Category: चंदौली

नासूर बनती जा रही चहनियां में जाम की समस्याचहनिया चन्दौलींशासन के लाख प्रयास के बावजूद भी चहनियॉ बाजार में अतिक्रमण व सड़कां पर ठेला, खोमचा व टेम्पों चालकां की मनमानी तथा सड़कों पर आड़े-तिरछे खड़े वाहनों से प्रायः जाम व झाम की समस्या का दंश झेलना पड़ रहा है। पुलिस के लाख प्रयासों के बावजूद भी चहनियॉ वाया बलुआ मार्ग शिवमन्दिर के पास अबैध टेम्पों स्टैण्ड में लगी टेम्पुओ की लम्बी कतार तथा कस्बा से सैदपुर मार्ग पर टेम्पों व वाहनों को आड़े तिरछे खड़ा कर देने से जाम की समस्या से जूझना पड़ रहा है। कभी-कभी तो सवारियों के बैठाने को लेकर बाद-विवाद व लड़ाई झगड़ा की नौबत आ जाती है। बावजूद भी स्थानीय पुलिस पिकेट पर न रहकर चाय-पान की दुकानों पर आराम फरमाते दिखे जाते है। वही लोगों ने दबी जुबान बताया कि अबैध टेम्पों स्टैण्ड के कारण आयेदिन जाम लगता जो स्टैण्ड पुलिस प्रशसन के संरक्षण फलता-फूलता रहता है। वही लोगों ने शासन प्रशासन से यथाशीघ्र बाजार में अतिक्रमण व जाम की समस्या से निजात दिलाये जाने की मांग किया है।

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प्रबोधिनी एकादशी पर श्रद्धालुओं ने़ लगाई आस्था की डुबकीचहनिया चन्दौली।क्षेत्र के मां भागीरथी के पश्चिमी वाहिनी बलुआ घाट पर प्रबोधिनी एकादशी के पावन पर्व पर हजारां श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाते हुए मन्दिर पूजा पाठ कर याचक ओर भिक्षुओं का दानपुन्य कर यश के भागी बने। इसी क्रम में क्षेत्र के महुआरी, कांवर, महुअरकलां, पूरा विजयी, तिरगावां, टाण्डाकलां, सैफपुर, नादी-निधौरा समस्त गंगा तटीय गावों के घाटो पर भारी भीड़ उमड़ी रही।शनिवार की अलसुबह ही हजरो श्रद्धालुओं की भीड़ बलुआ घाट पर पहुचने लगी और देखते ही देखते मेले जैसे रूवरूप लेते हुए भारी भीड़ के रूप में तब्दील हो गयी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु अपने योग चर्तुमासा निद्रा से जागते हैं इसी कारण इसे देव उठान या देवउठनी एकादशी भी कहा जाता है। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन मॉ तुलसी का विवाह भी श्री हरि नारायण से सम्पन्न कराया जाता है। उसी मान्यता के अनुसार समस्त जगत में मांगलिक कार्यक्रम प्रारम्भ हो जाते है। वही सुरक्षा की दृष्टि से उपनिरीक्षक विनोद सिंह, महिला कांस्टेबल कौशल्या देवी, चिंता देवी, राजेश कुमार, सरोज देवेंद्र प्रताप यादव के साथ गोताखोरों की टीम भी नाव से गंगा में निगरानी करती रही।

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भगवान भास्कर के जयकारे से गूजायमान हुई अध्यात्मिक नगरीरामनगर वाराणसीविन्ध्य पर्वत के तलहटी में भगवान भोले नाथ की त्रिशूल पर वसी नगरी वाराणसी में चार द्विवसीय डाला छठ बड़े ही धूॅमधाम के साथ मनाया गया। मॉ भगवती गंगा के दोनां तटां अध्यात्मिक नगरी तो दुसरी तरफ रामनगर के राजा का किला स्थित है। अस्सी घाट से लेकर राजघाट तक व रामनगर से लेकर पड़ाव डोमरी तक हजारां नर नारी भगवान भास्कर के महापर्व को पूर्ण करने में लगे रहे। जिसके क्रम में मंगलवार की अल सुबह ही व्रतियो ने मॉं गंगा के तट पर पहुच कर उदयाचल भगवान भास्कर को अर्ध्य दिया। जैसे भगवान भास्कर की किरणे मां गंगा के स्पर्श की कि चारों तरफ भगवान भास्कर व छठी मइया के गगन भेदी जयकारे से पूरा क्षेत्र गूजायमान हो गया और इसी अर्ध्य के साथ भगवान भास्कर महापर्व समाप्त हो गया।

