझाते हुए शान्त करवाया और महाराज जनक की निराशा को आशा में तब्दील करते हुए शुभ-मुहुर्त में विश्वामित्र के आदेशानुसार प्रभु श्रीराम ने धुनष पर तमंचा चढ़ाने गये और तमंचा चढ़ाते ही वह टूट गया। धनुष के टूटते ही चारो तरफ हर-हर महादेव, व जय श्रीराम के नारे से पूरा गांव सहित पंडाल गुजायमान हो गया। इस दौरान कथा में उपस्थित मंगल मिश्रा, सूर्य बली यादव, चंद्रभूषण त्रिपाठी, वशिष्ठ नरायण त्रिपाठी,बिशाल,मनोहर, अशोक मिश्रा, सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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विशाल भंडारे के साथ सात द्विवसीय रामकथा का हुआ समापनमुगलसराय चन्दौली।अलीनगर थाना क्षेत्र स्थित सहरोई गांव में विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी श्री हनुमान जयंती के पावन शुभ अवसर पर नवयुवक मंगल दल सहरोई के तत्वाधान में सात दिवसीय संगीतमय रामकथा का आयोजन किया गया है। कथा अंतिम दिन पंडित शक्ति तिवारी ने कथा में बताया कि नारायण की कृपा कब किसपर बरस जायेगी उसको कोई नहीं जान पाता जिस प्रकार प्रभु श्रीराम की कृपा हनुमान जी पर हुई, सुग्रीव जी व विभिषण जी पर हुई। निच्छल भाव से युक्त जीवन यापन करने वालो पर कब प्रभु की कृपा हो जायेगी उसको तो वही जान सकते है। चंचल चित जीव सुग्रीव जिस पर रघुनाथ जी की कृपा हुई और विभिषण जी के पूरा राजपाठ ही दे दिया और अपने परम शिष्य हनुमान जी पर अपनी कृपा बरसा कर उन्हे अमरता का वरदान दिया और अष्ट सिद्धियां प्रदान कर दी। शक्ति तिवारी ने बतलाया की जीवन में यदि जीना सीखना है तो रामचरितमानस का चरण, शरण ,ग्रहण करना चाहिए रामचरितमानस हमको जीना सिखाती है भाई भाई के प्रति प्रेम कैसा होना चाहिए, माता-पिता के प्रति प्रेम कैसा होना चाहिए, पिता और पुत्र के प्रति प्रेम कैसा होना चाहिए, यह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी के जीवन से सीखा जा सकता हैऔर उन्होंने बतलाया की मनुष्य का शरीर साधन का धाम है मोक्ष का दरवाजा है और इस सांसारिक भव कुप से बाहर निकालने के लिए केवल और केवल एक नाम ओम, राम, शिव इन्हीं तीन नाम में से एक का जाप करें इसी में हम सब का कल्याण है और उन्होंने बतलाया की भगवान ज्ञान से मिले या ना मिले वैराग्य से मिले या ना मिले लेकिन प्रभु प्रेम से जरूर मिल जाते है।वही कथा के अतिम दिन विशाल भंडारे का आयोजन प्रसाद वितरण किया जिसमें हजारो नर-नारी बूढ़े-जवान बच्चे शामील रहे। इस दौरान राहुल मिश्रा समाजसेवी, अमित मिश्रा, रोहित, पवन, शिशु, विराट, उमेश, महानंद, दिनेश, शुभम, गोलू, तबला वादक अनिल तिवारी निक्कीरशिक, प्रद्युम्न, सैकड़ो श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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धनतेरस पर झाडुओं की हुयी जमकर ब्रिकीआर्थिक मंदी का दिखा नजाराचहनियॉ चंदौली।धनतेरस के पावन पर्व पर स्थानीय कस्बा व बाजारों में काफी चहल-पहल देखी गयी तथा आर्थिक मंदी के चलते लोगों ने झाड़ूओं की जमकर खरीददारी की तथा जिधर देखे उधर ही दुकानां पर लोग झाड़ूआें की खरीद फरोख्त करते देखे गयें।भगवान धनवन्तरी महाराज की लोगों ने पूजन अर्चन किया तथा अपने सामर्थ्य के अनुसार लोगो ने वर्तन वगैरह तथा लक्ष्मी गणेश की मिट्टियों की खरीददारी कर आस्था की पूर्ति की।इस प्रकार बाजारों तथा कस्बों में देर रात्री तक काफी चहल-पहल देखी गयी मिंदरां में लोगों ने पूजन अर्चन कर मत्था टेका तथा मंगलमय होने की कामना व्यक्त किया। इस प्रकार बलुआ, पपौरा, मोहरगंज, रमौली, मारूफपुर, टाण्डाकला, रामगढ़, कस्बों व बाजारों में धनतेरस पर कफी चहल पहल देखी गयी।

