कमीशन का अड्डा बन चुका है गोपाल बुक डिपो – अभिभावक परेशान

पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में स्थित गोपाल बुक डिपो की दर्दनाक कहानी

10 स्कूल का ठेका लेकर नहीं दे पा रहे हैं किताबें –
घंटों लाइन में मुस्क्कत के बाद कैसे-कैसे करके किताबें दे रहे हैं वह भी आधी अधूरी इनके पास पूरी किताब है ही नहीं।
दुकान पर अत्यंत भीड़ और दूर-दूर से अभिभावक आए हुए परेशान।
इतनी भीड़ यह संभाल नहीं पा रहे हैं और बिना गिने किताबें भी दे रहे हैं, दुकान पर दोबारा जाने पर और पूछने पर पता लगता है की चार किताबें हैं ही नहीं जो की एक हफ्ते बाद मिलेगी जबकि स्कूल में पढ़ाई निरंतर चालू है, आधी किताबें ई रिक्शा पर लोड हो कर आ रही हैं और आधी दुकान के बाहर जमीनों पर पड़ी है जिन किताबों को दुकानों द्वारा नहीं संभाला जा रहा है। तीसरी बार जाने पर किताबें मिली वह भी आधी अधूरी।
दुकानों पर ज्यादा भीड़ होने के कारण महिलाएं दुकान के काउंटर तक पहुंची नहीं पा रही हैं पता नहीं इसमें किसकी कमी है शिक्षा विभाग की या स्कूल की व्यवस्था की या दुकानों की कमीशन की –
शर्मनाक
सो रही व्यवस्था – सो रहा शिक्षा विभाग

प्रबोधिनी एकादशी पर श्रद्धालुओं ने़ लगाई आस्था की डुबकीचहनिया चन्दौली।क्षेत्र के मां भागीरथी के पश्चिमी वाहिनी बलुआ घाट पर प्रबोधिनी एकादशी के पावन पर्व पर हजारां श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाते हुए मन्दिर पूजा पाठ कर याचक ओर भिक्षुओं का दानपुन्य कर यश के भागी बने। इसी क्रम में क्षेत्र के महुआरी, कांवर, महुअरकलां, पूरा विजयी, तिरगावां, टाण्डाकलां, सैफपुर, नादी-निधौरा समस्त गंगा तटीय गावों के घाटो पर भारी भीड़ उमड़ी रही।शनिवार की अलसुबह ही हजरो श्रद्धालुओं की भीड़ बलुआ घाट पर पहुचने लगी और देखते ही देखते मेले जैसे रूवरूप लेते हुए भारी भीड़ के रूप में तब्दील हो गयी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु अपने योग चर्तुमासा निद्रा से जागते हैं इसी कारण इसे देव उठान या देवउठनी एकादशी भी कहा जाता है। कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष एकादशी के दिन मॉ तुलसी का विवाह भी श्री हरि नारायण से सम्पन्न कराया जाता है। उसी मान्यता के अनुसार समस्त जगत में मांगलिक कार्यक्रम प्रारम्भ हो जाते है। वही सुरक्षा की दृष्टि से उपनिरीक्षक विनोद सिंह, महिला कांस्टेबल कौशल्या देवी, चिंता देवी, राजेश कुमार, सरोज देवेंद्र प्रताप यादव के साथ गोताखोरों की टीम भी नाव से गंगा में निगरानी करती रही।