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धनुष टूटने का दृश्य देख दर्शक हुए गदगद -शेरवां खखडा गांव में आयोजित श्री राम कथा केतिसरे दिन शुक्रवार की कथा वाचक पंडित मंगलम दीप महाराज कथा में बतलाया कि शिव धनुष टूटते ही चारों तरफ हर-हर महादेव व जय श्रीराम के नारे से पूरा पांडाल सहित गांव गुजायमान हो गया। इस दौरान राजा जनक के सीता स्वयंवर के लिये रखे गये शर्त को जब कोई राजा, देव-दानव-मानव पूरा नही कर पाए तब महाराज जनक निराश हो गये और उन्होने अपनी निराशा व्यक्त करते हुए कहा कि यदि मैं यह समझता कि यहां कोई भी वीर पुरूष नही सभी का-पुरूष ही का-पुरूष है। तो मैं अपनी बेटी के लिए एेंसा शर्त नही रखता। स्वयंर देखने के उद्देश्य से पहुचे लक्षमण तुरन्त ही उनको बातों से कुद्ध होकर कहे महाराज जनक रघुवंशियो के समक्ष इस तरह के शब्द बोलने का किसी को कोई अधिकार नही यह धनुष क्या चीज है अगर बड़े भैया का आदेश हो तो मैं पूरी पृथ्वी को गेद तरह उठाकर पटक कई टुकड़े कर दूं। जिस पर गुरू विश्वामित्र व प्रभुराम ने लक्षमण को समझाते हुए शान्त करवाया और महाराज जनक की निराशा को आशा में तब्दील करते हुए शुभ-मुहुर्त में विश्वामित्र के आदेशानुसार प्रभु श्रीराम ने धुनष पर तमंचा चढ़ाने गये और तमंचा चढ़ाते ही वह टूट गया। धनुष के टूटते ही चारो तरफ हर-हर महादेव, व जय श्रीराम के नारे से पूरा गांव सहित पंडाल गुजायमान हो गया। इस दौरान कथा में उपस्थित मंगल मिश्रा, सूर्य बली यादव, चंद्रभूषण त्रिपाठी, वशिष्ठ नरायण त्रिपाठी,बिशाल,मनोहर, अशोक मिश्रा, सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

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विशाल भंडारे के साथ सात द्विवसीय रामकथा का हुआ समापनमुगलसराय चन्दौली।अलीनगर थाना क्षेत्र स्थित सहरोई गांव में विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी श्री हनुमान जयंती के पावन शुभ अवसर पर नवयुवक मंगल दल सहरोई के तत्वाधान में सात दिवसीय संगीतमय रामकथा का आयोजन किया गया है। कथा अंतिम दिन पंडित शक्ति तिवारी ने कथा में बताया कि नारायण की कृपा कब किसपर बरस जायेगी उसको कोई नहीं जान पाता जिस प्रकार प्रभु श्रीराम की कृपा हनुमान जी पर हुई, सुग्रीव जी व विभिषण जी पर हुई। निच्छल भाव से युक्त जीवन यापन करने वालो पर कब प्रभु की कृपा हो जायेगी उसको तो वही जान सकते है। चंचल चित जीव सुग्रीव जिस पर रघुनाथ जी की कृपा हुई और विभिषण जी के पूरा राजपाठ ही दे दिया और अपने परम शिष्य हनुमान जी पर अपनी कृपा बरसा कर उन्हे अमरता का वरदान दिया और अष्ट सिद्धियां प्रदान कर दी। शक्ति तिवारी ने बतलाया की जीवन में यदि जीना सीखना है तो रामचरितमानस का चरण, शरण ,ग्रहण करना चाहिए रामचरितमानस हमको जीना सिखाती है भाई भाई के प्रति प्रेम कैसा होना चाहिए, माता-पिता के प्रति प्रेम कैसा होना चाहिए, पिता और पुत्र के प्रति प्रेम कैसा होना चाहिए, यह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी के जीवन से सीखा जा सकता हैऔर उन्होंने बतलाया की मनुष्य का शरीर साधन का धाम है मोक्ष का दरवाजा है और इस सांसारिक भव कुप से बाहर निकालने के लिए केवल और केवल एक नाम ओम, राम, शिव इन्हीं तीन नाम में से एक का जाप करें इसी में हम सब का कल्याण है और उन्होंने बतलाया की भगवान ज्ञान से मिले या ना मिले वैराग्य से मिले या ना मिले लेकिन प्रभु प्रेम से जरूर मिल जाते है।वही कथा के अतिम दिन विशाल भंडारे का आयोजन प्रसाद वितरण किया जिसमें हजारो नर-नारी बूढ़े-जवान बच्चे शामील रहे। इस दौरान राहुल मिश्रा समाजसेवी, अमित मिश्रा, रोहित, पवन, शिशु, विराट, उमेश, महानंद, दिनेश, शुभम, गोलू, तबला वादक अनिल तिवारी निक्कीरशिक, प्रद्युम्न, सैकड़ो श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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