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धनतेरस पर झाडुओं की हुयी जमकर ब्रिकीआर्थिक मंदी का दिखा नजाराचहनियॉ चंदौली।धनतेरस के पावन पर्व पर स्थानीय कस्बा व बाजारों में काफी चहल-पहल देखी गयी तथा आर्थिक मंदी के चलते लोगों ने झाड़ूओं की जमकर खरीददारी की तथा जिधर देखे उधर ही दुकानां पर लोग झाड़ूआें की खरीद फरोख्त करते देखे गयें।भगवान धनवन्तरी महाराज की लोगों ने पूजन अर्चन किया तथा अपने सामर्थ्य के अनुसार लोगो ने वर्तन वगैरह तथा लक्ष्मी गणेश की मिट्टियों की खरीददारी कर आस्था की पूर्ति की।इस प्रकार बाजारों तथा कस्बों में देर रात्री तक काफी चहल-पहल देखी गयी मिंदरां में लोगों ने पूजन अर्चन कर मत्था टेका तथा मंगलमय होने की कामना व्यक्त किया। इस प्रकार बलुआ, पपौरा, मोहरगंज, रमौली, मारूफपुर, टाण्डाकला, रामगढ़, कस्बों व बाजारों में धनतेरस पर कफी चहल पहल देखी गयी।

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सीता राम स्वयंवर देख श्रोता हुए गदगद-चंदौली सकलडीहा विकास खंड क्षेत्र के सहरोई गांव में श्री हनुमान जयंती के पावन अवसर पर नवयुवक मंगल दल सहरोई के तत्वाधान में सात दिवसीय संगीतमय राम कथा का आयोजन किया गया है कथा के चौथे दिन पंडित शक्ति तिवारी कथा में भी बताया की जिस कार्य को दस हजार राजा नहीं कर पाये उस कार्य को श्री रघुनाथ ने करके दिखाये। यह दृश्य देखकर जितने राजा थे सब सकुचा जाते हैं। और लगे खलबली मचाने उसी समय अजगौ धनुष के लिए परशुराम सभा में आ जाते हैं। और सब के सब राजा अपने पिता का नाम बताकर कतार बद्ध खड़े हो गये। और लगे चिखारने की निकाल कर के वापस करो जिसने शिव पिनाक धनुष को खंड-खंड किया। राम कहते हैं महाराज वह आपका कोई दास ही होगा लेकिन परशुराम का क्रोध शांत होने का नाम ही नहीं ले रहा था। तब लक्ष्मण भैया कौतकी करने लगे और अंत में कहना ही पड़ा की महाराज हमें कुंभड की भतिया न समझिएगा जो हाथों की तर्जनी देखकर डर जाये। हम रघुवंशी हैं हम जानते हैं कि जो क्षत्री ब्राह्मण के चरणों में निष्ठा बनाकर रहता है। वह संसार में निर्भर होकर जीता है। परशुराम सोच में पड़ गए कि ब्राह्मण के चरणों में इतनी निष्ठा भगवान को छोड़कर दूसरा कोई हो ही नहीं सकते। परशुराम धनुष की प्रतंचा चढ़वाकर रघुनाथ की परीक्षण किया और तीन बार जय जय कार लगाकर वापस महेंद्र पर्वत पर चले जाते हैं। फिर राजाओं ने राहत की सांस ली और दूतो को अयोध्या भेज कर चक्रवर्ती राजा दशरथ पत्र दिया गया और चक्रवर्ती राजा दशरथ पूरे धूमधाम से बारात लेकर आये। और पंडित शक्ति तिवारी ने बहुत ही खूबसूरत मट फोड की गीत गाते हुए विवाह की मंगल गीत सुनाये। जिसकी सभी श्रोता बंधु भाव विभोर होकर खूब आनंदित हुये। सैकड़ो श्रोताओं का हुजूम लग रहा। वहीं उपस्थित मुख्य अतिथि पूर्व सांसद रामकिशन यादव। राहुल मिश्रा समाज सेवीक, महानंद मिश्रा, अमित मिश्रा, रोहित, पवन, शिशु, विराट, उमेश, दिनेश, शुभम, गोलू, तबला वादक अनिल तिवारी, निक्की राशिक, प्रदुम्न, सैकड़ो श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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फर्मासिंस्ट न रहने से मरीज रहे हलकानचहनिया चन्दौली।चहनिया प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के तहत संचालित होने वाले नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र कभी डाक्टर तो कभी फर्मासिस्ट हमेशा गायब रहते है। जिससे मरीजों को दवा व उपचार में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बुद्धवार की दोपहर स्वस्थ्य केन्द्र के आस-पास के जब ग्रामीण इलाज के लिए पहुचे तो डाक्टर ने दवा का लिख दिया लेकिन फार्मसिस्ट के न रहने के कारण घंटां मरीजों को इंतजार करना पड़ा। जब डाक्टर मरीजों को चेक कर लिया उसके उपरान्त उन्ही के द्वारा प्रत्येक मरीजों को दवा आदि का वितरण किया। जिसे लेकर ग्रामीणों में आक्रोस व्याप्त है। वही अति प्राथमिक स्वास्थ्य दरियापुर केन्द्र प्रभारी आदिति सिंह ने बताया कि फार्मसिस्ट द्वारा मुझे कोई जानकारी नही दी गयी है कि किन कारणे से लापता है। वही बनारसी सिंह, रामदयाल सिंह, भोला राय, मुन्ना सोनकर, रमानन्द यादव सहित दर्जनों ग्रामीणों ने बताया कि फर्मासिस्ट हमेशा गायब रहता है।

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